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बुरे फंसे गोटाबाया राजपक्षे! सिंगापुर में गिरफ्तारी की मांग, आपराधिक शिकायत दर्ज

बता दें कि, श्रीलंका में कथित दुर्व्यवहारों का दस्तावेजीकरण करने वाले एक अधिकार समूह ने सिंगापुर के अटॉर्नी-जनरल के पास एक आपराधिक शिकायत दर्ज की है।

सिंगापुर/कोलंबो, 25 जुलाई : राष्ट्रपति पद पर रहते हुए गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) श्रीलंका को घोर आर्थिक और राजनीतिक संकट में छोड़कर मालदीव से होते हुए सिंगापुर भाग गए थे। उन्होंने वहीं से अपना इस्तीफा ईमेल कर दिया था। हालांकि, उनकी परेशानी अब कम होने के बजाए बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। खबर है कि, गोटाबाया के खिलाफ सिंगापुर में एक आपराधिक शिकायत ( right group seeks Arrest Gotabaya files a criminal complaint) दर्ज कराई गई है। बता दें कि, श्रीलंका में कथित दुर्व्यवहारों का दस्तावेजीकरण करने वाले एक अधिकार समूह ने सिंगापुर के अटॉर्नी-जनरल के पास एक आपराधिक शिकायत दर्ज की है, जिसमें दक्षिण एशियाई राष्ट्र के दशकों पुराने गृहयुद्ध में उनकी भूमिका के लिए पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की गिरफ्तारी की मांग की गई है।

मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप

मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप

दरअसल, एक रिपोर्ट में न्यूज एजेंसी ने बताया है कि दक्षिण अफ्रीका के एक मानवाधिकार समूह ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की गिरफ्तारी की मांग करते हुए यह शिकायत दर्ज कराई है। दर्ज शिकायत में गोटाबाया के खिलाफ मानवाधिकारी उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध दशकों तक चले गृहयुद्ध में राजपक्षे की भूमिका को लेकर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की गई है।

राजपक्षे पर लगाए गए कई गंभीर आरोप

राजपक्षे पर लगाए गए कई गंभीर आरोप

रॉयटर्स के पास उपलब्ध शिकायत की एक प्रति के अनुसार, इंटरनेशनल ट्रुथ एंड जस्टिस प्रोजेक्ट (ITJP) ने कहा कि राजपक्षे ने 2009 में गृह युद्ध के दौरान जिनेवा कन्वेंशन का गंभीर उल्लंघन किया था, जब वह लंका के रक्षा प्रमुख थे। बता दें कि, 13 जुलाई को भागने के एक दिन बाद राजपक्षे ने सिंगापुर से अपना इस्तीफा सौंप ईमेल के जरिए भेज दिया था। इस विषय पर दक्षिण अफ्रीका स्थित आईटीजेपी ने तर्क दिया कि सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र के आधार पर कथित दुर्व्यवहार सिंगापुर में अभियोजन के अधीन हैं। गोटाबाया राजपक्षे देश को आर्थिक संकट में डालकर देश की जनता को राजनीतक संकट में डालकर सिंगापुर भाग लिए थे।

एलेक्जेंड्रा लिली कैथर ने क्या कहा, जानें

एलेक्जेंड्रा लिली कैथर ने क्या कहा, जानें

शिकायत का मसौदा तैयार करने वाले वकीलों में से एक एलेक्जेंड्रा लिली कैथर ने बर्लिन से कहा कि,गोटाबाया के खिलाफ जो आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है, वह दोनों अपराधों पर सत्यापन योग्य जानकारी पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, वे अभी सिंगापुर में हैं। उन्होंने आगे कहा कि, सिंगापुर के पास वास्तव में इस शिकायत के साथ, अपने स्वयं के कानून और अपनी नीति के साथ, सच बोलने का एक अनूठा अवसर है।

संकट टला नहीं है

संकट टला नहीं है

बता दें कि, श्रीलंका को राजनीतिक संकट में डालकर गोटाबाया राजपक्षे 13 जुलाई को श्रीलंका से सिंगापुर भाग गए थे। सिंगापुर जाने से पहले वे मालदीव भी रुके थे, हालांकि, वहां मचे जबर्दस्त हंगामें के बाद गोटाबाया वहां से सीधे सिंगापुर चले गए। वहां भी वे चैन से नहीं बैठ पा रहे हैं। सिंगापुर की सरकार ने कहा है कि, गोटाबाया को उन्होंने शरण नहीं दिया है, वे निजी यात्रा पर देश के भ्रमण पर आए हुए हैं।

श्रीलंका को पटरी पर लाना चुनौतीपूर्ण

श्रीलंका को पटरी पर लाना चुनौतीपूर्ण

वहीं, देश की स्थिति को सुधारने के लिए श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव कराए गए। रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, गोटबाया सरकार के करीबी और गृह मंत्री रहे दिनेश गुणेवर्दना को श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई। अब देखना है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और दिनेश गुणेवर्दना देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर ला पाने में सफल होते हैं अथवा नहीं। बाकी, देश की जनता आर्थिक संकट और घोर महंगाई से जूझ ही रही है। वहीं, राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ वहां जनता ने जमकर नारेबाजी की है।

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