जब राष्ट्रपति और अमेरिका ने छोड़ा साथ...तब 640 बेबस अफगानियों को प्लेन के क्रू ने कैसे बचाया? साहस की कहानी
इतिहास में इस रेस्क्यू ऑपरेशन को हमेशा याद रखा जाएगा। क्योंकि, ये रेस्क्यू ऑपरेशन अगर फेल होता तो एक झटके में सैकड़ों लोग मारे जाते।
काबुल, अगस्त 17: काबुल पर तालिबान का कब्जा हो चुका था और अफगानिस्तान के सैकड़ों-हजारों लोग अपनी जान की सलामती के लिए किसी भी तरह से देश से बाहर निकलना चाह रहे थे। अमेरिका की 'मक्कारी' और राष्ट्रपति अशरफ गनी की 'धोखेबाजी' के बीच अफगानिस्तान के उन सैकड़ों लोगों के पास जान बचाने का इकलौता विकल्प काबुल से बाहर निकल जाना था, जिन्होंने या तो अफगानिस्तान सरकार का साथ दिया था या फिर अमेरिकी सेना का। अमेरिका रातों रात बोरिया बिस्तर समेट कर भाग निकला और अफगान राष्ट्रपति करोड़ों रुपये बैग में भरकर फरार हो गये...और इन सबके बीच सैकड़ों जान ठगी आंखों से अपनी दुनिया को लुटते देख रहे थे। अमेरिकी प्लेन में 600 से ज्यादा अफगानी चीख रहे थे...जान बचाने की फरियाद लगा रहे थे।

हर चेहरे पर खौफ...हर कोई लाचार
काबुल एयरपोर्ट पर चीख-पुकार मची थी और अमेरिकी सेनी की गोली लगने से करीब 5 लोग अपनी जान गंवा चुके थे। काबुल एयरपोर्ट से बाहर आना, मतलब तालिबान के हाथों मारा जाना, प्लेन पर लटकने का मतलब खुद अपनी हाथों से जान लेना....लेकिन, उस वक्त अफगानिस्तान के बेबस लोगों को कुछ समझ नहीं आ रहा था। हर कोई बदहवास था, हर कोई किसी भी तरह से प्लेन के अंदर बैठ जाना चाहता था...अपनी जान बचा लेना चहता था। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इन्हें धोखा दिया था, वो खुद स्पेशल विमान में चार गाड़ियों और करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गये, लेकिन इन लोगों का कोई पुरसानेहाल नहीं रहा। डर... मजबूरी... लाचारी...इस प्लेन में मौजूद हर अफगान के चेहरे पर अमेरिका द्वारा अकेले छोड़ दिए जाने की कहानी कह रही थी। बदहवासी बता रही थी कि तालिबान के बेरहम हाथों में कहीं ये फंस नहीं जाएं।

प्लेन में 134 की जगह 640 लोग
अमेरिका के इस फ्लाइट में सिर्फ 134 लोग बैठ सकते हैं लेकिन, प्लेन का दरवाजा जैसे ही खुला...काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद हर अफगानी इस फ्लाइट में बैठ जाने के लिए उमड़ पड़ा। ये अमेरिका की बाहुबली कही जाने वाली सी-17 ग्लोबमास्टर विमान के अंदर की तस्वीर है और बाहर का वीडियो आप देख ही चुके होंगे। फ्लाइट का दरवाजा खुलते ही 134 लोगों की क्षमता वाले इस विमान में 640 अफगानी सवार हो गये। कोई भी इस विमान से उतरने के लिए तैयार नहीं था। विमान के अंदर मौजूद क्रू इन बेबस चेहरों को देख सन्न था और किसी तरह से प्लेन का दरवाजा बंद कर दिया गया, लेकिन सवाल ये था कि आगे क्या करना है? 134 लोगों की झमता वाले इस विमान को करीब साढ़े 600 से ज्यादा लोगों को साथ लेकर कैसे उड़ा जाए?

क्रू ने लिया जान बचाने का फैसला
डिफेंस वन की रिपोर्ट के मुताबिक, बेबस अफगानियों को देख क्रू ने एक ऐसा फैसला लिया, जो जानलेवा था, लेकिन मानवता का यही तकाजा था। डिफेंस वन को विमान के एक अधिकारी ने बताया कि क्रू ने फैसला किया कि वो किसी भी अफगान नागरिक को विमान से बाहर नहीं उतारेगा। वो सभी लोगों को एक साथ लेकर उड़ान भरेगा। ये फैसला काफी खतरनाक साबित हो सकता था, लेकिन क्रू ने तय कर लिया कि जो होगा, वो देखा जाएगा। लेकिन वो इन बेबस अफगानों को विमान से नहीं उतारेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू ने विमान पायलट को उड़ान भरने की इजाजत दे दी और विमान उड़ान भरने के लिए तैयार हो गया।
अपने फैसले पर क्रू ने क्या कहा ?
डिफेंस वन से बात करते हुए इस विमान के एक रक्षा अधिकारी ने कहा कि C-17 कॉल साइन रीच 871 का उपयोग करते हुए इतने बड़े भार को नहीं उठाता है और इतने लोगों को एक साथ ले जाना काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन घबराए हुए अफगानों ने खुद को C-17 के आधे-खुले रैंप पर खींच लिया। एक रक्षा अधिकारी ने डिफेंस वन को बताया कि उन शरणार्थियों को विमान से उतारने की कोशिश करने के बजाय, "चालक दल ने जाने का फैसला किया।" ये फैसला सुन विमान में सवार सभी अफगान शरणार्थियों के चेहरे पर मानो खुशी की लहर तैर गई। हर अफगान नागरिक क्रू को शुक्रिया कह रहा था।

अमेरिका में खबर से हड़कंप
रिपोर्ट के मुताबिक, विमान ने करीब साढ़े 600 अफगान नागरिकों और क्रू के साथ उड़ान भर दिया और जैसे ही इसकी खबर अमेरिका तक पहुंची की विमान में क्षमता से काफी ज्यादा नागरिकों को लेकर उड़ान भरा है तो हर किसी की सांसे फूल गई। क्योंकि, क्षमता से काफी ज्यादा यात्रियों को लेकर उड़ान भरने का मतलब किसी हादसे को न्योता देना था। एक रक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सही संख्या लगभग 640 लोगों की थी।

C-17 विमान ने बनाया रिकॉर्ड
रिपोर्ट के मुताबिक, 2013 में एक C-17 विमान ने फिलीपींस में एक तूफान के दौरान एक साथ 670 लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन किया था। उस वक्त भी सभी नागरिक विमान में फर्स पर बैठ गये थे और क्रू ने किसी भी बाहर नहीं निकाला था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया को "फ्लोर लोडिंग" के रूप में जाना जाता है। विमान के नियमों और उड़ान से संबंधित एक सूत्र के मुताबिर, यात्री अस्थायी सीटबेल्ट के रूप में दीवार से दीवार तक चलने वाले कार्गो पट्टियों पर लटके रहते हैं। आपको बता दें कि इस तस्वीर को डिफेंस वन नाम की वेबसाइट ने जारी किया है।












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