Lucknow Aliganj Coaching Fire: 15 छात्रों को आग में झोंकने वाले 4 अरेस्ट दोषी कौन? बिजली-LDA के 4 अफसर सस्पेंड

Lucknow Aliganj Coaching Fire: लखनऊ के व्यस्त अलीगंज इलाके में सोमवार (22 जून) की उस भयानक सुबह ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया। रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट नाम की कोचिंग संस्था में लगी आग ने 12 छात्रों समेत 15 लोगों की जान ले ली। सपने संजोए बैठे ये बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, लेकिन एक लापरवाही ने सब कुछ खत्म कर दिया।

इस हादसे ने न सिर्फ परिवारों को रोता छोड़ा, बल्कि अवैध निर्माण, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और नियामक संस्थाओं की मिलीभगत की गहरी सच्चाई उजागर कर दी है। आइए जानते हैं कि कौन हैं वो गैर-इरादतन हत्या करने वाले 4 दोषी?

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कौन हैं वो दोषी, जिन्होंने 15 छात्रों को मरने छोड़ा

अलीगंज पुलिस ने मामले में गैर-इरादतन हत्या समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत केस दर्ज हुआ। अब तक चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है:

  • वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62) - बिल्डिंग मालिक और संस्थान से जुड़े।
  • रामकृष्ण उपाध्याय (43), अलीगंज।
  • तूशार कृष्ण जायसवाल (31), बालागंज।
  • सुरेश कुमार साहू, केशवनगर।

इनके अलावा अन्य जिम्मेदार लोगों की तलाश जारी है।

LDA और बिजली विभाग के अफसर सस्पेंड

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत सख्ती दिखाते हुए चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया:

  • गौरव कुमार (एक्सईएन, जानकीपुरम, बिजली विभाग)
  • कमलेंद्र कुमार सिंह (अग्निशमन अधिकारी, इंदिरा नगर)
  • अनिल कुमार (AE, लखनऊ विकास प्राधिकरण)
  • प्रमोद कुमार पांडे (JE, लखनऊ विकास प्राधिकरण)

LDA के वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि बिल्डिंग पर पहले 2016 में गिराने का आदेश हुआ था, जिसे बाद में रहस्यमय तरीके से निरस्त कर दिया गया। अब मालिक को नोटिस जारी किया गया है और बुलडोजर एक्शन की तैयारी चल रही है। SIT (जिसमें IPS प्रवीण कुमार और IAS अमृत अभिजात शामिल हैं) और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच शुरू कर दी है। सीएम योगी आदितयनाथ की तरफ से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और शव सौंप दिए गए हैं।

लखनऊ अग्निकांड सिस्टेमिक फेल्योर, जवाबदेही किसकी?

यह हादसा मात्र एक आग का हादसा नहीं है। यह उत्तर प्रदेश के शहरी प्रशासन, कोचिंग उद्योग के अनियंत्रित विस्तार और "गवर्नेंस" के दावों की सच्चाई को उजागर करने वाला आईना है। योगी आदित्यनाथ सरकार के साढ़े सात साल के शासन में लखनऊ जैसे राजधानी शहर में अवैध बिल्डिंग कैसे चल रही थी? LDA जैसे प्राधिकरण की नाकामी क्यों? बिजली विभाग और अग्निशमन सेवाएं क्यों चुप थीं?

1. अवैध निर्माण का मॉडल

रामेश्वरम इंस्टीट्यूट वाली बिल्डिंग 2016 में ही डेमोलिशन लिस्ट में थी। फिर आदेश कैसे रद्द हुआ? यह सवाल LDA की पूरी व्यवस्था पर है। उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों का बूम पिछले एक दशक से चल रहा है। अलीगंज, इंदिरानगर, गोमतीनगर जैसे इलाकों में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल कोचिंग चल रही हैं। ज्यादातर बिल्डिंगों में फायर सेफ्टी नॉर्म्स शून्य, इलेक्ट्रिकल वायरिंग पुरानी और एग्जिट रूट्स ब्लॉक। छात्रों की भीड़ बढ़ाने के चक्कर में मालिक सुरक्षा को ताक पर रख देते हैं।

