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नेपाल सुप्रीम कोर्ट से चीनी कंपनी को झटका, इस भारतीय कंपनी को मिल सकता है Expressway बनाने का ठेका

नेपाल में एक बड़े एक्सप्रेसवे निर्माण का ठेका एक चीनी कंपनी को मिला था, जिसपर नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। दूसरे नंबर की बोली एक भारतीय कंपनी ने लगाई है, जिसे ठेका मिलने की संभावना बढ़ गई है।

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नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने चीनी कंपनी को एक्सप्रेसवे निर्माण का ठेका लेने से रोक दिया है। इस फैसले से भारत की एक कंपनी को इस एक्सप्रेसवे निर्माण का ठेका मिलने की संभावना बढ़ गई है। नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सेना द्वारा चीन की एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी को यह प्रोजेक्ट सौंपने के लिए बुलावा देने के खिलाफ आदेश जारी किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए एक भारतीय कंपनी ने भी बोली लगाई थी। आरोप है कि नेपाली सेना ने आम चुनाव से एक दिन पहले गलत तरीके से चीनी कंपनी को यह ठेका दिया है, जिसके पास तकनीकी दक्षता का अभाव है।

भारतीय कंपनी की याचिका के आधार पर रोक
नेपाल में काठमांडू-तराई-मधेश एक्सप्रेसवे के छठे चरण में एक्सप्रेसवे के निर्माण का काम होना है। इसके लिए नेपाली सेना ने चीन की कंपनी फर्स्ट हाइवे इंजीनियरिंग को ठेका दिया था। नवंबर में नेपाल में आम चुनाव से एक दिन पहले नेपाली सेना ने भारतीय कंपनी की बोली को दरकिनार कर यह ठेका दिया था। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कंपनी Afcons इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है।

शुक्रवार को होगी अगली सुनवाई
भारतीय कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से यह याचिका वकील रिजल खडका ने डाली थी। इसी पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच के जज जस्टिस तनका बहादुर मोकतान ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है, जो कि शुक्रवार तक प्रभावी रहेगा। इस अंतरिम आदेश पर अदालत अगली सुनवाई भी उसी दिन करेगी। उन्होंने कहा, 'भारतीय कंपनी इस फास्ट ट्रैक प्रोजेक्ट के पैकेज 6 के लिए बोली लगाने वालों में शामिल थी, जिसकी वित्तीय बोली चीन के बाद दूसरी सबसे कम है।'

चीनी कंपनी को गलत तरीके से ठेका देना का आरोप
इसी आधार पर उन्होंने कहा है, 'चीनी ठेकेदार को अयोग्य ठहराए जाने का मतलब है कि भारतीय ठेकेदार को यह ठेका मिलेगा।' इससे पहले अपनी रिट याचिका में रिजल ने कहा था कि नेपाली सेना को चीनी कंपनी को ठेका देने के लिए नोटिफिकशन पर अमल नहीं करना चाहिए। इससे पहले 11 नवंबर को नेपाली सेना, जो कि राष्ट्रीय गौरव प्रोजेक्ट की इंचार्ज है, उसने चीन की फर्स्ट हाइवे इंजीनियरिंग को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसे कि पहले टेंडर के दौरान अयोग्य ठहराया गया था, लेकिन बाद में उसे तकनीकी दक्षता की कमी के बावजूद पिछले दरवाजे से एंट्री दे दी गई थी। इसी के बाद भारतीय कंपनी ने 24 नवंबर को नेपाली आर्मी के लेटर ऑफ इंटेंट के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करने की मांग करते हुए याचिका लगाई थी।

भारतीय कंपनी को मिल सकता है ठेका
नेपाल के इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का निर्माण 2017 में शुरू किया गया था और इसे पूरा करने की नई डेडलाइन बढ़ाकर जुलाई 2024 की जा चुकी है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी ने इसके लिए 18.786 बिलियन नेपाली रुपए का प्रस्ताव दिया था। जबकि भारतीय कंपनी Afcons इंफ्रास्ट्रक्चर ने 19.99 बिलियन नेपाली रुपए की बोली लगाई थी। (तस्वीर-सांकेतिक)

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