Aparna Yadav Emotional: जो काम Dimple न कर सकीं, 'Baby' ने कर दिखाया! Prateek के लिए फूट-फूटकर रोईं अपर्णा
Aparna Yadav Emotional: सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे प्रतीक यादव का अचानक निधन पूरे यादव परिवार पर भारी पत्थर की तरह गिरा। 13 मई की सुबह 6 बजे जब यह दुखद खबर आई, तो पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। 14 मई को लखनऊ के बैकुंड धाम श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। चिता की लपटों के सामने पूरी यादव परिवार की एकजुटता दिखी, लेकिन सबसे ज्यादा टूटीं प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव।
जिन आंखों ने अंतिम क्षण तक खुद को पत्थर की तरह सख्त बनाए रखा, वे आखिरकार टूट ही गईं। और जब टूटा, तो अपर्णा फूट-फूटकर रो पड़ीं। हैरान करने वाली बात यह थी कि यह कंधा उनकी जेठानी डिंपल यादव का नहीं, बल्कि कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य का था।

वह मार्मिक पल जो वायरल हो गया
अंतिम संस्कार के लगभग चार घंटे बाद शाम 6:22 बजे बेबीरानी मौर्य (Baby Rani Maurya) ने एक तस्वीर शेयर की। तस्वीर में अपर्णा यादव बेबीरानी के कंधे पर सिर रखे फूट-फूटकर रो रही हैं। बेबीरानी उन्हें थामे हुए हैं। कैप्शन था - 'निःशब्द... स्तब्ध...!'
यह तस्वीर देखकर लाखों लोग भावुक हो गए। जो काम परिवार की सबसे करीबी डिंपल यादव नहीं कर सकीं, उसे बेबीरानी मौर्य ने संभाला। अपर्णा बच्चों की तरह बेबी रानी से लिपटकर रोईं। मानो सालों का दर्द, पति की अचानक विदाई का सदमा और दो छोटी बेटियों के भविष्य का डर एक साथ उमड़ पड़ा।
Aparna Yadav: मजबूत, लेकिन अंदर से टूटी हुई
अपर्णा यादव पूरे समय पत्थर की तरह मजबूत बनी रहीं। मांग का सिंदूर, दो छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया और अचानक पति की विदाई, सब कुछ मानों एकदम से उजड गया। लेकिन इंसान कितना भी मजबूत क्यों न हो, आखिरकार भावनाएं अपना रास्ता ढूंढ ही लेती हैं। बेबीरानी मौर्य के कंधे पर रोते हुए अपर्णा का जो दर्द निकला, वह शायद कई दिनों से दबा हुआ था। बेबीरानी मौर्य ने इस दुख की घड़ी में अपर्णा का साथ दिया, जो राजनीति से परे एक इंसानी रिश्ते का सुंदर उदाहरण है।
श्मशान घाट पर सन्नाटा और सिसकियां
इससे पहले, 14 मई दोपहर, बैकुंड धाम श्मशान घाट पर उस दिन हवा भी रुक सी गई थी। जब प्रतीक यादव की चिता धीरे-धीरे राख में बदल रही थी। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट (पूर्व राज्य सूचना आयुक्त) ने मुखाग्नि दी। अखिलेश यादव ने भाई की चिता पर लकड़ी चढ़ाई और अंतिम प्रणाम किया।
प्रतीक की दोनों बेटियां प्रथमा यादव (बड़ी) और पद्मजा यादव (छोटी) भी वहां मौजूद थीं। दोनों ने पिता की चिता पर लकड़ी चढ़ाई। पूरा माहौल गमगीन था। हवा में सिर्फ आग की लपटों की आवाज और कभी-कभी उठती सिसकियां सुनाई दे रही थीं।
लेकिन इस दर्द भरे माहौल में एक छोटा-सा पल उम्मीद और अपनापन जगाता रहा। अखिलेश यादव ने प्रतीक की छोटी बेटी पद्मजा को चॉकलेट दी। जब पैकेट नहीं खुला तो खुद रैपर फाड़कर बच्ची को चॉकलेट खिलाई। बेटी बड़े पापा के हाथ से चॉकलेट खाती रही। आसपास खड़े लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए।
अखिलेश यादव ने दोनों बेटियों को अपने पास बिठाकर काफी देर तक संभाला। उनका सिर सहलाया, दिलासा दिया और प्यार से बात की। राजनीतिक तूफानों के बीच भी अखिलेश यादव रिश्तों को कितनी गहराई से निभाते हैं, यह पल उसका प्रमाण था।
परिवार की एकजुटता का संदेश
सौतेले रिश्तों और गुटबाजी की चर्चाओं के बीच प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार यादव परिवार की एकजुटता का प्रतीक बन गया। अखिलेश यादव पूरे समय शांत और संयमित रहे। शिवपाल यादव भी मौजूद रहे। अखिलेश के बेटे अर्जुन यादव ने भी चाचा को अंतिम विदाई दी। पूरी परिवार ने एक साथ खड़े होकर इस दुख की घड़ी को झेला। अपर्णा यादव के पिता अरविंद बिष्ट, मां और अन्य रिश्तेदार भी पूरे समय उनके साथ रहे। राजनीतिक गलियारों में चाहे जितनी भी अलगाव की खबरें चलती रहें, लेकिन दुख के समय यादव परिवार एकजुट दिखा।
अब शुरू होगा 13 दिनों का शोक
अंतिम संस्कार के बाद यादव परिवार अब 13 दिनों तक शोक मना रहा है। क्रिया-कर्म की प्रक्रिया चलेगी। प्रतीक यादव की दोनों बेटियां अब पिता के बिना जीवन की नई शुरुआत करेंगी। अपर्णा यादव को दो मासूमों की परवरिश के साथ-साथ इस अपूरणीय घाटे को भी सहना होगा। प्रतीक यादव सपा परिवार के छोटे 'प्रतीक' थे। अचानक विदाई ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।













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