क्या ब्रिटेन की तरह पेंटागन कहेगा-सिंह इज किंग

105 सांसदों ने अमेरिका के रक्षा मंत्री चक हेगल को एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद से ही सिख अमेरिकी सेना का अभिन्न अंग हैं। इन सैनिकों की उपलब्धि और उनकी क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें उनके धर्म का पालन करने की आजादी दी जानी चाहिए। सांसदों ने चिट्ठी में यह भी लिखा है कि सिखों को सेना में शामिल करना चाहिए।
2009 में दो सिख सैनिकों ने पहली बार ब्रिटिश्ा आर्मी मार्च में हिस्सा लिया था
अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य डेमोक्रेटिक कॉकस के उपाध्यक्ष जोसेफ क्राउले और हाउस डिफेंस एप्रोप्रिएशंस सब कमेटी के अध्यक्ष रोडनी फ्रेलिंगहुईसेन की अगुवाई वाली अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सांसदों ने अमेरिकन आर्म्ड फोर्सेज यूनिफॉर्म एक्ट में बदलाव करने की मांग भी की है। यह मांग उन्होंने इसलिए की है ताकि अमेरिकन सिख सैनिक अपने धर्म का पालन करते हुए सेना में काम कर सकें और उसके प्रति अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें। क्राउली ने कहा है कि सिख सैनिकों को ब्रिटेन के साथ ही कनाडा में पगड़ी और दूसरी धार्मिक चीजों के साथ काम करने की मंजूरी मिल गई है। आपको बता दें कि भुल्लर से पहले भ्ाी वर्ष 2009 में दो सिख सैनिकों को पगड़ी के साथ ब्रिटिश्ा सेना में जगह मिली थी।
क्राउली ने तीन ऐसे सैनिकों का उदाहरण भी दिया जिन्हें हाल ही में सेना में भर्ती किया गया है। यह सैनिक न सिर्फ सलीके से पगड़ी पहनते हैं बल्कि सिक्योरिटी के लिए आवश्यक गैस मास्क और हेलमेट को भी तरजीह देते हैं।
उधर अमेरिका में सिख कोलिशन की ओर से इस मांग का स्वागत किया गया है और सांसदों की तारीफ की गई है। इस संगठन में कानून एवं नीति निदेशक राजदीप सिंह ने कहा है कि कांग्रेस की ओर से भेजी गई यह चिट्ठी अमेरिकी सेना में सिख अमेरिकियों के लिए समान मौके सुनिश्चित करने का संगठन की मुहिम की दिशा में एक बड़ा कदम है। राजदीप सिंह की मानें तो पूरी दुनिया में सिख सैनिक उन्हें मिले मौकों पर यह साबित करते आए हैं कि वे उत्कृष्ट जवान हैं। ऐसे में पेंटागन को भी यह बात समझने की कोशिश करनी होगी।












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