Raghav Chadha Resigns: 2011 में केजरीवाल से मिले, 2012 में AAP में एंट्री, 2026 में कहा टा-टा, कैसा रहा सफर?
Raghav Chadha Resigns: भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के युवा और चर्चित नेता राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। करीब 14 साल तक AAP के साथ रहने के बाद अब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ अपनी नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने का ऐलान किया है। ऐसे में उनके AAP के समय के कार्यकाल पर डालेंगे एक नजर।
AAP के 'युवा चेहरे' का एक युग खत्म
राघव चड्ढा को AAP का 'युवा चेहरा' माना जाता था। उन्होंने पर्दे के पीछे रणनीति बनाने से लेकर एक मजबूत सांसद बनने तक लंबा सफर तय किया। राजनीतिक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि उनका पार्टी छोड़ना AAP के लिए बड़ा झटका है, जबकि BJP के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक जीत है, क्योंकि उन्हें एक तेज-तर्रार और समझदार युवा नेता मिल गया है।

2011 में अन्ना आदोलन में केजरीवाल और कुमार विश्वास से मिले
राघव चड्ढा की राजनीति में एंट्री 2011 के 'India Against Corruption' (IAC) आंदोलन से हुई थी। वह पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास के नेतृत्व वाले इस आंदोलन में एक युवा वॉलंटियर के रूप में जुड़े थे।
2012 में बनी आप AAP के फाउंडिंग मेंबर
2012 में जब यह आंदोलन एक राजनीतिक पार्टी में बदला, तो राघव चड्ढा AAP के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उसी साल अरविंद केजरीवाल ने उन्हें लोकपाल बिल का ड्राफ्ट तैयार करने समेत कई बड़ी जिम्मेदारियां दी थी, जिससे उनकी नीति-निर्माण में एंट्री हुई। राघव चढ्ढा का कद शुरुआती दिनों में ही इतना बड़ा था कि वह केजरीवाल और सिसोदिया जैसे बड़े नेताओं के की-कॉन्टेक्ट थे।

फाइनेंस और रणनीति के मास्टरमाइंड बने
चड्ढा जल्द ही पार्टी के लिए फाइनेंस और टेक्निकल मामलों में सबसे भरोसेमंद चेहरा बन गए। 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी के पहले मैनिफेस्टो को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें AAP ने 28 सीटें जीतकर शानदार शुरुआत की।
26 साल की उम्र में बने राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
2015 में, सिर्फ 26 साल की उम्र में, उन्हें AAP का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया। वे भारत की किसी भी राजनीतिक पार्टी के सबसे युवा ट्रेजरार में से एक रहे। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के कारण उन्होंने पार्टी को फंडिंग और टैक्स से जुड़े जटिल मामलों को संभालने में काफी मदद की। जब तक राघव के पास ये जिम्मेदारी रही, पार्टी को इस तरफ टेंशन नहीं लेना पड़ा।
पहली हार के बाद भी बढ़ता रहा कद
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें दक्षिण दिल्ली सीट से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उनकी रणनीतिक भूमिका पार्टी में बनी रही। 2020 में उन्होंने राजेंद्र नगर सीट 57% से ज्यादा वोटों के साथ जीती और बाद में दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी बने।
पंजाब जीत के 'शांत रणनीतिकार'
पंजाब में AAP की 2022 की ऐतिहासिक जीत के पीछे राघव चड्ढा का बड़ा हाथ माना जाता है। पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतीं। इस सफलता के बाद अप्रैल 2022 में वह पंजाब से राज्यसभा सांसद बने और सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए।
पार्टी के अंदर बढ़ने लगे मतभेद
हालांकि उनकी सफलता के बावजूद, पिछले कुछ सालों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा। पंजाब में जीत के बाद 'डबल पावर सेंटर' की बात सामने आई, जहां चड्ढा को चंडीगढ़ में हाईकमान का प्रतिनिधि माना जाता था। बाद में ये तनाव बढ़ा तो चढ्ढा ने पंजाब से दूरी बना ली।
भगवंत मान और केजरीवाल से टकराव
साल 2025 आते-आते राघव चढ्ढा की सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता और संसद में उनके भाषणों ने उन्हें पूरे भारत में एक युवा, लोकप्रिय और साफ-सुतरी इमेज वाले नेता की पहचान दिलाई। वे संसद में हमेशा जन सरोकार के मुद्दे उठाते जो अगले घंटे सोशल मीडिया की रील्स और अगले दिन अखबारों की हेडलाइन्स बनते।
लेकिन 2026 की शुरुआत में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से उनके राजनीतिक संबंध तीखे होते चले गए। इसेक बाद सीएम मान ने खुलकर चड्ढा की आलोचना की और उन पर समझौता करने के आरोप लगाए। इसके साथ ही, पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल के साथ भी उनके रिश्तों में दरार की खबरें सामने आईं।
फंड और रणनीति को लेकर बढ़ा विवाद
आंतरिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली और पंजाब के बीच फंड मैनेजमेंट को लेकर मतभेद थे। 2025 में कई बड़े फैसलों में चड्ढा को नजरअंदाज किया गया, जिससे तनाव और बढ़ गया। 2026 की शुरुआत में उन्हें कुछ संसदीय जिम्मेदारियों से हटाया जाना इस बात का संकेत था कि रिश्ते अब पूरी तरह बिगड़ चुके हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा ऐलान
24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसी दौरान उन्होंने बताया कि AAP के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने संविधान के प्रावधानों के तहत BJP में विलय का फैसला किया है।
14 साल का सफर खत्म, नई शुरुआत
अपने बयान में राघव चड्ढा ने कहा, "हमने फैसला किया है कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य भारतीय संविधान के तहत खुद को BJP में विलय करते हैं।" इस घोषणा के साथ उन्होंने AAP के साथ अपनी 14 साल पुरानी राजनीतिक यात्रा को खत्म कर दिया और एक नई शुरुआत की।इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












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