क्या है G7? कौन-कौन से देश हैं इसके सदस्य, कैसे करता है काम, भारत सदस्य नहीं फिर भी हर बार मेहमान क्यों?
What is G7: दुनिया के सात सबसे विकसित और औद्योगिक देशों का समूह G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) इस बार कनाडा के कनानास्किस में तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के लिए एकत्र हो रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और जलवायु संकट जैसे कई मोर्चों पर जूझ रही है, यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। तीन दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्थिरता और व्यापार नीति, आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन, ईरान-इज़राइल और रूस-यूक्रेन जैसे भू-राजनीतिक संकट, स्वास्थ्य, महामारी से निपटने की रणनीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। G7 सिर्फ एक आर्थिक मंच नहीं है, यह उन देशों का समूह है जो विश्व की 44% GDP और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर गहरा प्रभाव रखते हैं। इस रिपोर्ट में जानिए, G7 आखिर है क्या? इसके सदस्य देश कौन-कौन हैं और भारत, जो G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी इस अहम बैठक का हिस्सा क्यों बना है?

क्या है G7?
G7 यानी Group of Seven यह दुनिया के सात सबसे विकसित और औद्योगिक देशों का एक अप्राकृतिक लेकिन अत्यंत प्रभावशाली समूह है। इसकी स्थापना का उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सामूहिक विचार और समन्वय करना है।
G7 की स्थापना कब और क्यों हुई?
G7 की शुरुआत 1975 में हुई थी, जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं तेल संकट और आर्थिक मंदी से जूझ रही थीं।
पहली बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति वालेरी जिस्कार देस्तें की पहल पर फ्रांस में हुई थी।
शुरुआत में इसे G6 कहा गया (कनाडा 1976 में शामिल हुआ), फिर बन गया G7।
रूस 1998 में जुड़ा, और यह बना G8, लेकिन 2014 में क्रीमिया पर कब्ज़े के बाद रूस को बाहर कर दिया गया।
G7 के सदस्य देश- G7 member countries
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
- ब्रिटेन (UK)
- फ्रांस (France)
- जर्मनी (Germany)
- जापान (Japan)
- इटली (Italy)
- कनाडा (Canada)
- साथ ही, यूरोपीय संघ (EU) को भी प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
What Does G7 Do- G7 क्या करता है?
G7 यानी ग्रुप ऑफ सेवन, दुनिया के सात सबसे विकसित और शक्तिशाली देशों का एक मंच है, जो आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और समन्वय करता है। यह समूह मुख्य रूप से निम्नलिखित काम करता है
- वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखना: G7 सदस्य देश आर्थिक नीतियों पर चर्चा करते हैं ताकि विश्व अर्थव्यवस्था स्थिर और सतत विकास की राह पर चले। वे व्यापार, निवेश और वित्तीय सुधारों को बढ़ावा देते हैं।
- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना: वे मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार बढ़े और आर्थिक विकास को समर्थन मिले।
- वैश्विक सुरक्षा और शांति: G7 देशों के नेता सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर भी बातचीत करते हैं, जैसे आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष।
- जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण: जलवायु संकट से निपटने के लिए G7 सदस्य देश नीतियां बनाते हैं, जैसे कार्बन उत्सर्जन कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।
- वैश्विक स्वास्थ्य: महामारी जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग और संसाधन जुटाने की योजना बनाते हैं।
- नवाचार और तकनीकी विकास: डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों के नियमों पर चर्चा करते हैं।
- विकासशील देशों के लिए सहायता: विकासशील देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मदद और सहयोग का संकल्प लेते हैं।
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भारत G7 का सदस्य नहीं, फिर भी हर बार मेहमान क्यों?
भारत G7 का हिस्सा इसलिए नहीं है क्योंकि जब इस समूह की स्थापना 1975 में हुई थी, तब इसका उद्देश्य केवल विकसित, उच्च आय वाले, लोकतांत्रिक और औद्योगिक देशों को एक मंच पर लाना था। उस समय भारत एक विकासशील देश था जिसकी अर्थव्यवस्था उतनी मज़बूत नहीं थी, और वह वैश्विक आर्थिक या भू-राजनीतिक निर्णयों में बड़ी भूमिका नहीं निभाता था। इसलिए भारत को इस क्लब में शामिल नहीं किया गया।
हालांकि, अब भारत की स्थिति काफी बदल चुकी है। भारत आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, तकनीक, जलवायु, वैश्विक स्वास्थ्य और डिजिटल शासन जैसे क्षेत्रों में उसका बढ़ता हुआ प्रभाव है। इसके अलावा, भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है और ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूती से आगे रखता है। इन्हीं कारणों से G7 समूह भारत को हर साल अपनी बैठकों में "विशेष अतिथि" के रूप में आमंत्रित करता है। यह एक तरह से भारत की वैश्विक स्वीकार्यता और बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव का संकेत है। हालांकि भारत अब भी G7 का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन उसकी भागीदारी यह दर्शाती है कि G7 देशों को भारत की मौजूदगी और राय की आवश्यकता है। भविष्य में यदि G7 अपने ढांचे का विस्तार करता है, तो भारत का स्थायी सदस्य बनना संभव है। लेकिन फिलहाल भारत की भूमिका एक प्रभावशाली साझेदार की है, जो मंच का हिस्सा न होते हुए भी, उसकी चर्चाओं और निर्णयों में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
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G8 में रूस की एंट्री और बाहर निकलने का इतिहास
- 1997 में रूस को G7 में शामिल किया गया और इसके बाद यह समूह G8 बन गया।
- G8 दुनिया की आठ सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह था - अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और रूस।
- रूस की सदस्यता एक तरह से सामरिक साझेदारी और शीत युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम था।
रूस को बाहर क्यों निकाला गया?
2014 में रूस ने यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर कब्जा कर लिया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध माना गया।
इस कदम की कड़ी आलोचना हुई, और इसके विरोध में बाकी G7 देशों ने रूस को समूह से निलंबित कर दिया।
तब से रूस को आधिकारिक रूप से G8 से बाहर कर दिया गया और समूह फिर से G7 बन गया।
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