अमेरिका की 'बदनाम' जेल से 20 साल बाद रिहा पाकिस्तान के रब्बानी भाइयों की कहानी

ग्वांतानामो बे
Getty Images
ग्वांतानामो बे

पिछले लगभग 20 साल से अमेरिकी सेना की जेल ग्वांतानामो बे में कैद पाकिस्तान के रब्बानी भाइयों को छोड़ दिया गया है. दोनों भाइयों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया.

अब्दुल और मोहम्मद अहमद रब्बानी नाम के दो भाइयों को पाकिस्तान में 2002 में गिरफ़्तार किया गया था.

अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कहा था कि अब्दुल रब्बानी अल-क़ायदा के लिए एक सुरक्षित ठिकाने का संचालन करते थे, जबकि उनके भाई पर इस चरमपंथी संगठन के नेताओं के लिए यात्रा और फंड का इंतजाम करने के आरोप थे.

रब्बानी भाइयों ने कहा सीआईए के अफ़सरों ने उन्हें ग्वांतानामो बे में भेजे जाने से पहले यातनाएं दी.

हालांकि रिहा किए जाने के बाद दोनों भाइयों को अब पाकिस्तान भेज दिया गया है.

ग्वांतानामो बे जेल क्यूबा में है, जिसे 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश ने बनवाया था.

इसे न्यूयॉर्क पर 26/11 के हमलों में शामिल संदिग्ध चरमपंथियों क़ैद रखने के मक़सद से बनाया गया था. ये जेल एक अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के भीतर बनाया गया है.

'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' के नाम पर यातनाओं की प्रतीक

लेकिन ये जेल अमेरिका के 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध' के नाम पर यातनाओं की प्रतीक बन गई. यहां पूछताछ के दौरान क़ैदियों को काफी यातनाएं दी जाती है. इस कारण इस जेल को 'बदनाम जेल' की भी संज्ञा दी जाती है.

आलोचकों का कहना है कि यहां क़ैदियों को बग़ैर किसी सुनवाई के लंबे समय तक क़ैद रख कर यातनाएं दी जाती हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने उम्मीद जताई है कि यह जेल जल्द ही बंद कर दी जाएगी. हालांकि यहां अभी भी 32 क़ैदियों को रखा गया है. 2003 में यहां एक समय में 680 क़ैदी रखे गए थे.

पेंटागन ने ग्वांतानामो में क़ैदियों की संख्या घटाने की कोशिश में सहयोग के लिए पाकिस्तान और दूसरे सहयोगियों के सहयोग की तारीफ की है.

पेंटागन ने कहा है, "अमेरिका ग्वांतानामो में क़ैदियों की संख्या घटाने और आख़िरकार इसे बंद करने की कोशिश में पाकिस्तान और दूसरे सहयोगियों की इच्छा का सम्मान करता है."

ग्वांतानामो बे जेल
Getty Images
ग्वांतानामो बे जेल

रब्बानी भाइयों के साथ क्या हुआ था?

रब्बानी भाइयों को पाकिस्तान की सुरक्षा एजेसियों ने सितंबर 2002 में कराची में गिरफ़्तार किया था.

वहां से उन्हें ग्वांतानामो बे ट्रांसफर करने में दो साल लग गए.

इसके पहले उन्हें अफ़गानिस्तान में सीआईए के एक डिटेंशन कैंप में रखा गया था.

अहमद रब्बानी ने 2013 अपनी गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ भूख हड़तालों का एक सिलसिला शुरू किया.

वे थोड़े-थोड़े अंतराल पर भूख हड़ताल करते रहे. जोड़ कर जेखा जाए तो उन्होंने कुल मिलाकर उन्होंने सात साल तक भूख हड़ताल की.

इस दौरान वो न्यूट्रिशन सप्लीमेंट पर जिंदा रहे. कभी-कभी ये उन्हें ज़बरदस्ती दिया जाता था.

https://twitter.com/Reuters/status/1628950381613969408

अदालत में दोनों भाइयों की पैरवी करने वाले थ्री डी सेंटर के वकील क्लाइव स्टेफर्ड स्मिथ ने बीबीसी से कहा कि वह दोनों भाइयों को हिरासत में रखे जाने के ख़िलाफ़ मुक़दमा करने की कोशिश करेंगे.

हालांकि वो कहते हैं कि उन्हें मुआवज़ा मिलने की गुंजाइश तो काफी कम है ही, न ही उनसे माफ़ी ही मांगी जाएगी.

दोनों भाइयों को 2021 में छोड़े जाने की अनुमति मिल गई थी. लेकिन ये पता नहीं चल सका है इसके बावजूद उन्हें क़ैद में क्यों रखा गया.

ग्वांतानामो बे जेल
Getty Images
ग्वांतानामो बे जेल

अहमद रब्बानी की गिरफ़्तारी के वक्त गर्भवती थीं उनकी पत्नी

अहमद रब्बानी को जिस वक्त गिरफ़्तार किया गया उस वक्त उनकी पत्नी गर्भवती थीं.

रब्बानी की गिरफ़्तारी के पांच महीने बाद उनकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया. रब्बानी अभी तक अपने बेटे से नहीं मिल पाए हैं.

स्टेफर्ड स्मिथ ने कहा, "मैं अहमद के बेटे जवाद से बात करता रहूं. अब तो वह 20 साल का हो गया है. जवाद ने अपने पिता को अभी तक नहीं देखा है क्योंकि गिरफ्तारी के वक्त वो पैदा नहीं हुआ था. मैं उम्मीद करता हूं कि जब बाप-बेटे एक-दूसरे को गले लगाएं तो मैं वहां मौजूद रहूं."

ग्वांतानामो बे में रहने के दौरान अहमद रब्बानी ने एक मुकम्मल पेंटर के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी.

अब वो मई में कराची में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाने की सोच रहे हैं. उनके काम से प्रेरित होकर 12 और पाकिस्तानी कलाकार इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे.

ग्वांतानामो बे जेल
Getty Images
ग्वांतानामो बे जेल

'उन्होंने एक पत्नी से पति और बेटे से पिता छीन लिया'

जस्टिस चैरिटी रिप्राइव की डायरेक्टर माया फ़ोआ ने अहमद रब्बानी को पिछले साल तक वकील मुहैया कराए थे.

माया फ़ोआ ने अहमद रब्बानी की दो दशक की क़ैद को एक 'त्रासदी' करार दिया. उन्होंने कहा, "ये मामला बताता है कि 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' के दौर में पाकिस्तान अपने मूल सिद्धांतों से कितना दूर चला गया था."

फ़ाआ ने कहा, "उन्होंने एक परिवार से उसका बेटा छीन लिया, एक पत्नी से पति और एक बेटे से उसका पिता छीन लिया. इस अन्याय की भरपाई कभी नहीं हो सकती."

वो कहते हैं कि 'आतंक के ख़िलाफ़' युद्ध के भयावह नुक़सान की पूरी गिनती तभी शुरू हो पाएगी जब ग्वांतानामो वे हमेशा के लिए बंद हो जाए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+