US Iran War: ईरान से भिड़ने में US का खजाना खाली, पेंटागन ने बताया जंग में कितना हुआ खर्चा?
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग में भले ही सीजफायर हो गया हो लेकिन इसने अमेरिका को करारा सबक सिखाया है। जिस जंग को ट्रंप हफ्तेभर का बता रहे थे वो दो महीने फुल स्केल पर चली और अब उसमें जब खर्चा देखा गया तो अमेरिकी सरकार के पैरों तले जमीन खिसक गई। हाल ही में हुई एक कांग्रेसी सुनवाई में पेंटागन अधिकारियों ने बताया कि इस युद्ध में अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। उनका मानना है कि युद्ध की असली लागत इस बताए गए आंकड़े से कहीं ज्यादा हो सकती है।
पेंटागन ने किन खर्चों को शामिल किया?
पेंटागन अधिकारियों ने साफ किया कि 25 अरब डॉलर (करीब 2.3 लाख करोड़ भारतीय रुपए) का यह अनुमान मुख्य रूप से युद्ध में इस्तेमाल हुए गोला-बारूद, हथियारों की कीमत, सैनिकों की तैनाती और सैन्य मिशन चलाने जैसे खर्चों पर हुआ है। वर्किंग कंट्रोलर जूल्स हर्स्ट ने कहा कि यह रकम हथियार खरीद और सैन्य अभियानों के खर्च के बारे में है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कुल अनुमानित खर्च कैसे तैयार किया गया। इसी वजह से लोगों को लग रहा है कि असल आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है।

कई बड़े खर्चों को छोड़ने का आरोप
एक्सपर्ट की मानें तो इस खर्चे में कई अहम खर्च शामिल ही नहीं किए गए। इनमें पश्चिम एशिया में बर्बाद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मरम्मत, युद्ध शुरू होने से पहले की सैन्य तैयारियों का खर्च, समुद्री नाकेबंदी बनाए रखने की लागत और अन्य ऑपरेशन्स का खर्च शामिल है। इसके अलावा लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें और लॉजिस्टिक्स खर्च भी कुल लागत को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं।
सिर्फ बेसिक खर्च ही 14 अरब डॉलर तक?
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आंशिक गणना भी देखें तो युद्ध का बोझ बहुत बड़ा है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ युद्ध सामग्री, खराब हुए सैन्य उपकरणों और बुनियादी संचालन पर ही लगभग 14 अरब डॉलर (करीब 1.3 लाख करोड़ भारतीय रुपए ) खर्च हो चुके होंगे। स्टिमसन सेंटर की एक्सपर्ट केली ग्रिको ने कहा कि 25 अरब डॉलर का आंकड़ा सिर्फ बारीक हिसाब-किताब है और यह युद्ध की असली लागत को पूरी तरह नहीं दिखाता।
सांसदों ने ट्रंप सरकार को घेरा
अमेरिकी सांसदों ने भी इस अनुमान की सटीकता पर सवाल उठाए हैं। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, सिर्फ युद्ध सामग्री का खर्च ही 25 अरब डॉलर (करीब 2.3 लाख करोड़ भारतीय रुपए) तक पहुंच सकता है। इसका मतलब है कि पेंटागन का कुल अंदाजा गड़बड़ हो सकता है। सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि इस युद्ध पर रोजाना लगभग 2 अरब डॉलर (करीब 19 हजार करोड़ रुपए) प्रति दिन खर्च हो सकते हैं, और उन्होंने इसे भी कम बताया।
रक्षा मंत्री ही नहीं दे पाए जवाब
कांग्रेसी सुनवाई के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से कई घंटे तक सवाल पूछे गए। इस बैठक में प्रशासन के प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट पर भी चर्चा हुई। सांसदों ने पूछा कि युद्ध की बढ़ती लागत सेना के संसाधनों को कैसे प्रभावित करेगी। लेकिन हेगसेथ ने युद्ध कितने समय चलेगा या कुल कितना खर्च होगा, इस पर कोई सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। इससे अनिश्चितता और बढ़ गई जिसे लेकर पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस भी हुई।
असली लागत अभी भी रहस्य
कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान युद्ध की असली लागत अभी भी साफ नहीं है। पेंटागन ने 25 अरब डॉलर का अनुमान दिया है, लेकिन कई विशेषज्ञ और सांसद मानते हैं कि असली रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। जैसे-जैसे संघर्ष आगे बढ़ेगा, इसकी आर्थिक और मानवीय दोनों कीमतों पर और ज्यादा जांच-पड़ताल होने की संभावना है। यही वजह है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा का बड़ा केंद्र बना रहेगा।
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