ट्रंप की व्यापार नीति से टेक्नोलॉजी सेक्टर पर मंडराया संकट! क्या स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारें होंगी को महंगी
Trump Trade Policy: आज की दुनिया में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक कारें और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी चीज़ों को बनाने के लिए कुछ खास धातुओं की जरूरत होती है, जिन्हें "दुर्लभ पृथ्वी तत्व" (Rare Earth Elements) कहा जाता है? अब सोचिए, अगर इन तत्वों की आपूर्ति में कोई दिक्कत आ जाए, तो टेक्नोलॉजी सेक्टर पर कितना बड़ा असर पड़ेगा!
दुर्लभ पृथ्वी तत्व वास्तव में दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन उन्हें खनन करके इस्तेमाल करने लायक बनाना बहुत मुश्किल और महंगा होता है। दुनिया में इनका सबसे बड़ा शोधन (refining) चीन में होता है, जो 90% से ज्यादा सप्लाई पर नियंत्रण रखता है। अमेरिका अपनी ज़रूरत का 80% से ज्यादा हिस्सा चीन से ही आयात करता है।

डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने चीन पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध (tariffs) लगाए, जिससे अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया। जवाब में, चीन ने भी अमेरिका पर नए शुल्क और निर्यात नियंत्रण लागू कर दिए। इससे टेक्नोलॉजी सेक्टर की मुश्किलें बढ़ गईं, क्योंकि इन दुर्लभ तत्वों के बिना मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक कारें और कई अन्य हाई-टेक प्रोडक्ट्स बनाना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिका को क्यों हो रही है चिंता?
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, 2021 से 2030 के बीच इनकी मांग 72% बढ़ सकती है, लेकिन आपूर्ति इस दर से नहीं बढ़ेगी। इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले समय में इन तत्वों की भारी कमी हो सकती है।
ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड और यूक्रेन जैसे देशों से दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति पर बातचीत शुरू की थी। ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने के कारण वहां छिपे संसाधन अब ज्यादा सुलभ हो रहे हैं। अमेरिका भी खुद इन तत्वों का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी वह दुनिया में सिर्फ 12% ही उत्पादन कर पाता है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?
अगर चीन ने इन तत्वों की सप्लाई को सीमित कर दिया, तो अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों को नए समाधान खोजने होंगे। Apple जैसी कंपनियां पहले से ही अपने प्रोडक्ट्स में रिसाइकिल की गई सामग्रियों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, ताकि वे नई दुर्लभ धातुओं पर कम निर्भर रहें।
हालांकि, यह समस्या सिर्फ अमेरिका की नहीं है। पूरी दुनिया में टेक्नोलॉजी सेक्टर इन तत्वों पर निर्भर है। अगर सप्लाई प्रभावित हुई, तो स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक कारें और पवन टरबाइन जैसी चीजें महंगी हो सकती हैं।
दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की सप्लाई पर चीन का नियंत्रण अमेरिका और अन्य देशों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ट्रम्प प्रशासन के व्यापार नीतियों के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है। आने वाले वर्षों में, अगर नए स्रोत नहीं खोजे गए, तो टेक्नोलॉजी सेक्टर को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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