Russia-India Oil Deal: भारत के खिलाफ फेल हो गया अमेरिका का ऑयल ट्रैप! रूस के बयान ने व्हाइट हाउस में मचाई हलचल
Russia-India Oil Deal: रूस और भारत के बीच दशकों पुराने रिश्तों में दरार आने की अफवाहों पर रूस ने विराम लगा दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा (Maria Vladimirovna Zakharov) ने साफ कर दिया है कि भारत और रूस के बीच एनर्जी पार्टनरशिप (ऊर्जा सहयोग) को लेकर भारत का रुख बदलने का कोई कारण नहीं दिखता।
जखारोवा ने कहा कि रूस से संसाधनों का व्यापार दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है।

'भारत कोई नया खरीदार नहीं'
इस बीच क्रेमलिन के प्रवक्ता (Press Secretary) दिमित्री पेसकोव ने भी भारत का समर्थन करते हुए कहा कि रूस भारत के लिए एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है और भारत हमेशा से अन्य देशों से भी तेल खरीदता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यापारिक रिश्ते में कुछ भी 'नया' नहीं है, बल्कि यह एक सामान्य और लाभकारी प्रक्रिया है।
रूस के इन बयानों के बीच भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में देश की रणनीति साफ की। उन्होंने कहा कि, 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बाजार की स्थिति को देखते हुए अपने एनर्जी सोर्स में विविधता लाना हमारी रणनीति का अहम हिस्सा है।'
अमेरिका में जयशंकर की मौजूदगी
यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका में हैं और वहां के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। जयशंकर ने अमेरिका में इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
हालांकि जयशंकर अमेरिका के साथ खनिज सुरक्षा (Critical Minerals) और 'FORGE' पहल पर सहयोग बढ़ा रहे हैं, लेकिन रूस का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत ने 'ऑयल गेम' में अपने पुराने मित्र का साथ छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
ANI के इस सवाल के जवाब में कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
ऑब्जेक्टिव मार्केट की स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को ध्यान में रखते हुए अपने एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई करना इसे सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। भारत के सभी फैसले इसी बात को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और लिए जाएंगे।'












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