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NASA का पॉवरफुल रॉकेट इंजन, 50 दिन में पूरी करेगा तमन्ना, मंगल पर जल्द इंसान रखेंगे कदम

मंगल और पृथ्वी के बीच अब सिर्फ पचास दिन का फासला होगा। इंसान 50 दिनों के भीतर मंगल पर जाने का अपना सपना पूरा कर सकता है। नासा के न्यूक्लियर रॉकेट इंजन की सफलता के बाद ये दावा किया जा रहा है।

NASA Nuclear Rocket Engine

NASA Nuclear Rocket Engine: नासा ने स्पेस में भेजे जाने वाले एक अपडेटेड रॉकेट इंजन की हाल ही में सफल टेस्टिंग की। ये एटॉमिक एनर्जी से चलने वाला इंजन है। पिछले 68 वर्षों से इस तरह के शक्तिशाली इंजन की तलाश थी, जो मंगल पर कम समय में जाने का सपना पूरा कर सके। दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए 45 से 50 दिनों के भीतर इंसान मंगल ग्रह पर पहुंच सकेंगे।

68 साल बाद प्रयोग

68 साल बाद प्रयोग

अब तक इंसान ने सिर्फ चंद्रमा पर अपने कदम रखे हैं। मंगल जैसे ग्रह तक पहुंचने के लिए मौजूदा रॉकेट पर्याप्त नहीं है। इसके लिए वो रॉकेट चाहिए जो लंबे समय तक चल सके और ईंधन भी खत्म ना हो। मंगल पर जाने के लिए साइंटिस्ट्स परमाणु ऊर्जा से चलने वाली रॉकेट तैयार करने में जुटे हैं। साथ ही रॉकेट में लाइफ सपोर्ट सिस्टम, रेडिएशन शील्डिंग, पावर और प्रोप्लशन सिस्टम की भी व्यवस्था होगी। इससे पहले अमेरिकी एयरफोर्स और एटॉमिक एनर्जी कमीशन ने 1955 में पहली बार प्रोजेक्ट रोवर के समय प्रोपल्शन सिस्टम को बनाने का प्रयास किया गया। बाद में ये प्रोजेक्ट 1959 में न्यूक्लियर इंजन फॉर रॉकेट व्हीकल एप्लीकेशन में बदल गया, जिसकी टेस्टिंग सफल रही थी।

NASA का अहम प्रयास

NASA का अहम प्रयास

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा तीन महीने पहले ही मंगल पर इंसानों को ले जाने वाले खास रॉकेट इंजन को लेकर दावा किया था। जिसे परमाणु ऊर्ज से चलने वाले इंजन की सफल टेस्टिंग के बाद अब जल्द ही कहीकत में बदलते देखा जा सकेगा। नासा इस प्रयास में है कि वो दस साल में वह ऐसा रॉकेट बना सके जो परमाणु ऊर्जा चलने में सक्षम हो। जिसका उद्देश्य ऐसे इंजन की खोज है जो इंसानों को मंगल पर जल्दी पहुंचाने में सक्षम हो।

50 दिनों में मंगल पर कदम

50 दिनों में मंगल पर कदम

नासा मंगल पर ऐसा याने भेजेगा जो कम समय में मिशन को पूरा करके वापस आ सके। इसके लिए स्पेस एजेंसी ने बाइमोडल न्यूक्लियर थर्मल रॉकेट पर काम शुरू की है। इस रॉकेट में ईंधन के खपत के दो तरीके हैं, पहला न्यूक्लियर थर्मल प्रोग्राम और दूसरा न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रोग्राम। शुरूआत में इनके जरिए मंगल ग्रह की यात्रा 100 दिन में पूरी की जा सकेगी। बाद में इसे अपग्रेड कर यात्रा का समय 45 से 50 दिन किया जा सकेगा।

 रॉकेट को प्लाज्मा से ऊर्जा

रॉकेट को प्लाज्मा से ऊर्जा

नासा ने पिछले साल इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। ये न्यूक्लियर रॉकेट इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स पर होगी। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में हाइपरसोनिक्स प्रोग्राम एरिया के प्रमुख प्रो. रयान गोसे इस रॉकेट अंतरिक्ष मिशन की दुनिया में चमत्कार मानते हैं। न्यूक्लियर थर्मल प्रोपल्शन (NTP) में परमाणु रिएक्टर लिक्विड हाइड्रोजन प्रोपेलेंट को गर्म करने से आयोनाइज्ड हाइड्रोजन गैस बनेगी। जिसे प्लाज्मा कहते हैं। ये चैनलाइज्ड होने के बाद रॉकेट के इंजन के लिए ईंधन के रूप में कार्य करेगा।

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