Aparna Yadav के भाई कौन हैं, जिनके नाम पर 17 कंपनियां? Prateek Yadav को अंतिम वक्त में अस्पताल ले गए थे

Prateek Yadav Aman Singh Bisht Relation: सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का देहांत हो चुका है। 13 मई को यादव परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा। सुबह 6 बजे प्रतीक के निधन की खबरों ने शोक की लहर दौड गई। 14 मई को लखनऊ के बैकुंड धाम में अंतिम संस्कार किया गया। ससुर ने मुखाग्नि दी। लेकिन, इस बीच एक नाम सुर्खियों में छाया रहा।

प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट (जिनका पूरा नाम चंद्रशेखर सिंह बिष्ट है) का। प्रतीक यादव को अंतिम वक्त में अस्पताल ले जाने वाले व्यक्ति अमन ही थे। आपको बता दें कि यह वही नाम है, जो 2012-2016 के दौरान 17 कंपनियां दर्ज होने और एक बड़े जमीन धोखाधड़ी मामले में आने से राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। आइए आपको विस्तार से रूबरू कराते हैं...

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Prateek Yadav Real Estate Business Aman Role: प्रतीक यादव के रियल एस्टेट कारोबार में अमन की सक्रिय भूमिका?

अपर्णा यादव मूल रूप से उत्तराखंड की बिष्ट परिवार से हैं। उनका विवाह प्रतीक यादव के साथ हुआ था। अपर्णा, मुलायम सिंह यादव परिवार की 'छोटी बहू' के रूप में जानी जाती हैं। अमन सिंह बिष्ट उनके भाई हैं। परिवार की राजनीतिक पहुंच और प्रतीक यादव के रियल एस्टेट कारोबार में अमन की सक्रिय भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चाएं रही हैं।

प्रतीक यादव को अंतिम वक्त में अस्पताल ले जाने में अमन बिष्ट की भूमिका बताई जा रही है। यह घटना परिवार के भीतर की निकटता को दर्शाती है, लेकिन साथ ही अमन पर लगे गंभीर आरोपों को भी फिर से सुर्खियों में ला दी है।

17 कंपनियां: 2012 सपा सरकार बनते ही तेजी से रजिस्ट्रेशन

सपा सरकार बनने के तुरंत बाद 2012 में अमन सिंह बिष्ट ने व्यापारिक गतिविधियां तेज कर दीं। जानकारी के अनुसार:

  • 2012 से 2016 के बीच 17 कंपनियां रजिस्टर कराई गईं।
  • इनमें से 16 कंपनियों में अमन सिंह बिष्ट को डायरेक्टर या डिजिग्नेटेड डायरेक्टर बनाया गया (12 जुलाई 2012 से 29 अप्रैल 2016 तक)।
  • एक अतिरिक्त कंपनी में मई 2018 में उन्हें डायरेक्टर बनाया गया।
  • अधिकांश कंपनियां रियल एस्टेट, निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी थीं।

हालांकि, अमन डायरेक्टर थे, लेकिन सूत्रों के अनुसार पूरे कारोबार की बागडोर प्रतीक यादव के हाथ में रहती थी। अमन बिष्ट प्रतीक यादव के रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी कारोबार को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

Prateek Yadav के साथ साझेदारी और रियल एस्टेट साम्राज्य

प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे हैं। राजनीति में सक्रिय न रहकर, रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय रहे। अमन बिष्ट को उनके 'ट्रस्टेड' सहयोगी के रूप में देखा जाता है। यूपी में सपा शासन के दौरान रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तेजी आई थी। आलोचक आरोप लगाते हैं कि इस दौरान सत्ता के निकट लोगों को फायदा पहुंचाने वाले कई प्रोजेक्ट्स और डील्स हुईं। अमन बिष्ट की कंपनियां उसी दौर में उभरीं, जिसे विपक्षी दल 'सपा परिवार और उनके निकटियों का कारोबारी विस्तार' बताते हैं।

14 करोड़ रुपये की जमीन धोखाधड़ी का मामला

सितंबर 2025 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में अमन सिंह बिष्ट के खिलाफ कारोबारी ठाकुर सिंह ने 14 करोड़ रुपये की जमीन धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि अमन और संबंधित कंपनियों ने जमीन के सौदे में धोखाधड़ी की, जिससे खरीदारों को भारी नुकसान हुआ। यह मामला वर्तमान में जांच के अधीन है। इस मुकदमे ने अमन बिष्ट की कंपनियों और उनके कारोबारी नेटवर्क पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

सपा शासनकाल में कैसे मिला फायदा?

2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद यूपी में विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट को बढ़ावा देने का दावा किया गया था। लेकिन विपक्ष (तत्कालीन BJP) ने लगातार परिवारवाद, भाई-भतीजावाद और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगाए। अमन बिष्ट का मामला इसी आलोचना का हिस्सा बन गया। सपा शासनकाल में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां सत्ता से जुड़े लोगों या उनके रिश्तेदारों के कारोबार में अचानक वृद्धि देखी गई। अखिलेश यादव अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। परिवार की छवि को साफ रखने के लिए सपा प्रयासरत है, लेकिन अमन बिष्ट जैसे मामले बार-बार पुराने आरोपों को ताजा कर देते हैं।

प्रॉपर्टी डील्स में राजनीतिक कनेक्शन

यूपी में रियल एस्टेट क्षेत्र हमेशा से विवादों का केंद्र रहा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, आगरा जैसे शहरों में प्रॉपर्टी डील्स में राजनीतिक कनेक्शन वाले लोगों की सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती है। अमन बिष्ट की कंपनियां इसी इकोसिस्टम का हिस्सा बताई जाती हैं। वहीं, प्रतीक यादव को परिवार का बिजनेस चेहरा माना जाता है। परिवार के समर्थक कहते हैं कि यह निजी कारोबार है और राजनीति से अलग है। आलोचक इसे सत्ता का दुरुपयोग करार देते हैं।

सवाल जो उठते हैं

  • 1. सपा सरकार बनते ही अमन बिष्ट द्वारा इतनी तेजी से कंपनियां रजिस्टर कराने के पीछे क्या कारण थे?
  • 2. प्रतीक यादव के रियल एस्टेट कारोबार में अमन की भूमिका कितनी गहरी थी?
  • 3. 14 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला कितना गंभीर है और जांच में क्या निकलता है?

अमन सिंह बिष्ट का मामला यूपी की राजनीति में परिवार, कारोबार और सत्ता के गठजोड़ की पुरानी बहस को फिर से जीवंत कर देता है। प्रतीक यादव को अस्पताल ले जाने जैसी निजी घटना में उनका नाम आने से परिवार की आंतरिक एकजुटता दिखती है, लेकिन 17 कंपनियों और धोखाधड़ी के आरोप उनके कारोबारी साम्राज्य पर सवाल खड़े करते हैं।

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