Uttarakhand Weater: उत्तराखंड में बारिश ने धरा रौद्र रूप, लैंडस्लाइड से 38 सड़कें बंद, टिहरी में ढहा मकान
Uttarakhand weather: उत्तराखंड में मानसून के आते ही पहाड़ी इलाकों में संकट बढ़ने लगा है। लगातार हो रही भारी बारिश और जगह-जगह भूस्खलन के कारण राज्य की बुनियादी व्यवस्था प्रभावित हुई है। पहाड़ों से गिर रहे मलबे के चलते प्रदेशभर में 38 प्रमुख और ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी मौसम के तेवर तल्ख रहने की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड के टिहरी में नेशनल हाईवे 707A पर कड्डूखाल में भयंकर भूस्खलन हुआ। दुकानों और घरों के पास हुए भूस्खलन में एक पुराना घर ताश के पत्तों की तरह सेकेंडों में भरभराकर ढह गया है। हालांकि भूस्खलन के खतरे को भापते हुए पहले ही इस एरिया के होटल, रेस्तरां और सड़क किनारों पर बने खोखे और झोपड़ियों को खाली करवा लिया गया था।

कैसे हुआ भूस्खलन?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस एरिया में एक प्राइवेट होटल बनाने के लिए खुदाई की जा रही थी। बारिश में मौसम में खुदाई के काम के कारण ये भूस्खलन हुआ। हालांकि इसमें किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है।
हर दिन जलाशयों की जानकारी साझा करनी होगी
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग ने सभी बड़े बांधों और बैराजों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। अब उन्हें रोज़ सुबह 8 बजे और रात 8 बजे जलाशयों की जानकारी साझा करनी होगी। इसमें जल स्तर, इनफ्लो, आउटफ्लो और डिस्चार्ज का पूरा विवरण शामिल रहेगा। यह जानकारी अनिवार्य रूप से उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को भेजी जाएगी।
पिथौरागढ़ में भूस्खलन के कारण 13 सड़के बंद
इसके आलवा भूस्खलन ने सबसे ज्यादा असर पिथौरागढ़ और देहरादून जिलों में डाला है। पिथौरागढ़ जिले में सबसे ज्यादा 13 सड़कें बंद हैं, जिससे सीमांत क्षेत्रों का संपर्क कट गया है। वहीं, राजधानी देहरादून में 7 और चमोली में 6 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बाधित हो चुकी हैं। इसके अलावा बागेश्वर और टिहरी में 5-5 मार्ग बंद हैं, जबकि रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भी एक-एक मुख्य सड़क पर आवाजाही ठप है। ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले रास्ते सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
राज्य प्रशासन के अनुसार 2 राज्य राजमार्ग, 1 प्रमुख जिला मार्ग, 3 लोक निर्माण विभाग की सड़कें और सर्वाधिक 32 ग्रामीण सड़कें हैं जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत आती हैं। हालांकि, चंपावत, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, उत्तरकाशी और ऊधम सिंह नगर की मुख्य सड़कें फिलहाल यातायात के लिए पूरी तरह सुचारू हैं।
बागेश्वर में रिकॉर्ड बारिश से मचा हाहाकार
उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में असामान्य रूप से भारी बारिश दर्ज की गई है। राज्य में औसतन 16 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो इस सीजन की सामान्य बारिश यानी 14.2 मिलीमीटर से लगभग 13 प्रतिशत अधिक है। लेकिन असली चिंता पहाड़ी जिलों में दर्ज की गई रिकॉर्ड तोड़ बारिश को लेकर है, जहां सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और कई नदी नाले उफान पर आ चुके हैं।
24 घंटों के दौरान 73.4 मिलीमीटर वर्षा हुई
पहाड़ी जिले बागेश्वर में पिछले 24 घंटों के दौरान 73.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य वर्षा से 905 प्रतिशत अधिक है। उत्तरकाशी जिले में भी जमकर पानी बरसा और वहां 43.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। वहीं पिथौरागढ़ में 16.4 मिलीमीटर, अल्मोड़ा में 13.8 मिलीमीटर और चमोली में 10.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है। इन पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों के जलस्तर को बढ़ा दिया है, जिससे संवेदनशील घाटियों में खतरा मंडराने लगा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार देहरादून, टिहरी, चंपावत और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। नैनीताल जिले में सामान्य से 99 प्रतिशत कम महज 0.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि पौड़ी गढ़वाल में भी सामान्य की तुलना में 92 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
जारी की गई एडवाइजरी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। विभाग ने बागेश्वर जिले के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की हिदायत दी गई है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्तर बेहद कम समय में खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। भूस्खलन की गंभीर घटनाओं को देखते हुए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे केवल सुरक्षित स्थिति में ही अपनी यात्रा शुरू करें।
इन जिलों में भारी बारिश की आशंका
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, केवल बागेश्वर ही नहीं, बल्कि रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में भी स्थानीय स्तर पर भारी बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने इन सभी संवेदनशील जिलों में अपनी आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाओं के चलने की चेतावनी भी विशेष रूप से दर्ज की गई है। उत्तराखंड के मैदानी जिलों, खासकर हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।













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