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Dying Star: अंतरिक्ष में दिखा खौफनाक मंजर! तबाही बना 'लाल दानव', खा गया बृहस्‍पति जितना बड़ा ग्रह

स्पेस साइंटिस्ट्स ने पहली बार अंतरिक्ष में अनोखी घटना देखी है। जिसमें खत्म होने वाले एक तारा अंतिम समय में एक 'ग्रह' को निगल गया।

Dying Star

Star Swallowing A Planet : सूर्य हाइड्रोजन गैस का अथाह भंडार है। ब्रह्मांड में ऊर्जा का रहस्य भी इसी में छिपा है। लेकिन अगर सूर्य से हाइड्रोजन खत्म हो जाए तो क्या होगा, इस सवाल का जवाब लंबे समय से तलाशा जा रहा था। लेकिन अब साइंटिस्ट्स ने इसका भी जवाब ढूंढ लिया है। हालांकि इससे पहले हुई तमाम रिसर्च में दावा किया गया कि सूर्य अपने आखिरी दौर में लाल गोले में तब्‍दील हो जाएगा। लेकिन इस सच का एक नमूना अब साइंटिस्ट्स ने खुद अपनी आंखों से देखा, जब एक तारे एक ग्रह को समाप्त कर दिया।

हाल में साइंटिस्ट्स ने एक ऐसी खगोलीय घटना देखी है, जिससे पूरे स्पेस साइंस जगत के एक्पर्ट्स हैरान हैं। वैज्ञानिकों ने उस पल को देखा जब एक मरने वाला एक तारा (Dying Star) एक ग्रह को खा गया। दावा किया जा रहा है कि ग्रह को निकलने वाला तारा सूर्य के आकार का था। तारे ने जिस ग्रह को खत्म किया वो बृहस्पति के आकार था।

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सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन विश्वविद्यालयों के एक्सपर्ट्स की टीम ने इस घटना को काफी करीब से ऑब्जर्व किया। साइंटिस्ट्स के टीम में यूएस की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के साइंटिस्ट्स शामिल थे।

एक्सपर्ट्स ने अपनी रिसर्च में दावा किया कि ऐसी खगोलीय घटना अगर आगे भी होती रही तो पृथ्वी के लिए खतरा हो सकता है। साइंटिस्ट्स ने आशंका व्यक्त की अगर ऐसा हुआ तो उस वक्त पृथ्वी का क्या होगा जब सूर्य अपनी हाइड्रोजन गैस खो देगा।

रिसर्च टीम में शामिल एमआईटी के एक्सपर्ट किशाले डे ने ने कहा, "तथ्य यह है कि सौर मंडल के ग्रह भविष्य में सूर्य में समा जाएंगे, ऐसा मैंने पहले हाई स्कूल में पढ़ा था, इसलिए यह महसूस करना अवास्तविक था कि हमें वास्तविक समय में इसी तरह की घटना का पहला उदाहरण मिल सकता है। "

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शोधकर्ताओं ने हाल की खगोलीय घटना का जिक्र करते हुए कहा, "शुरुआत में बड़े तारे को उसके अंतिम दौर में फूलते हुए देखा गया। वो अपने पहले के आकार से करीब एक लाख गुना बड़ा हो गया। इसकी वजह उसके अंदर मौजूद ईंधन (गैस) का बाहर निकलना था। बाद में उसने अपने आसपास के सभी ग्रहों को अपनी छाया में ढक लिया और जब फटा तो सारे ग्रह समाप्त हो गए।

विशेषज्ञों ने इस घटना को लेकर कहा, "सबूत के तौर पर ग्रह के टुकड़ों को लेकर अध्ययन किया गया। ये समझने की कोशिश की गई क्या विस्फोट के बाद धूल उड़ी थी। दरअसल स्पेस में गैस के ठंडा होने और धूल के अणुओं को फिर से संघनित करने में समय लगता है।"

वैज्ञानिकों ने बताया कि यह घटना पृथ्वी से लगभग 12,000 प्रकाश-वर्ष दूर अक्विला तारामंडल में देखी गई। वर्ष 2020 में इसका अवलोकन किया। घटना के बाद से एक्सपर्ट्स की टीम इसके विश्लेषण में लगातार लगी रही। टीम को यह समझने में एक साल लग गया कि स्पेस में उस वक्त दिखी सफेद रंग की तेज चमक क्या था।

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