LDA के अधिकारी नोटिस जारी करते हैं, फिर 'सेटलमेंट' हो जाता है। यह सिलसिला पुराना है। 2017 के बाद भी योगी सरकार के कई दौर में अवैध कॉलोनियों और बिल्डिंगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन बड़े माफिया और राजनीतिक संरक्षण वाले केस अटक जाते हैं। इस बार भी 16 और अधिकारियों पर कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। यानी सिस्टम में गहरी सड़न है।

2. कोचिंग इंडस्ट्री का अंधेरा

लखनऊ समेत पूरे यूपी में कोचिंग सेंटर प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, Bank, Railway, UPPSC आदि) का हब बन गए हैं। मध्यवर्गीय परिवार अपने बच्चों को यहां भेजते हैं। लेकिन रेगुलेशन लगभग न के बराबर। कोई मानकीकृत फायर ऑडिट नहीं, कोई नियमित इंस्पेक्शन नहीं। मालिक कम खर्च में ज्यादा स्टूडेंट्स ठूंस देते हैं। आग लगने पर पंखे, AC और पुरानी वायरिंग ने आग को भड़काया। कई छात्र ऊपरी मंजिल पर फंस गए। यह हादसा देश के अन्य कोचिंग अग्निकांडों (जैसे सूरत, दिल्ली, कोटा के कुछ मामले) की याद दिलाता है। लेकिन राजधानी में होने के कारण यह राजनीतिक तूफान बन गया।

3. सिस्टम में गहरी सड़न

LDA, बिजली विभाग और अग्निशमन - तीनों की जिम्मेदारी है। अगर ये विभाग राजनीतिक दबाव या रिश्वत में फंसे हैं, तो एक हादसा पूरे सिस्टम को एक्सपोज कर देता है। योगी सरकार 'अपराध मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त' उत्तर प्रदेश का नारा देती रही है। इस मामले में अगर बड़े माफिया तक पहुंची कार्रवाई नहीं हुई तो आलोचना बढ़ेगी।

4. व्यवस्थागत सुधार की जरूरत

  • फायर सेफ्टी ऑडिट: सभी कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य ऑडिट और एनओसी।
  • LDA सुधार: अवैध बिल्डिंगों पर तुरंत बुलडोजर + दोषी अधिकारियों पर सख्त पेनल्टी।
  • कोचिंग रेगुलेशन: एक अलग पॉलिसी - न्यूनतम इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टूडेंट-टीचर रेशियो, सेफ्टी स्टैंडर्ड।
  • बिजली विभाग: पुरानी वायरिंग चेक और लोड क्षमता का सख्ती से पालन।
  • ट्रांसपेरेंसी: सभी प्राधिकरणों की नोटिस और एक्शन की ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी।

5. मध्यवर्ग का गुस्सा: IAS, PCS, बैंक अधिकारी बनने का सपने मौत में बदले

ये 15 छात्र मध्यवर्ग और निम्न-मध्यवर्ग के थे - वे बच्चे जो IAS, PCS, बैंक अधिकारी बनने का सपना देख रहे थे। उनके माता-पिता ने सालों की मेहनत और पैसे लगाए थे। इस हादसे ने पूरे मध्यवर्ग को झकझोरा है।

लखनऊ अग्निकांड 15 जिंदगियों की कीमत पर हमें याद दिलाता है कि पेपर पर नियम कितने भी सख्त हों, ग्राउंड पर अमल न हो तो वे बेकार हैं। अवैध निर्माण, लापरवाही और मिलीभगत की इस त्रिकोणीय व्यवस्था को तोड़ना होगा। गिरफ्तारियां और सस्पेंशन स्वागत योग्य हैं, लेकिन असली न्याय तब होगा जब दोबारा ऐसा हादसा न हो।

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