US Iran Peace Deal: होर्मुज खुलेगा, यूरेनियम जाएगा! अमेरिका-ईरान के बीच तैयार हुए MOU के 5 सबसे बड़े राज
US Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनावपूर्ण बातचीत अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक बड़ी डील लगभग तैयार है, जिसमें 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने और ईरान को तेल बेचने में राहत देने जैसे बड़े फैसले शामिल हो सकते हैं।
इसके साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी नई बातचीत शुरू होगी। अमेरिकी मीडिया का दावा है कि दोनों देश जल्द ही एक MOU यानी समझौता ज्ञापन पर साइन कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार और मिडिल ईस्ट की राजनीति पर दिख सकता है।

होर्मुज खुलेगा, ईरान को मिलेगी राहत
ड्राफ्ट डील के मुताबिक ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगाए गए माइंस हटाने को तैयार हो सकता है ताकि जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके। यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी कुछ पाबंदियां कम करेगा और तेल निर्यात में राहत देगा। अगर समझौता लागू होता है तो ईरान फिर से खुलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेच सकेगा, जिससे तेल कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
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परमाणु कार्यक्रम पर क्या बनी बात?
परमाणु मुद्दे पर अभी पूरी सहमति नहीं बनी है, लेकिन बातचीत आगे बढ़ती दिख रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने भरोसा दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम को सीमित करने और ज्यादा संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर भी चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि ईरान के पास करीब 440 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। हालांकि तेहरान ने साफ किया है कि वह अपना यूरेनियम सीधे अमेरिका को नहीं सौंपेगा।
अमेरिका की शर्तें और सेना की मौजूदगी
अमेरिका का कहना है कि ईरान को स्थायी राहत तभी मिलेगी जब वह अपने वादों को पूरी तरह लागू करेगा। फिलहाल प्रस्तावित 60 दिन की अवधि में अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में तैनात रहेगी। अगर अंतिम समझौता सफल रहता है तभी सैनिकों की वापसी पर फैसला लिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक प्रतिबंध हटाने और ईरानी फंड अनफ्रीज करने जैसे बड़े कदम धीरे-धीरे उठाए जाएंगे। यानी वॉशिंगटन इस डील में पहले भरोसा और फिर राहत की नीति अपनाना चाहता है।
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कई मुस्लिम देशों ने निभाई बड़ी भूमिका
इस समझौते के पीछे कई मुस्लिम देशों की अहम भूमिका बताई जा रही है। Donald Trump ने हाल ही में अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल पर इस मुद्दे पर चर्चा की थी। इसमें यूएई, सऊदी अरब, कतर, मिस्र, तुर्किए और पाकिस्तान जैसे देशों ने हिस्सा लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी हाल में तेहरान गए थे। इन देशों की मध्यस्थता के बाद ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत तेज हुई है और जल्द बड़े ऐलान की उम्मीद जताई जा रही है।












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