Bangladesh: फांसी की सजा मिलने के बाद शेख हसीना ने दी पहली प्रतिक्रिया, यूनुस सरकार पर आरोप लगाते हुए क्या कहा
Sheikh Hasina death sentence: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। 78-वर्षीय हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड माना गया है। साथ ही, उनके तत्कालीन गृह मंत्री असद-उज-जमां खान कमाल को भी 12 हत्याओं में दोषी कर फांसी की सजा सुनाई गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों नेता पिछले 15 महीनों से भारत में निर्वासित हैं। शेख हसीना ने इस फैसले को पक्षपाती और राजनीति-प्रेरित बताते हुए न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, और उनके समर्थकों में गहरा तनाव फैला है।

Bangladesh: शेख हसीना ने क्या-क्या कहा?
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया में शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। हसीना ने कहा कि:
कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है
हसीना के अनुसार, यूनुस शासन में सार्वजनिक सेवाएं चरमरा गई हैं, पुलिस सड़कों से पीछे हट चुकी है और अपराधियों का मनोबल बढ़ गया है। उन्होंने दावा किया कि देश की अपराध-ग्रस्त सड़कों पर राजनीतिक हमले आम हो गए हैं।
अवामी लीग समर्थकों पर हमले
उन्होंने कहा कि सरकार के संरक्षण में उनके दल अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर लगातार हमले हो रहे हैं, और इन मामलों में न्यायिक निष्पक्षता पूरी तरह ध्वस्त है।
अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर अत्याचार
हसीना ने आरोप लगाया कि हिंदुओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं, महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है, और सरकार इन हमलों को रोकने में विफल रही है।
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इस्लामिक कट्टरवाद का बढ़ता प्रभाव
उन्होंने कहा कि सरकारी ढांचे के भीतर मौजूद इस्लामी कट्टरवादी, जिनमें हिज़्ब-उत-तहरीर से जुड़े लोग भी शामिल हैं, बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष विरासत को कमजोर कर रहे हैं।
प्रेस की आज़ादी दबाई जा रही है
हसीना ने दावा किया कि यूनुस शासन में पत्रकारों को गिरफ्तार किया जा रहा है और मीडिया पर दमन बढ़ गया है।
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आर्थिक विकास ठप होने का आरोप
उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और इस बात की पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मीडिया, NGO, स्वतंत्र संस्थानों और IMF की रिपोर्ट भी करती हैं।
चुनाव प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप
हसीना ने यूनुस पर जानबूझकर चुनाव टालने और देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी-अवामी लीग-को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस शासन को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन "बांग्लादेश का कोई भी नागरिक इस सरकार को वोट नहीं दे पाया।"
अगला चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष कराने की मांग
अंत में हसीना ने कहा कि यह देश बांग्लादेश के लोगों का है और अगला चुनाव तभी सार्थक होगा जब वह स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी हो।
क्या है मामला?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने फांसी की सजा सुनाई है। उन्हें 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड करार दिया गया है। हसीना को हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने में दोषी माना गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव (Political Tension) चरम पर है। हसीना के खिलाफ यह महत्वपूर्ण मामला उनकी गैर-मौजूदगी में चला, क्योंकि वह फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं।
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भारत में रह रही हैं शेख हसीना
शेख हसीना और असद-उज-जमां खान कमाल, दोनों पिछले 15 महीनों से भारत में निर्वासन में रह रहे हैं। ICT के इस फैसले से पहले बांग्लादेश के कई इलाकों में हिंसा (Violence), आगजनी और झड़पों का दौर जारी है। राजधानी ढाका (Dhaka) में सुरक्षा सबसे ज्यादा कड़ी कर दी गई है और हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने तक के आदेश (Shoot-at-sight Orders) दे दिए गए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि इस फैसले के बाद बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।












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