SCO Summit: ताजिकिस्तान, किर्गीस्तान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों से भारत की द्विपक्षीय बैठक

ससीओ एक प्रमुख आर्थिक और सुरक्षा ब्लॉक है और सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके स्थायी सदस्य बने थे।

ताशकंत, जुलाई 30: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ताशकंद में चल रहे शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन यानि, एससीओ सम्मेलन के इतर ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उजबेकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और पाकिस्तान के बिलावल भुट्टो ने भी भाग लिया है।

ताशकंत में एससीओ की बैठक

ताशकंत में एससीओ की बैठक

एससीओ शिखर सम्मेलन से इतन भारतीय विदेश मंत्री ने एससीओ के महासचिव झांग मिंग से भी मुलाकात की। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने ट्वीट करते हुए कहा कि, "एससीओ के महासचिव झांग मिंग से मुलाकात की। भारत एससीओ देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए और अधिक विचार और पहल करना जारी रखेगा। अगले साल इसकी अध्यक्षता हमारे पास होगी, जो इन प्रयासों को नए सिरे से आगे बढ़ाएगा।" इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन के साथ अपनी बातचीत को 'उपयोगी' बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, "तजाकिस्तान के एफएम सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन के साथ उभरती क्षेत्रीय स्थिति पर एक उपयोगी बातचीत हुई है। हमारा लंबे समय से सहयोग, हमें विचारों के खुले आदान-प्रदान के लिए प्रोत्साहित करता है।"

विकास में सहयोग को लेकर बातचीत

विकास में सहयोग को लेकर बातचीत

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि, किर्गिस्तान के नेता जीनबेक कुलुबेव के साथ बातचीत में विकास सहयोग, संपर्क और दवा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। भारतीय विदेश मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि, एससीओ से इतर किर्गिस्तान के विदेश मंत्री जीनबेक कुलुबेव के साथ अच्छी बातचीत हुई है। इस दौरान हमारे बीच राजनीतिक, विकास सहयोग, शिक्षा, कनेक्टिविटी और फार्मा में हमारी द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की गई।" अपनी बातचीत में एस. जयशंकर और कार्यवाहक उज़्बेक विदेश मंत्री व्लादिमीर नोरोव ने आपसी द्विपक्षीय सहयोग का जायजा लिया। विदेश मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि, "उज्बेकिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री व्लादिमीर नोरोव से मिलकर खुशी हुई। हमने द्विपक्षीय सहयोग, विशेष रूप से विकास साझेदारी का जायजा लिया। क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से संपर्क की चुनौतियों के बारे में बात की।" जयशंकर ने गुरुवार को कजाखस्तान के विदेश मंत्री मुख्तार तिलेबर्दी के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की थी।

मध्य एशियाई देशों से भारत के अच्छे संबंध

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि, "हमने दिसंबर 2021 में नई दिल्ली में अपनी पिछली बैठक के बाद से हुई डेवलपमेंट को पहचाना। वर्तमान स्थिति सभी क्षेत्रों में मजबूत भारत-कजाख सहयोग की जरूरत को पहचाना।" एससीओ बैठक के बाद, उन्होंने मध्य एशियाई देशों में भारतीय राजदूतों के साथ ताशकंद में एक बैठक की भी अध्यक्षता की। जयशंकर ने ट्विटर पर कहा, "भारत-मध्य एशिया संबंधों को मजबूत करने की दिशा में उनके प्रयासों की सराहना की।" आपको बता दें कि, एससीओ एक प्रमुख आर्थिक और सुरक्षा ब्लॉक है और सबसे बड़े अंतर-क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक के रूप में उभरा है। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके स्थायी सदस्य बने थे। समूह की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कज़ाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने एक शिखर सम्मेलन में की थी।

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