जनमत संग्रह में ताइवान ने समलैंगिक विवाह को खरिज किया
ताइपे। ताइवान के हाईकोर्ट ने 2017 में एक फैसला सुनाया, जो समलैंगिक विवाह के पक्ष में था। अदालत के फैसले के बाद देश में जोरदार बहस छिड़ गई और इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया गया। जनमत संग्रह में ताइवान की जनता ने समलैंगिक विवाह को खारिज कर दिया है। ताइवान में हुए जनमत संग्रह के परिणाम आने के बाद एम्नेसटी इंटरनेशल ने ट्वीट कर कहा, 'ताइवान जनमत संग्रह में लोगों ने शादी के लिए सभी को बराबर अधिकार देने के खिलाफ वोट किया है, यह बड़ा झटका है, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि सभी के लिए प्यार और समानता के भाव की आखिरकार रक्षा की जाएगी।'

मार्च 2017 में हाईकोर्ट संसद को कानून में संशोधन करने या नया कानून पास करने के लिए दो साल का समय दिया था। अब जनमत संग्रह के नतीजे एकदम उलट आए हैं। ऐसे में नया सवाल यह खड़ा हो गया है कि सरकार अब करे तो क्या करे? देखना होगा कि सरकार शनिवार को हुए जनमत संग्रह में सामने आई जनता का राय के साथ जाती है या हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, समलैंगिक विवाह के पक्ष में कानूनी जमीन तैयार करती है।
हालांकि, ताइवान सरकार ने पहले कहा था कि शनिवार को हुए जनमत संग्रह में जो भी परिणाम आएगा उसका असर न्यायालय के फैसले के बाद किए जाने वाले जरूरी बदलावों पर नहीं पड़ेगा। दरअसल, ताइवान सरकार को जनमत संग्रह कराने का फैसला दक्षिणपंथी पार्टी के दबाव में लेना पड़ा।
प्रारंभिक परिणामों ने दर्शाया कि रूढ़िवादियों को भारी समर्थन मिला, जबकि समलैंगिक अधिकार की मांग करने वालों को जनता ने खारिज कर दिया। अधिकारियों को अब नागरिक संहिता में बदलाव किए बिना एक विशेष कानून पारित किए जाने की उम्मीद है।
जनमत संग्रह में हार के बाद सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी को करारा झटका लगा है। राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने स्थानीय चुनावों में हार के बाद ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी की नेता पद को छोड़ दिया, उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी (डीपीपी) को महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दों की वजह से हार का मुंह देखना पड़ा। राष्ट्रपति ने कहा, 'हमारे प्रयास पर्याप्त नहीं थे।'












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