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Bangladesh Election: ढाका में संवैधानिक संकट, चीफ जस्टिस बनवाएंगे सरकार? 12 साल के बच्चे का क्या प्रावधान?

Tarique Rahman Oath: 13 फरवरी की सुबह बांग्लादेश के लिए नया सवेरा लेकर आई जब BNP ने प्रचंड बहुमत से चुनाव जीत लिया। लेकिन देश में सत्ता हस्तांतरण को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के विद्रोह के कारण फिलहाल देश में कोई कार्यवाहक संसद या अध्यक्ष मौजूद नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री, मंत्री और सांसदों को शपथ आखिर कौन दिलाएगा। यह स्थिति संवैधानिक चुनौतियां पैदा कर रही है और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

क्या है संवैधानिक संकट?

दरअसल शेख हसीना की सत्ता जाते ही बांग्लादेश की संसद और इसके सभी पदों को पूरी तरह से भंग कर दिया गया था। जिसमें राष्ट्रपति के पद को भी खत्म कर दिया गया था। इसके बाद आर्मी ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी और यूनुस की वापसी तक ऐसा ही रहा। वहीं जब यूनुस ढाका पहुंचे तो चीफ जस्टिस ने उन्हें शपथ दिलाई। चूंकि चुनाव नहीं हुए थे इसलिए राष्ट्रपति भी नहीं मिल सका। यही बांग्लादेश का असल संवैधानिक संकट है कि वर्तमान में यहां कोई राष्ट्रपति नहीं है जो शपथ दिला सके।

संविधान का अनुच्छेद 148: दो बड़े विकल्प

बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नई सरकार के गठन के लिए शपथ ग्रहण की प्रक्रिया तय की गई है। इसमें दो मुख्य विकल्प दिए गए हैं। पहला विकल्प यह है कि राष्ट्रपति किसी विशेष व्यक्ति को शपथ दिलाने के लिए नामित कर सकते हैं। कानूनी सलाहकार आसिफ नज़रुल का सुझाव है कि राष्ट्रपति की गैर मौजूदगी में मुख्य न्यायाधीश को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है ताकि सत्ता का हस्तांतरण जल्दी और सुचारु रूप से हो सके। ऐसे में बांग्लादेश के चीफ जस्टिस जुबैर रहमान चौधरी, तारिक रहमान को शपथ दिलवा सकते हैं।

Tarique Rahman Oath

दूसरा विकल्प: मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका

दूसरा महत्वपूर्ण विकल्प मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) से जुड़ा है। यदि राष्ट्रपति द्वारा नामित व्यक्ति आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के तीन दिनों के भीतर शपथ नहीं दिलाता है, तो संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त अगले तीन दिनों के भीतर यह कर्तव्य निभाने के लिए बाध्य होंगे। इस प्रावधान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रक्रिया समयबद्ध रहे और सत्ता हस्तांतरण में अनावश्यक देरी न हो। तो फिर, ऐसे में बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त ए. एम. एम. नासिर उद्दीन इस कार्रवाई को अंजाम देंगे।

चुनाव परिणाम और शपथ की समय सीमा

अनौपचारिक चुनाव परिणामों के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बहुमत हासिल किया है। चुनाव नियमों के मुताबिक, सभी नवनिर्वाचित सांसदों को आधिकारिक राजपत्र में परिणाम प्रकाशित होने के तीन दिनों के भीतर शपथ लेना अनिवार्य है। यह समय सीमा इसलिए तय की गई है ताकि सरकार गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।

अनुच्छेद 56 के तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति

जब सांसद शपथ ले लेंगे, तब राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 56 के तहत बहुमत दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाएगा। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के शपथ लेते ही सत्ता का औपचारिक हस्तांतरण तुरंत प्रभाव से हो जाएगा और नई लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो जाएगा।

शपथ अधिनियम, 1873 क्या है?

