कौन है पाकिस्तान का विवादित नेता अल्ताफ हुसैन? पीएम मोदी से लगाई मदद की गुहार, कहा-प्लीज बचा लीजिए
Who is Altaf Hussain: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर "ऑपरेशन सिंदूर" चलाया, जिसमें कई आतंकी मारे गए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी आक्रामक रुख अपनाया। हालांकि अब दोनों देशों के बीच सीज फायर हो चुका है लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की कड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने उग्र रवैया अपना लिया। इसी बीच एक ऐसा बयान सामने आया है जो पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति और मानवाधिकार मुद्दों की ओर भी ध्यान खींचता है। पाकिस्तान के निर्वासित और विवादित नेता अल्ताफ हुसैन, जो मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) का संस्थापक है, उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक भावुक अपील की है।

पीएम मोदी से मदद की गुहार
लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान अल्ताफ हुसैन ने पीएम मोदी से कहा कि वह बंटवारे के बाद पाकिस्तान गए उर्दू भाषी लोगों यानी "मुहाजिरों" की हालत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएं। उसका कहना है कि मुहाजिरों को पाकिस्तान में अब तक बराबरी का दर्जा नहीं मिला। वे लगातार भेदभाव और जुल्म का शिकार हो रहे हैं।
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'मुहाजिरों पर हो रहा है अत्याचार'
अल्ताफ हुसैन का कहना है कि पाकिस्तान ने मुहाजिरों को कभी अपने नागरिकों के तौर पर पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया। उसका दावा है कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई और हिंसा में अब तक 25,000 से ज्यादा मुहाजिर मारे जा चुके हैं। हुसैन का आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना मुहाजिरों की आवाज को दबा रही है, और उन्हें राजनीतिक और सामाजिक रूप से अलग-थलग किया जा रहा है।
कौन है पाकिस्तान के विवादित नेता अल्ताफ हुसैन?
अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान का ऐसे नेता है जिसने हमेशा मुहाजिरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। मुहाजिर उन लोगों को कहा जाता है जो 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान गए थे। ये अधिकतर उर्दू भाषी लोग हैं जो कराची और हैदराबाद जैसे शहरों में बस गए। अल्ताफ हुसैन ने इन्हीं लोगों के हक के लिए 1984 में एक राजनीतिक पार्टी बनाई - मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM)।
कराची में जन्म, लेकिन राजनीति ने पहुंचा दिया लंदन
अल्ताफ हुसैन का जन्म 17 सितंबर 1953 को कराची में हुआ था। शुरू में छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद जल्दी ही वो मुहाजिरों के बीच लोकप्रिय हो गया। लेकिन MQM पर कराची में हिंसा, फिरौती और टारगेट किलिंग जैसे आरोप लगे। इसके बाद 1992 में वह पाकिस्तान छोड़कर लंदन चला गया। तब से वे वहीं रह रहा है और लंबे समय से वहीं से पार्टी को चला रहा है।
ब्रिटेन की नागरिकता और विवादों से जुड़ा नाम
लंदन जाकर अल्ताफ हुसैन ने ब्रिटिश नागरिकता ले ली। लेकिन विवाद उसका पीछा नहीं छोड़ते। पाकिस्तान में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और लंदन में भी उस पर मनी लॉन्ड्रिंग और भड़काऊ भाषणों से जुड़े मामलों की जांच हुई है। 2016 में उनके एक भाषण के बाद MQM दो हिस्सों में बंट गई - एक हिस्सा पाकिस्तान में रह गया (MQM-Pakistan) और दूसरा हिस्सा लंदन में उसके साथ जुड़ा रहा।
पाकिस्तान में कम हुआ असर, लेकिन बयान अब भी सुर्खियों में
आज की तारीख में पाकिस्तान की राजनीति में अल्ताफ हुसैन का असर पहले जैसा नहीं है। उसकी पार्टी कमजोर हो गई है और कई पुराने साथी भी उनसे अलग हो चुके हैं। लेकिन जब भी वो कोई बयान देता है, वह सुर्खियों में आ जाता है। हाल ही में उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वह मुहाजिरों के मुद्दे को दुनिया के सामने उठाएं।
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