Trump Greenland plan: अब ग्रीनलैंड पर कब्जे की तैयारी में अमेरिका! ट्रंप का गुप्त प्लान लीक, टेंशन में दुनिया

Donald Trump Greenland plan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर 'सीक्रेट प्लान' अब दुनिया के सामने आ गया है। डेनमार्क और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड के दक्षिणी हिस्से में तीन नए सैन्य अड्डे बनाने को लेकर हाई-लेवल बातचीत चल रही है। ट्रंप ने पहले इसे खरीदने की इच्छा जताई थी और कब्जा करने तक की धमकी दी थी, जिससे नाटो देशों में तनाव बढ़ गया था।

अब अमेरिका सैन्य अड्डों के बहाने इस रणनीतिक द्वीप पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती दखलंदाजी को रोकना है।

Donald Trump Greenland plan

सैन्य अड्डों के बहाने कब्जे की तैयारी?

अमेरिकी सरकार ग्रीनलैंड के दक्षिणी हिस्से में तीन नए बेस बनाने का प्रस्ताव दे चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन अड्डों पर यह लिखा जा सकता है कि यह अमेरिका का संप्रभु इलाका है। यह एक तरह से बिना युद्ध किए ग्रीनलैंड के एक हिस्से पर सीधा नियंत्रण पाने जैसा है। ट्रंप का मानना है कि चीन और रूस को आर्कटिक क्षेत्र से दूर रखने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड का मालिकाना हक लेना ही होगा, चाहे इसके लिए कोई भी तरीका अपनाना पड़े।

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रूस और चीन पर कड़ी नजर

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से उत्तरी अटलांटिक महासागर, आइसलैंड और ब्रिटेन तक के समुद्री रास्तों पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिका इन अड्डों का इस्तेमाल रूस और चीन की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए करना चाहता है। व्हाइट हाउस का मानना है कि अगर आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका मजबूत नहीं हुआ, तो भविष्य में सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती पैदा हो सकती है। इसलिए इन अड्डों को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तैनात होगा 'गोल्डन डोम' सिस्टम

अमेरिका ग्रीनलैंड में अपने आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'गोल्डन डोम' को तैनात करने की योजना बना रहा है। इसका मकसद रूस या चीन की तरफ से होने वाले किसी भी मिसाइल हमले को हवा में ही नष्ट करना है। इनमें से एक बेस 'नारसरसुआक' (Narsarsuaq) में बन सकता है, जहां पहले भी अमेरिकी सेना का बेस रह चुका है। अमेरिका इस पूरे द्वीप को एक सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है ताकि उसकी मुख्य भूमि पूरी तरह सुरक्षित रहे।

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डेनमार्क के साथ जारी है गुप्त वार्ता

भले ही ट्रंप की धमकियों से डेनमार्क पहले नाराज था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ रही है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि बातचीत सही दिशा में है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने भी सीक्रेट बातचीत की बात मानी है लेकिन सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया है। अमेरिका की कोशिश है कि वह अपने सहयोगियों को नाराज किए बिना अपना काम निकाल ले।

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