शादी के सपने,बुक थे टिकट पर लखनऊ अग्निकांड ने ली जान! कौन थे निलेश-अनामिका, जिनकी लव स्टोरी का दर्दनाक हुआ अंत
Lucknow Fire Accident: लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने सिर्फ 15 लोगों की जान नहीं ली, बल्कि कई परिवारों के सपनों को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया। इस हादसे की सबसे दर्दनाक कहानियों में एक कहानी निलेश कुमार और अनामिका सामंत की है। दोनों ने साथ जिंदगी बिताने के सपने देखे थे, परिवार शादी की तैयारियों में जुट चुका था, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। कुछ महीनों बाद जिनकी शादी होने वाली थी, वे अब दुनिया में नहीं हैं। इस हादसे ने दो परिवारों से उनके बच्चे छीन लिए और एक ऐसी प्रेम कहानी को अधूरा छोड़ दिया, जो जल्द ही शादी के रिश्ते में बदलने वाली थी।
सोमवार 22 जून दोपहर करीब 2:30 बजे लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक बहुमंजिला इमारत में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में एसी ब्लास्ट को हादसे की वजह माना जा रहा है। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में उत्तर प्रदेश के 11, पश्चिम बंगाल के 2, मध्य प्रदेश और हरियाणा के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। ज्यादातर मृतकों की उम्र 20 से 30 साल के बीच बताई गई है। इन्हीं मृतकों में 27 वर्षीय निलेश कुमार और 30 वर्षीय अनामिका सामंत भी शामिल हैं।

एक ही एनीमेशन सेंटर में शुरू हुई थी लव स्टोरी (How Nilesh and Anamika Love Story)
नीलेश कुमार और अनामिका सामंत लखनऊ के इसी अलीगंज वाले एनीमेशन सेंटर में एक साथ काम करते थे। रोज का मिलना, साथ काम करना और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी होती चली गई। यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को पता ही नहीं चला। जब दोनों ने एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने परिवारों को इस बारे में बताया।
अच्छी बात यह थी कि दोनों के परिवारों ने उनके इस रिश्ते को बेहद खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था। घर में शादियों की तैयारियां और बातचीत का दौर शुरू हो चुका था। महज कुछ दिन पहले ही अनामिका के माता-पिता पश्चिम बंगाल से खास तौर पर नीलेश के परिवार से मिलने लखनऊ आए थे। दोनों परिवारों की यह मुलाकात बेहद शानदार रही और शादी की शुरुआती रस्में भी पूरी कर ली गई थीं। नीलेश के भाई अभिषेक पुरानी बातों को याद कर रो पड़ते हैं। वह बताते हैं कि पूरा परिवार अनामिका से मिलकर बेहद खुश था और सबने उसे अपने घर की बहू मान लिया था।

कौन थे निलेश और अनामिका?
निलेश कुमार और अनामिका सामंत एक ही एनीमेशन सेंटर में काम करते थे। रोज साथ काम करते हुए दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और फिर यह रिश्ता प्यार में बदल गया। समय के साथ दोनों ने अपने परिवारों को भी इस रिश्ते के बारे में बताया। अच्छी बात यह रही कि दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।
शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं और भविष्य की योजनाएं बनाई जा रही थीं। परिवार के लोग बताते हैं कि दोनों एक-दूसरे के साथ बेहद खुश थे और आने वाले समय को लेकर कई सपने देख रहे थे।

अगले हफ्ते की थी ट्रेन टिकट, पर नियति ने खेल दिया खूनी खेल
दोनों परिवारों के बीच आगे की बातचीत के लिए एक बड़ा प्लान तैयार था। अगले हफ्ते नीलेश के पूरे परिवार को शादी की पक्की तारीख तय करने और बाकी रस्मों के लिए पश्चिम बंगाल जाना था। इसके लिए ट्रेन के टिकट भी एडवांस में बुक कराए जा चुके थे। दोनों घरों में इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह था।
नीलेश अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। वह एक बेहद जिम्मेदार बेटे और भाई थे। नीलेश इस साल ऑफिस में अपने प्रमोशन और सैलरी बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। इसी वजह से उन्होंने अनामिका से बात करके शादी को अगले साल तक के लिए टाल दिया था, ताकि जब नई जिंदगी शुरू हो, तो आर्थिक रूप से कोई कमी न रहे।

