Trump China Visit 2026: चीन से रिश्ते सुधारने की कोशिश? Apple, Tesla CEO के साथ बीजिंग पहुंचे ट्रंप
Trump China visit 2026: अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार, 12 मई को चीन दौरे पर रवाना हो गए। इस यात्रा को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि ट्रंप इस दौरे पर अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों यानी CEOs को भी साथ लेकर गए हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल में Tesla के एलन मस्क, Apple के टिम कुक, BlackRock के लैरी फिंक और Boeing के केली ऑर्टबर्ग जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका चीन के साथ कारोबारी रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करना चाहता है।
US-China Trade Relations: ट्रेड सबसे बड़ा मुद्दा होगा - ट्रंप
चीन रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा व्यापारिक संबंध होंगे। ट्रंप ने कहा-हम राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करेंगे, लेकिन सबसे ज्यादा फोकस व्यापार पर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे रहे हैं। वह मेरे दोस्त रहे हैं। हम दोनों के बीच अच्छी समझ है। यह बेहद रोमांचक यात्रा होने जा रही है और इससे कई अच्छे परिणाम निकलेंगे।
टैरिफ युद्ध के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिससे वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और एआई सेक्टर को लेकर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज रही है। अब ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही ऊर्जा संकट, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव का सामना कर रही है। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच बातचीत को दुनिया भर के निवेशक और बाजार बेहद ध्यान से देख रहे हैं।
ट्रंप के साथ कौन-कौन से CEO पहुंचे चीन?
व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार ट्रंप के साथ कई बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रमुख अधिकारी बीजिंग पहुंचे हैं। इस लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम हैं-
- एलन मस्क (Tesla)
- टिम कुक (Apple)
- लैरी फिंक (BlackRock)
- केली ऑर्टबर्ग (Boeing)
- स्टीफन श्वार्जमैन (Blackstone)
- ब्रायन साइक्स (Cargill)
- जेन फ्रेजर (Citigroup)
- चक रॉबिंस (Cisco)
- डेविड सोलोमन (Goldman Sachs)
- माइकल मिएबैक (Mastercard)
- क्रिस्टियानो एमोन (Qualcomm)
- रयान मैकइनरनी (Visa)
इसके अलावा Meta, GE Aerospace, Illumina और अन्य टेक एवं फाइनेंस कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।
चीन क्यों है अमेरिकी कंपनियों के लिए अहम?
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों की इतनी बड़ी मौजूदगी यह दिखाती है कि चीन अब भी दुनिया के सबसे बड़े और आकर्षक बाजारों में से एक बना हुआ है। Apple, Tesla, Qualcomm और Boeing जैसी कंपनियों का कारोबार चीन पर काफी हद तक निर्भर है। Apple की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग चीन में होती है। Tesla का सबसे बड़ा विदेशी प्लांट शंघाई में है और Boeing चीन को विमान बेचने के लिए बड़ा बाजार मानता है। अमेरिकी फाइनेंस कंपनियां चीन के निवेश बाजार में विस्तार चाहती हैं। इसी वजह से अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत चाहता है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो और व्यापारिक माहौल बेहतर बने।
क्या ईरान मुद्दे पर भी होगी चर्चा?
हाल के दिनों में ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। माना जा रहा था कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच इस मुद्दे पर भी बातचीत हो सकती है। हालांकि ट्रंप ने इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा-हमारे पास कई मुद्दे हैं जिन पर चर्चा करनी है। ईरान उनमें प्रमुख नहीं है, क्योंकि ईरान की स्थिति हमारे नियंत्रण में है।
दुनिया की नजर इस मुलाकात पर
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया आर्थिक और रणनीतिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार होता है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है और सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा हो सकता है।
क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?
हालांकि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब भी जारी है, लेकिन ट्रंप की यह यात्रा संकेत देती है कि दोनों देश टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहते हैं। विशेष रूप से व्यापार और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद मानी जा रही है। अब दुनिया की नजर बीजिंग में होने वाली ट्रंप-शी जिनपिंग बैठक पर टिकी है, जहां से आने वाले फैसले वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।














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