Iran War: चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमला! भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट के बगल में गिरी मिसाइल, जानबूझकर किया?

Chabahar Port Attack: अमेरिकी सेना ने ईरान का युद्ध अब भारत पर सीधा असर पहुंचाता दिख रहा है। ईरान में कई जगहों पर हमले करने के साथ-साथ अब यहां के चाबहार बंदरगाह पर भी हवाई हमले किए हैं। मंगलवार देर रात हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में उथल-पुथल मच गई है। बता दें कि इस चाबहार बंदरगाह पर भारत का काफी बड़ा इन्वेस्टमेंट है और यहां पर भारत का ड्रीम प्रोजेक्ट 'शहीद बेहेश्ती टर्मिनल' भी चल रहा है। गौर करने वाली बात है कि, पिछले अप्रैल के सीजफायर के बाद यह पहला बड़ा अमेरिकी हमला है, जिसने मिडिल ईस्ट के समीकरण हिला दिए हैं। अब अमेरिका-ईरान का यह तनाव सीधे भारत के रणनीतिक हितों के दायरे में आ चुका है।

फैल गया युद्ध का दायरा

नुकसान ओमान की खाड़ी में बने चाबहार और आसपास के इलाकों में हुआ है। अभी तक हाथ लगी जानकारी के मुताबिक इस कदम से नया मोर्चा खुल गया है। अब सैन्य टकराव होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकलकर हिंद महासागर के मुहाने तक आ पहुंचा है। ईरान के साथ-साथ इस इलाके में बड़ा निवेश करने वाले भारत के लिए भी यह सीधी चिंता की बात है।

Chabahar Port Attack

भारत के लिए क्यों जरूरी है ये पोर्ट?

यह बंदरगाह भारत के लिए क्यों जरूरी है ये जानने के लिए इसके रूट को समझना आवश्यक है। ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत का यह पोर्ट भारत को पाकिस्तान का इस्तेमाल किए बिना सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है। भारत ने इसके शहीद बेहेश्ती टर्मिनल को विकसित करने में बड़ा पैसा लगाया है। यूरेशियाई बाजारों तक पहुंचने का यह भारत का मुख्य व्यापारिक जरिया है।

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कहां-कहां हुए हमले, क्या जानकारी आई अब तक?

स्थानीय स्तर पर रात को क्या हुआ, इसकी कुछ जानकारियां आई हैं। मंगलवार आधी रात के बाद चाबहार और पास के कोनारक इलाके में सिलसिलेवार धमाके सुने गए। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमलों के तुरंत बाद शहर के बड़े हिस्से की बिजली कट गई। सोशल मीडिया पर आए फुटेज में चाबहार स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसैनिक अड्डे पर आग लगी दिख रही है। अमेरिकी मिसाइलो ने सीधे इसी बेस को निशाना बनाया।

जानबूझकर किया भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट के पास हमला?

हमले की सटीकता देखते हुए ऐसा बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि अमेरिका ने गलती से ये हमला किया है। साथ ही इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका को इस बात की जानकारी नहीं है कि वहां भारत का हेवी इन्वेस्टमेंट हैं और ड्रीम प्रोजेक्ट का काम भी जारी है। दूसरी तरफ एक थ्योरी ये भी है कि अमेरिका और इजरायल इस युद्ध में कई ऐसे हमले कर चुके हैं जिन्हें या तो एक-दूसरे पर थोपा या फिर उसकी जिम्मेदारी नहीं ली गई। सही जानकारी के लिए अमेरिका के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

10 साल के व्यापार की हुई थी डील

हमले के बाद पूरे चाबहार शहर में इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है। बुनियादी ढांचे को जो नुकसान हुआ है, उसकी मरम्मत की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, लगातार बने सुरक्षा खतरों के कारण काम बार-बार रुक रहा है। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ जब भारत और ईरान इसके लॉन्ग टर्म ऑपरेशन को लेकर बातचीत आगे बढ़ा रहे थे। हाल ही में दोनों देशों ने इसके विकास के लिए 10 साल के समझौते पर हसताक्षर किए थे, जिस पर अमेरिका ने पहले ही प्रतिबंधों की चेतावनी दे रखी थी।

क्या कर रही भारत सरकार?

अब भारत के सामने प्रतिबंधों का सीधा खतरा है। पहले चाबहार के लिए भारत को अमेरिकी पाबंदियों से जो विशेष छूट मिली हुई थी, उसकी मियाद खत्म हो चुकी है। नई दिल्ली अब वाशिंगटन के साथ बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश में है। भारत का रुख यही रहा है कि चाबहार सिर्फ एक कमर्शियल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह कनेक्टिविटी की लाइफलाइन है।

इस हमले ने बढ़ाई दुनिया की घबराहट

इस टकराव से कमर्शियल शिपिंग रूट पर भी खतरा बढ़ गया है। टकराव के हिंद महासागर के तट तक आने से ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री में डर है। चाबहार की लोकेशन ऐसी है कि यहा किसी भी तरह की सैन्य हलचल का असर भारत के समुद्री व्यापार और तेल-गैस की सप्लाई चेन पर पड़ना तय है।

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ईरान या अमेरिका, किसी एक को चुनना मुश्किल

साफ तौर पर यह नई दिल्ली के लिए एक कूटनीतिक इम्तिहान है। एक तरफ अमेरिका भारत का सबसे अहम ग्लोबल पार्टनर है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ भारत के पुराने कारोबारी रिश्ते हैं। फिलहाल विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पल-पल बदल रहे जमीनी हालात का आकलन कर रहा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें, कमेंट में बताएं।

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