कौन हैं मोदी के मंत्री जॉर्ज कुरियन? BJP नेता होकर भी क्यों देना पड़ा कैबिनेट मिनिस्टर पद से इस्तीफा

George Kurian Resignation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार में मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अचानक केंद्रीय मंत्रिपरिषद से 23 जून को इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सबसे बड़ा ईसाई चेहरा माने जाने वाले जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तुरंत प्रभाव से मंजूर भी कर लिया है।

राष्ट्रपति भवन की प्रेस विज्ञप्ति में इस्तीफे के पीछे की कोई खास वजह नहीं बताई गई। 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे थे। कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे और उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो गया। भाजपा ने इस बार उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद उनके मंत्री पद से हटने की स्थिति बनी।

George Kurian Resignation

सोशल मीडिया पर भी सवाल उठने लगे कि आखिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इतने पुराने और भरोसेमंद नेता को मंत्री पद क्यों छोड़ना पड़ा? क्या वह पार्टी से नाराज थे या इसके पीछे कोई संवैधानिक और राजनीतिक कारण था? दरअसल इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए जॉर्ज कुरियन के राजनीतिक सफर और हालिया परिस्थितियों को जानना जरूरी है।

कौन हैं जॉर्ज कुरियन? (Who is George Kurian?)

जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कोई नए नेता नहीं हैं। वह पार्टी के उन गिने-चुने चेहरों में से हैं, जो 1980 में बीजेपी की स्थापना के समय से ही इसके साथ जुड़े हुए हैं। 65 वर्षीय कुरियन मूल रूप से केरल के कोट्टायम जिले के एट्टूमानूर नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले नंबियाकुलम के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को कुरियन और अन्नम्मा के घर में हुआ था। वह अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।

जॉर्ज कुरियन केरल के सबसे प्रभावशाली ईसाई समुदायों में से एक 'साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च' से ताल्लुक रखते हैं। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई गृहनगर से पूरी करने के बाद वकालत की पढ़ाई की। उन्होंने कानून में ग्रेजुएशन (LLB) और पोस्ट-ग्रैजुएशन (MA) किया है। वह देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में एक एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस भी करते रहे हैं।

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PM मोदी और शाह के भाषणों को जॉर्ज कुरियन करते थे ट्रांसलेट

जॉर्ज कुरियन केरल के प्रभावशाली ईसाई समुदाय सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े हैं। राज्य की राजनीति और मीडिया चर्चाओं में वह लंबे समय तक भाजपा के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे हैं। केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों के दौरान कई बार कुरियन को उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते हुए देखा गया, जिससे पार्टी के भीतर उनकी सक्रिय भूमिका भी साफ नजर आती है।

जब 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया था, तब राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे केरल के ईसाई मतदाताओं तक भाजपा की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा था। हालांकि, इस रणनीति का अपेक्षित चुनावी लाभ पार्टी को नहीं मिल सका। मई 2026 में हुए केरल विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा केवल 3 सीटें ही जीत पाई, जिससे राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठे।

जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक सफर (George Kurian Political Career)

केरल जैसे राज्य में, जहां बीजेपी लंबे समय से अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जॉर्ज कुरियन पार्टी का एक बेहद भरोसेमंद नाम रहे हैं। उन्होंने संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

  • जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (National Executive Committee) के सदस्य रह चुके हैं।
  • जॉर्ज कुरियन बीजेपी की केरल इकाई के महासचिव (State General Secretary) और कोर कमेटी के सदस्य व उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
  • केरल के लोग उन्हें टीवी बहसों का एक जाना-माना चेहरा मानते हैं। इसके अलावा जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह केरल के दौरे पर जाते थे, तो उनके भाषणों को मलयालम भाषा में ट्रांसलेट करने की जिम्मेदारी अक्सर जॉर्ज कुरियन ही संभालते थे।
  • जॉर्ज कुरियन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार (1999 से 2004) के दौरान तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के ओएसडी (Officer on Special Duty) रह चुके हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) के उपाध्यक्ष बनने वाले पहले मलयाली व्यक्ति भी थे।
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क्यों मिला था मोदी कैबिनेट में मौका?

साल 2024 में जब केंद्र में तीसरी बार मोदी सरकार बनी, तो 9 जून 2024 को जॉर्ज कुरियन को चौंकाने वाले नाम के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) पद की शपथ दिलाई गई। 11 जून 2024 को उन्होंने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला। बाद में उन्हें मध्य प्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना गया था।

बीजेपी का उन्हें मंत्री बनाने का फैसला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। पार्टी केरल में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती थी और इसके लिए उसे वहां के ईसाई समुदाय तक पहुंच बनानी थी। जॉर्ज कुरियन को कैबिनेट में शामिल करके बीजेपी ने केरल के ईसाइयों को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी। इससे पहले साल 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में कुरियन ने पुथुपल्ली सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ओम्मन चांडी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

अचानक क्यों देना पड़ा इस्तीफा? क्या है नाराजगी की वजह?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि आखिर जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा क्यों दिया और क्या वह सचमुच गुस्से में हैं? संविधान के मुताबिक केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने रहने के लिए किसी भी मंत्री का संसद के दोनों सदनों (लोकसभा या राज्यसभा) में से किसी एक का सदस्य होना जरूरी है। जॉर्ज कुरियन का 6 साल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका था। कार्यकाल खत्म होने के बाद वह सांसद नहीं रहे, जिसके चलते संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना ही था।

अंदरूनी सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक इस इस्तीफे के पीछे केवल तकनीकी कारण नहीं बल्कि कुछ राजनीतिक समीकरण भी हैं। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए जो 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी, उसमें जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका नहीं दिया गया।

जनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने की वजह से आलाकमान ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने से पहले कुरियन को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उन्हें दोबारा नामांकित नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अचानक लिस्ट देखकर उनके लिए यह एक बड़ा झटका था।

भाजपा के लिए क्यों अहम हैं जॉर्ज कुरियन?

केरल में भाजपा लंबे समय से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जॉर्ज कुरियन उन चेहरों में रहे हैं जिन्होंने संगठन विस्तार, अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंच और पार्टी के संदेश को स्थानीय स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति भी इसी राजनीतिक और सामाजिक अनुभव का परिणाम मानी जाती है।

जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा पहली नजर में भले ही राजनीतिक नाराजगी का मामला लगे, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के अनुसार इसकी मुख्य वजह उनकी राज्यसभा सदस्यता का समाप्त होना है।

भाजपा ने उन्हें इस बार दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा, जिसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। हालांकि यह सवाल आगे भी चर्चा में रहेगा कि भाजपा के इतने पुराने और भरोसेमंद नेता को दोबारा अवसर क्यों नहीं मिला। फिलहाल इतना साफ है कि जॉर्ज कुरियन की राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में पार्टी उन्हें किसी नई भूमिका में जिम्मेदारी दे सकती है।

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