यूक्रेन के 'डर्टी बम' से बुरी तरह घबराया रूस, भारत को किया 'इमरजेंसी' फोन, सदियों के लिए बर्बाद होंगे शहर
डर्टी बम ऐसे हथियार को कहा जाता है जिसमें पारंपरिक विस्फोटकों के अलावा रेडियोधर्मी पदार्थ भी होते हैं और यह काफी खतरनाक माना जाता है।
रूस (Russia) का कहना है कि, यूक्रेन (Ukraine) मास्को के खिलाफ अपनी ही धरती पर डर्टी बम का इस्तेमाल कर सकता है। रूस ने अपनी चिंता भारत के साथ शेयर की है। रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू (Sergey Shoigu ) ने अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह से टेलीफोन पर बातचीत कर यूक्रेन की मंशा से अवगत कराया। जानकारी के मुताबिक डर्टी बम से ज्यादा लोगों की मौत होने के बजाय गंभीर बीमारियों हो सकती हैं। आजतक किसी भी देश ने डर्टी बम (Dirty Bomb) से हमला नहीं किया है।

रूस झूठ कह रहा है, यूक्रेन ने कहा
हालांकि,यूक्रेन ने रूस के इन दावों को खारिज कर दिया है। शोइगू ने कथित तौर पर रविवार को नाटो के रक्षा मंत्रियों के साथ इसी विषय पर कई फोन कॉल किए। वहीं, कीव समेत उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूस के इन आरोपों को खारिज कर दिया । पश्चिम देशों ने रूस के इस बयानबाजी को लेकर अलग तरह से सोचना शूरू कर दिया है। इन देशों का मानना है कि रूस युद्ध के दौरान यूक्रेन के खिलाफ ऐसा ही कोई बड़ा कदम न उठा ले।

इन देशों मे रूस के आरोपों को खारिज किया
फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की सरकारों ने कहा है कि वे सभी रूस के निराधीन आरोपों को खारिज करते हैं कि यूक्रेन अपनी ही जमीन पर डर्टी बम का इस्तेमाल क सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस युद्ध में जिस हर बुरी चीज़ की कल्पना की जा सकती है उसका स्रोत रूस ही है।

रूस ने डर्टी बम को लेकर राजनाथ से चर्चा की
नई दिल्ली में रूसी दूतावास ट्वीट कर बताया कि रूस रक्षा मंत्री ने डर्टी बम के संभावित उपयोग के बारे में रूस की चिंताओं पर राजनाथ से चर्चा की। इससे पहले सर्गेई शोइगू ने ब्रिटिश रक्षामंत्री बेन वालेस से कहा था कि वो 'यूक्रेन की तरफ से उकसावे की कार्रवाइयों को लेकर चिंतित हैं जिनमें डर्टी बम से हमला भी शामिल है। इसी प्रकार शोइगू ने अमेरिका, फ्रांस और तुर्की के रक्षामंत्रियों से बातचीत में भी इसी तरह की बात कही।

डर्टी बम किसे कहते हैं, क्यों दुनिया इससे डरती है?
Dirty Bomb को रेडियोलॉजिकल डिस्पर्सन डिवाइस कहा जाता है। ये एक तरह का बम ही होता जिसमें यूरेनियम जैस रेडियोधर्मी पदार्थ (Radioactive Material) होते हैं। ये बम विस्फोट के बाद वातावरण में फैल जाते हैं। इस तरह के बम में उन्नत रेडियोधर्मी पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी जगह इनमें अस्पतालों, परमाणु संयंत्रों शोध प्रयोगशाला से मिलने वाले रेडियोधर्मी पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है।

कम कीमत पर तैयार होता है डर्टी बम
इस तरह के बम को काफी कम कीमत पर तैयार किया जा सकता है और इसे किसी भी वाहन में रखकर धमाका कराया जा सकता है। इस बम धमाके के कुछ समय पश्चात रेडियोधर्मी संक्रमण से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। इस तरह के बम को बड़ी आबादी में फोड़कर अफरा-तफरी और डर का माहौल तैयार किया जा सकता है। आने वाले समय में इनके काफी खतरनाक परिणाम निकलकर सामने आते हैं। अगर अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेनहेटन इलाके में सिर्फ 9 ग्राम कोबाल्ट और 5 किलो टीएनटी के बम से विस्फोट कर दिया जाए तो ये पूरा इलाका कई दशकों तक के लिए वीरान हो जाएंगी। यह शहर रहने के लायक नहीं बचेगा।

डर्टी बम से बीमारियां पैदा होंगी
डर्टी बम से ज्यादा लोगों की मौत होने के बजाय गंभीर बीमारियों हो सकती हैं। इन बमों का मुख्य मकसद एनवायरनमेंट में रेडियोएक्टिव धुएं और धूल को फैलाकर लोगों में घबराहट, भ्रम और चिंता पैदा करना है। बता दें कि, आजतक किसी देश ने डर्टी बम से हमला नहीं किया है।












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