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Where is Sheikh Hasina: कहां हैं शेख हसीना? कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा,बाकी आरोपी कहां छिपे हैं—हर डिटेल

Where Is Sheikh Hasina Now: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी पाया है और मौत की सजा सुनाई है। फैसला उस वक्त आया है जब हसीना पहले से ही देश छोड़कर बाहर रह रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शेख हसीना इस समय कहां हैं और उनके साथ इस केस के बाकी आरोपी किन देशों में रह रहे हैं?

आखिर कहां हैं शेख हसीना

बांग्लादेश में पिछले साल 2024 जुलाई-अगस्त के छात्र विद्रोह के दौरान हिंसा और मौतों के मामले में शेख हसीना के खिलाफ मामला चला। दिलचस्प बात यह है कि ट्रायल उनकी गैरमौजूदगी में पूरा हुआ। विद्रोह के तुरंत बाद 5 अगस्त 2024 को वह देश छोड़कर भारत आई थीं।

Where Is Sheikh Hasina Now

मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि वर्तमान में शेख हसीना भारत में निर्वासन में रह रही हैं। कुछ खबरें यह भी आईं थीं कि वे अपनी बहन के घर लंदन जा सकती हैं, लेकिन अभी तक यही रिपोर्ट सामने है कि वह दिल्ली-NCR के किसी सेफहाउस में हैं। उनका सटीक लोकेशन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक नहीं किया है।

🟡 हसीना के बेटे का दावा-"मेरी मां भारत में सुरक्षित हैं"

अल जजीरा के मुताबिक शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि उनकी मां को मौत की सजा सुनाई जा सकती है। उन्होंने साफ कहा कि भारत ने हसीना को पूरा सुरक्षा कवच दे रखा है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

वाजेद ने कहा कि हसीना की लोकप्रियता अभी भी बहुत बड़ी है। वह 5 बार प्रधानमंत्री रही हैं और अवामी लीग देश की सबसे बड़ी पार्टियों में से एक है। इसलिए इस फैसले को हल्के में लेना मुश्किल है।

🟡 बाकी अन्य आरोपी कहां हैं?

इस केस में शेख हसीना के अलावा असदुज्जमां खान पूर्व गृह मंत्री (फिलहाल भारत में, फरार) और चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून पूर्व IGP (हिरासत में, सरकारी गवाह) को सजा सुनाई गई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि तीनों अभियुक्तों में से हसीना और असदुज्जमां दोनों भारत में छिपे हुए हैं, जबकि तीसरा आरोपी ममून अब सरकारी गवाह बन चुका है।

🟡 शेख हसीना बोलीं-फैसला पक्षपाती, राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा

अपने बयान में शेख हसीना ने इस फैसले को गलत, पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि देश में वर्तमान "गैर-निर्वाचित" सरकार न्याय व पुलिस व्यवस्था को कमजोर कर रही है और अवामी लीग समर्थकों व अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केस सच्चाई की जांच कम और अवामी लीग को खत्म करने की साजिश ज्यादा है।

🟡 किस केस में सुनाई गई शेख हसीना और अन्य को फांसी की सजा?

🔹 ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 की तीन सदस्यीय बेंच ने शेख हसीना को दो गंभीर आरोपों हत्या के लिए उकसाना, हत्या का आदेश देना में दोषी पाया गया है।

🔹 कोर्ट ने कहा कि जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई कई हत्याओं के पीछे हसीना की भूमिका थी। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां को भी 12 लोगों की हत्या का दोषी पाया गया और फांसी की सजा सुनाई गई।

🔹 तीसरे आरोपी अब्दुल्ला अल-ममून को सरकारी गवाह बनने के बाद 5 साल की सजा दी गई है। कोर्ट ने हसीना और असदुज्जमां की बांग्लादेश में मौजूद संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया है।

🔹 अभियोजन पक्ष ने 747 पन्नों का दस्तावेज कोर्ट में जमा किया जिसमें कहा गया है, विद्रोह के दौरान 1,400 लोगों की हत्या हुई, 25,000 लोग घायल हुए, कई जगहों पर छात्रों और आम लोगों को निर्दयता से निशाना बनाया गया।

🔹 हसीना, असदुज्जमां और अल-ममून पर लगे पांच प्रमुख आरोप हैं, हत्या, हत्या की कोशिश, साजिश, सहायता और प्रोत्साहन और उकसावा।

🔹 कोर्ट ने यह भी माना कि हसीना ने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों को "रज़ाकार की औलाद" कहा, जो हिंसा भड़काने वाला बयान था।

🟡 विडंबना:जिस कोर्ट को उन्होंने बनाया, उसी ने सुनाई मौत की सजा

यह पूरा मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) जिसे 2010 में शेख हसीना की सरकार ने स्थापित किया था, उसी कोर्ट ने आज उन्हें मौत की सजा सुनाई है। यह ट्रिब्यूनल 1971 के युद्ध अपराधों की जांच के लिए बनाया गया था, लेकिन वर्षों तक निष्क्रिय रहा। हसीना ने ही इसे मजबूत किया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत शेख हसीना को प्रत्यर्पित करेगा? क्या बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी? अवामी लीग और उसके समर्थक इस फैसले पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे?

अभी तक भारत सरकार ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन इतना तय है कि बांग्लादेश की राजनीति का अगला अध्याय बेहद उथल-पुथल भरा होने वाला है और इस फैसले ने दोनों देशों की कूटनीति को भी एक नई दिशा दे दी है।

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