Russia Ukraine War: अपने ही सैनिकों को क्यों मार रहा रूस? रोंगटे खड़े कर देगा पुतिन का खतरनाक प्लान
Russian Forces Shoot Own Soldiers: रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। यूक्रेन की एक संस्था 'आई वांट टू लिव' ने दावा किया है कि रूसी सेना अब अपने ही उन सैनिकों को निशाना बना रही है जो जान बचाने के लिए सरेंडर (आत्मसमर्पण) करना चाहते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी कमांडर्स के बीच यह सोच घर कर गई है कि 'एक असली हीरो वही है जो मर चुका है', यानी जिंदा वापस आने वाले को गद्दार माना जा रहा है। यह घटना दिखाती है कि युद्ध के मैदान में रूसी सैनिकों की मानसिक और नैतिक स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।

Russia Ukraine war news 2026: अपनों ने ही चला दिया ड्रोन
दरअसल, कुछ दिन पहले यूक्रेन के चासिव यार इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। दो रूसी सैनिक हाथ ऊपर करके यूक्रेनी सेना के सामने सरेंडर करने जा रहे थे। उन्हें लगा कि अब उनकी जान बच जाएगी, लेकिन तभी पीछे से उनकी अपनी ही सेना ने उन पर आत्मघाती (FPV) ड्रोन से हमला कर दिया। इस हमले में एक सैनिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा खुशकिस्मती से बचकर यूक्रेनी सीमा में घुसने में कामयाब रहा।
Russian Army News: 'वीर मृत्यु' का अजीब शौक
रूसी सेना के भीतर आजकल एक खतरनाक मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। सैनिकों को सिखाया जा रहा है कि सरेंडर करना कायरता है और खुदकुशी कर लेना या लड़ते हुए मर जाना ही असली बहादुरी है। यूक्रेन का कहना है कि रूसी सरकार नहीं चाहती कि उनके सैनिक जिंदा वापस घर लौटें। यही वजह है कि मोर्चे पर पीछे हटने या सरेंडर करने वालों पर उनकी अपनी ही 'शूटिंग स्क्वाड' नजर रखती है।
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World News Today Hindi: नशे के सहारे कट रही है जिंदगी
मोर्चे पर तैनात रूसी सैनिकों की हालत इतनी खराब है कि वे भारी तनाव और डर से जूझ रहे हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसी ने कुछ ऐसी बातचीत रिकॉर्ड की है जिसमें रूसी सैनिक अपने साथियों से नशीली दवाओं (Drugs) की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस 'नर्क' जैसी स्थिति में बिना नशे के रहना उनके लिए मानसिक रूप से नामुमकिन होता जा रहा है। हार और मौत के साये ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है।
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कैदियों की अदला-बदली में भी भेदभाव
रूस अपने उन सैनिकों की परवाह नहीं करता जो कैदी बना लिए गए हैं। जब यूक्रेन के साथ कैदियों की अदला-बदली की बात आती है, तो रूस केवल उन्हीं सैनिकों को वापस मांगता है जिन्हें वह दोबारा तुरंत युद्ध में झोंक सके। जो सैनिक घायल हैं या लड़ने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें वापस लाने में मॉस्को कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता। यह दिखाता है कि सैनिकों को इंसान नहीं, बल्कि सिर्फ एक मशीन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।












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