शपथ ग्रहण की पूरी प्रक्रिया "शपथ अधिनियम, 1873" के तहत नियंत्रित होती है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य न्यायिक शपथों, प्रतिज्ञाओं और घोषणाओं से जुड़े नियमों को एक जगह समेकित करना था और पुराने कानूनों को समाप्त करना था। यह अधिनियम पूरे बांग्लादेश में लागू होता है और न्यायिक कार्यवाही में शपथ के महत्व को लागू करता है।

किन मामलों पर लागू नहीं होता अधिनियम

इस अधिनियम के प्रारंभिक प्रावधानों के अनुसार, कोर्ट मार्शल से पहले की कार्यवाही या बल प्रयोग से जुड़े विशेष कानूनों के तहत निर्धारित शपथ इसमें शामिल नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून का दायरा किन मामलों तक सीमित है।

कौन दिला सकता है शपथ?

शपथ दिलाने का अधिकार उन सभी अदालतों और व्यक्तियों को है जिन्हें कानून के तहत साक्ष्य लेने की अनुमति है। इसके अलावा, लोकतंत्र की सेवा में किसी सैन्य, नौसेना या वायु सेना स्टेशन के कमांडिंग अधिकारी भी अपनी सीमा के भीतर शपथ दिला सकते हैं, बशर्ते वह शपथ शांति न्यायाधीश द्वारा दिलाई जा सकने वाली शपथ के अनुरूप हो।

12 साल से कम उम्र के गवाह का नियम

अधिनियम के अनुसार, सभी गवाह, दुभाषिए (Translator) और जूरी सदस्य को शपथ लेनी होती है। हालांकि, अगर कोई गवाह 12 वर्ष से कम उम्र का बच्चा है और अदालत मानती है कि वह सच बोलने का महत्व समझता है लेकिन शपथ की प्रकृति को नहीं समझता, तो उसकी गवाही भी मान्य मानी जाएगी।

आरोपियों को शपथ नहीं

यह कानून आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्ति को शपथ दिलाने की अनुमति नहीं देता। इसके अलावा, यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया (Translator) पहले से अपने पद की शपथ ले चुका है, तो उसे हर बार दोबारा शपथ लेने की जरूरत नहीं होती।

धार्मिक आपत्ति पर 'दृढ़ संकल्प' का विकल्प

यदि कोई व्यक्ति धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से शपथ लेने में आपत्ति करता है, तो वह शपथ के बजाय 'दृढ़ संकल्प' (affirmation) ले सकता है। यह प्रावधान हिंदू, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म के लोगों के लिए समान रूप से लागू है।

शपथ का स्ट्रक्चर कौन तय करता है?

शपथ और दृढ़ संकल्प का स्ट्रक्चर समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित किया जाता है। जब तक कोई नया स्वरूप तय नहीं होता, तब तक वर्तमान में प्रचलित स्वरूप का ही उपयोग किया जाएगा।

विशेष शपथ की अनुमति

यदि कोई गवाह या पक्ष अपनी जाति या समुदाय की परंपरा के अनुसार विशेष शपथ लेना चाहता है, और वह न्याय या शालीनता के खिलाफ नहीं है, तो न्यायालय उसे स्वीकार कर सकता है। यदि जरूरत हो तो अदालत किसी व्यक्ति को आयोग के रूप में नियुक्त कर सकती है, जो अदालत के बाहर शपथ दिलाकर साक्ष्य दर्ज करे और उसे अदालत में जमा करे।

शपथ से इनकार करने पर क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री, मंत्री या सांसद की शपथ लेने से इनकार करता है, तो उसे मजबूर नहीं किया जाएगा। लेकिन अदालत यह दर्ज करेगी कि उसे शपथ का प्रस्ताव दिया गया था और उसने उसे अस्वीकार कर दिया।

छोटी तकनीकी गलती से कार्यवाही अमान्य नहीं

यदि शपथ दिलाने में कोई तकनीकी चूक हो जाए, या एक शपथ की जगह दूसरी शपथ का उपयोग हो जाए, तो इससे पूरी कार्यवाही अमान्य नहीं होगी। गवाह फिर भी सत्य बोलने के लिए बाध्य रहेगा।

कुल मिलाकर स्थिति क्या है?

बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता जरूर है, लेकिन संविधान और शपथ अधिनियम, 1873 में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। अगर तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होती है, तो सत्ता का हस्तांतरण सुचारु रूप से हो सकता है और देश में नई लोकतांत्रिक सरकार का गठन संभव होगा।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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