मणिपुर पर फिर बोला अमेरिका, वायरल वीडियो को बताया डरावना, भारत सरकार की कोशिशों को दिया समर्थन
मणिपुर में मैतई और कुकी समुदायों के बीच 3 मई को शुरू हुई हिंसा अब भी जारी है। दोनों समुदायों के बीच संघर्ष के दौरान कुछ दिनों पहले वहां 2 महिलाओं के साथ हुए गैंगरेप का वीडियो वायरल हुआ था। अब इस घटना पर एक बार फिर से अमेरिका ने प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिका से इस मामले को डरावना और चौंकाने वाला बताया है। अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा कि दो महिलाओं पर हुए हमले का वीडियो देखकर वे भयभीत और स्तब्ध हैं। हम घटना में पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदनाए जताते हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए भारत सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हैं।

विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने मंगलवार को अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए ये बात कही। पटेल ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कह चुके हैं कि किसी भी सभ्य समाज में महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार शर्मनाक है।
वेदांत पटेल ने कहा कि हम पहले भी कह चुके हैं कि मणिपुर मामले में हम शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में हैं और उम्मीद करते हैं कि अधिकारी मानवीय प्रतिक्रिया देते हुए हर समुदाय के लोगों और उनकी संपत्ति की रक्षा करेंगे।
बता दें कि इससे पहले भारत में अमेरिका के राजदूत ने भी ये मामला उठाया था। भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा, "ये भारत का आंतरिक मामला है, लेकिन जैसा मैंने पहले भी कहा था, जब भी इस तरह की घटना होती है तो मानवीय पीड़ा होती है, और हमारा दिल टूट जाता है। चाहे वो घटना हमारे पड़ोस में हो, या दुनिया के बाकी हिस्से में हो या जहां हम रह रहे हैं वहां हो।"
इससे पहले 6 जुलाई को भी अमेरिका ने भी मणिपुर की हिंसा पर चिंता जाहिर की थी और इस मामले में मदद की पेशकश की थी। गार्सेटी ने कहा था कि अगर भारत मदद मांगता है तो हम उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि मणिपुर के हालातों पर हमें कोई रणनीतिक चिंता नहीं है, हमें सिर्फ लोगों की चिंता है।
मणिपुर की हिंसा का मामला ब्रिटेन की संसद में भी उठाया जा चुका है। ब्रिटेन में धार्मिक आजादी से जुड़े मामलों की स्पेशल राजदूत और सांसद फियोना ब्रूस ने 20 जून को बीबीसी पर मणिपुर हिंसा की ठीक से कवर न करने के आरोप लगाए थे।
ब्रूस ने ब्रिटेन के निचले सदन में दावा किया था कि मणिपुर में मई से कई सौ चर्च जलाए जा चुके हैं, स्कूलों को बर्बाद किया गया है। 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। 50,000 से ज्यादा लोगों को घर छोड़ना पड़ा है। ब्रूस ने कहा कि इससे साफ होता है कि ये सब प्लानिंग के तहत किया जा रहा है और धर्म इन हमलों में बड़ा फैक्टर है।
इसी महीने 11 जुलाई, 2023 को फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद के सांसदों ने मणिपुर में हो रही हिंसा पर प्रस्ताव पारित किया था। इस दौरान सत्ताधारी पार्टी के नेताओं पर नफरती भाषण देने और केंद्र सरकार पर विभाजनकारी नीति लागू करने का आरोप लगाया गया था।












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