औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार! सेंसेक्स 1,677 अंक और निफ्टी 516 अंक टूटा, किन शेयरों पर पड़ी सबसे ज्यादा मार?
Why Market is Down: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने के बाद गुरुवार सुबह बाजार ने राहत की सांस ली और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स व निफ्टी दोनों हरे निशान में लौट आए। हालांकि निवेशकों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, वैश्विक तनाव, पहली तिमाही के कमजोर नतीजों की आशंका और महंगाई बढ़ने का डर बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं।
ऐसे माहौल में निवेशक हर नई खबर पर नजर रखे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। गुरुवार सुबह करीब 9:51 बजे तक निफ्टी 50 164.30 अंक यानी 0.69% की बढ़त के साथ 24,046.35 पर कारोबार कर रहा था।

निफ्टी ने 23,928.95 के स्तर पर शुरुआत की और पूरे शुरुआती कारोबार में मजबूती बनाए रखी। वहीं बीएसई सेंसेक्स भी करीब 9:33 बजे तक 493.38 अंक यानी 0.64% चढ़कर 76,996.98 पर पहुंच गया। कुछ देर बाद सेंसेक्स की बढ़त 495.86 अंकों तक पहुंची और यह 76,998.54 पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 148.70 अंक बढ़कर 24,025 के स्तर पर पहुंच गया।
बुधवार को आखिर क्यों टूटा था बाजार?
बुधवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी मुश्किल रहा। सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15% टूटकर 76,503.60 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,921.69 अंक तक लुढ़ककर 76,259.03 के स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह निफ्टी भी 516.65 अंक यानी 2.12% गिरकर 23,882.05 पर बंद हुआ। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव InterGlobe Aviation, Maruti, Hindustan Unilever, Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank और Mahindra & Mahindra जैसे शेयरों में देखने को मिला।
इस बार गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ा तनाव रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष कम करने के लिए किया गया अंतरिम समझौता अब खत्म हो चुका है। इसके बाद पश्चिम एशिया में हालात फिर से बिगड़ने की आशंका बढ़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर सैन्य कार्रवाई की ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा बनी रहे। हालांकि बाद में ट्रम्प ने यह भी कहा कि उन्हें फिलहाल बड़े युद्ध की उम्मीद नहीं है। इसके बावजूद निवेशकों ने जोखिम लेने से दूरी बनाई।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 0.8% बढ़कर 78.65 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया और सप्ताह भर में इसमें करीब 9% की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार भी चली गई, जो 22 जून के बाद पहली बार हुआ। बुधवार को भी ब्रेंट क्रूड में 6.18% की बड़ी छलांग देखने को मिली थी और यह 78.74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने का संकेत माना जाता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में तेजी आते ही शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया।
तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। अब बाजार को डर है कि अगर महंगाई दोबारा तेज हुई तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द राहत नहीं देंगे। इसी वजह से निवेशकों ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी कम कर दी हैं। इसके अलावा कंपनियों के अप्रैल-जून तिमाही नतीजों को लेकर भी बाजार में सावधानी का माहौल है। ट्रेडर्स का मानना है कि कमजोर नतीजों की आशंका के कारण भी निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
गुरुवार को एशियाई बाजारों में शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों ने तेजी को सीमित रखा। सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे कुछ बाजारों को सहारा मिला। हालांकि ऑस्ट्रेलिया का शेयर बाजार दबाव में दिखा। वहां के S&P/ASX 200 इंडेक्स के फ्यूचर्स करीब 0.6% नीचे रहे, जिससे बाजार लगभग 79 अंक की कमजोरी के साथ खुलने के संकेत मिले। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स करीब 0.7% गिर चुका है। वहीं न्यूजीलैंड का S&P/NZX 50 लगभग सपाट कारोबार करता दिखा।
बुधवार को दुनिया के दूसरे बाजारों का हाल
भारतीय बाजार की तरह कई एशियाई बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.35% टूट गया, जबकि जापान का निक्केई 225 2.11% नीचे बंद हुआ। चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट 0.49% फिसला। दूसरी ओर हांगकांग हैंग सेंग 2.99% की मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी रही, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार को भारतीय शेयरों में भरोसा दिखाया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 393.19 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
हालांकि इससे पहले मंगलवार को आखिरी घंटे की बिकवाली के कारण सेंसेक्स 104.35 अंक टूटकर 78,180.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 31.65 अंक की गिरावट के साथ 24,398.70 पर बंद हुआ था। इसके बाद बुधवार की बड़ी गिरावट और गुरुवार की शुरुआती रिकवरी ने यह साफ कर दिया कि फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर रहने वाली है।












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