'नए घर में ब्याह कर लाऊंगा दुल्हन'- अधूरे रह गए नीलेश के वादे
नीलेश सिर्फ अपने करियर को ही नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के भविष्य को संवारने में जुटे थे। वह अपने घर के निर्माण कार्य में भी आर्थिक रूप से बड़ी मदद कर रहे थे। वह अक्सर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से हंसते हुए कहते थे कि, "जब हमारा नया घर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा और हम वहां शिफ्ट हो जाएंगे, तभी मैं शादी करूंगा। नए घर में ही मेरी दुल्हन का गृह प्रवेश होगा।" उनके रिश्तेदार समरेंद्र बताते हैं कि नीलेश ने कई बार इस बात को दोहराया था। लेकिन अफसोस, अब उस नए बनते घर में शहनाई की जगह रोने की आवाजें गूंज रही हैं।
इस भयानक हादसे ने सिर्फ नीलेश और अनामिका को ही नहीं छीना, बल्कि अनामिका के परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। इस अग्निकांड में अनामिका की 27 वर्षीय चचेरी बहन सोमिल्या की भी जलकर मौत हो गई। सोमिल्या भी उसी संस्थान में काम करती थी। सोमवार की सुबह तक जो परिवार शादी के कार्ड, कपड़ों और रस्मों की प्लानिंग कर रहा था, मंगलवार को वह पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर अपनों के शव का इंतजार कर रहा था। जब अनामिका की मां ने अपनी लाडली का झुलसा हुआ शव देखा, तो वह चीख मारकर वहीं बेहोश हो गईं। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें यह मंजर देखकर रो पड़ीं।

लखनऊ अग्निकांड: न फायर सेफ्टी थी और न ही इमरजेंसी गेट
अब इस पूरे मामले पर प्रशासन की नींद टूटी है। मंगलवार सुबह 11 बजे हादसे की जांच के लिए शासन द्वारा गठित एसआईटी (SIT) और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची। इस उच्च स्तरीय जांच टीम में आईपीएस प्रवीण कुमार और आईएएस अमृत अभिजात जैसे सीनियर अफसर शामिल हैं।
शवों का करीब 7 घंटे तक पोस्टमॉर्टम चलने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया है। मृतकों में उत्तर प्रदेश के 11, पश्चिम बंगाल के 2, मध्य प्रदेश और हरियाणा के 1-1 निवासी शामिल हैं। जान गंवाने वाले ज्यादातर युवाओं की उम्र 20 से 30 साल के बीच थी, जो यहां अपने करियर को नई उड़ान देने आए थे।
जांच में जो बातें सामने आई हैं, वो बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली हैं..
अवैध निर्माण: जिस बिल्डिंग में यह कोचिंग और एनीमेशन सेंटर चल रहा था, वह पूरी तरह अवैध थी। साल 2016 में ही इसे ढहाने (ध्वस्तीकरण) का आदेश जारी हुआ था, लेकिन बाद में साठगांठ के चलते उस आदेश को निरस्त कर दिया गया।
सुरक्षा के शून्य इंतजाम: पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, इस पूरी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी (आग बुझाने) का कोई इंतजाम नहीं था।
बंद था एग्जिट गेट: बिल्डिंग में कोई इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) नहीं बनाया गया था। सबसे बड़ी लापरवाही यह थी कि छत पर जाने वाले दरवाजे पर ताला लटका था। जब नीचे आग लगी, तो लोग जान बचाने के लिए ऊपर भागे, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण वे वहीं फंस गए और दम घुटने व जलने से उनकी मौत हो गई।
अब चलेगा बुलडोजर, 4 आरोपी गिरफ्तार और कई अफसर नपे
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के वीसी प्रथमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि इस जघन्य लापरवाही को बख्शा नहीं जाएगा। बिल्डिंग के मालिक को नोटिस भेजकर 15 दिनों में जवाब मांगा गया है और जल्द ही इस अवैध इमारत पर बुलडोजर चलाया जाएगा।
यह पूरी प्रॉपर्टी रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज के मालिक वीरेंद्र शुक्ला की है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी वीरेंद्र शुक्ला समेत 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही, भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए एलडीए (LDA) के 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि संलिप्त पाए गए 16 अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे एयर कंडीशनर (AC) में हुए एक जोरदार ब्लास्ट ने इस पूरी तबाही को जन्म दिया था। दमकल विभाग की गाड़ियां हादसे के करीब 40 मिनट बाद पहुंचीं, जिसके बाद एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने 7 घंटे तक कड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर, दीवारें तोड़-तोड़कर शवों और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। प्रशासनिक कार्रवाई अपनी जगह होती रहेगी, लेकिन व्यवस्था की इस चूक ने नीलेश, अनामिका और सोमिल्या जैसे कई होनहार युवाओं को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया।















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