‘प्रचार युद्ध’ हार रहे पुतिन, यूक्रेन युद्ध नहीं’...ब्रिटिश विशेषज्ञों को आई अक्ल? कहा- मूर्ख बन रहा पश्चिम
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज में वरिष्ठ फेलो बिल रोगियो, जो एफडीडी के लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक भी हैं, उनका मानना है कि, रूस इस युद्ध को हार नहीं रहा है, बल्कि जमीन पर यूक्रेन ये जंग हार रहा है।
लंदन/कीव/मॉस्को, मार्च 19: यूक्रेन पर रूसी हमले का चौथा हफ्ता शुरू हो चुका है और युद्ध के चौथे हफ्ते में ब्रिटिश रक्षा विशेषज्ञों ने माना है कि, रूस भले ही 'इनफॉर्मेंशन वार' हार रहा हो, लेकिन युद्ध यूक्रेन हार रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के साथ ही पश्चिमी देशों की मीडिया ने रूस के खिलाफ जमकर 'निगेटिव रिपोर्टिंग' शुरू कर दी और यूक्रेन ने भी रूस के खिलाफ जमकर प्रोपेंगेंडा फैलाया, जबकि अमेरिका और पश्चिमी देशों के विशेषज्ञों ने लगातार दावे किए, कि रूस को भारी नुकसान हुआ है और पहले दिन से ही पश्चिमी विशेषज्ञ 10 दिनों मे रूस की हार का भविष्यवाणी कर रहे थे। लेकिन, अब विशेषज्ञों को अकल आती दिख रही है और कुछ विशेषज्ञों ने कहना शुरू किया है, कि यूक्रेन अब इस युद्ध को हार रहा है।
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‘सेना को पुनर्गठित कर रहा रूस’
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज में वरिष्ठ फेलो बिल रोगियो, जो एफडीडी के लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक भी हैं, उनका मानना है कि, रूस इस युद्ध को हार नहीं रहा है, बल्कि जमीन पर यूक्रेन ये जंग हार रहा है। उन्होंने अपने एक लेख में लिखा है कि, पिछले एक हफ्ते में यूक्रेन में रूस का हमला भले ही धीमा हो गया हो, लेकिन ‘थमी हुई ये लड़ाई' रूस द्वारा अपनी सेना को पुनर्गठित करने और अपने रसद में सुधार करने के लिए समय लेने का परिणाम हो सकता है। जबकि, इनफॉर्मेशन वार के तहत पश्चिमी देशों के कई रक्षा विशेषज्ञों और मीडिया ने लगातार दिखाया है कि, रूसी सेना को भीषण नुकसान हुआ है और भारी संख्या में रूसी टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपखाने और विमानें बर्बाद चुकी हैं और घरेलू विरोध की वजह से रूस एक और टूट की तरफ बढ़ रहा है।

‘यूक्रेनी नुकसान की रिपोर्टिंग नहीं’
बिल रोगियो ने कहा है कि, युद्धक्षेत्र में पश्चिमी देशों की मीडिया ने जो रिपोर्टिंग की है, उसमें रूस को हुए नुकसान को काफी बढ़ाकर दिखाया गया और कई तरह के वीडियो जारी किए गये, जबकि यूक्रेनी नुकसान पर बहुत कम रिपोर्टिंग की गई और फिर भी, युद्ध में तीन सप्ताह से अधिक हो चुके हैं, और व्लादिमीर पुतिन राष्ट्रपति बने हुए हैं और रूसी युद्ध मशीन ध्वस्त नहीं हुई है, बल्कि, वास्तव में अपनी गति लगातार एक तरह से जारी रखे हुए है। बिल रोगिया ने कहा कि, यूक्रेन ने निश्चित रूप से सोशल मीडिया और मीडिया में युद्ध जीत लिया हो, लेकिन यह औसत पश्चिमी दर्शक को यूक्रेन के पक्ष में एकतरफा जीत का आभास देता है। इसके अतिरिक्त, पेंटागन ने युद्ध पर दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने का अभूतपूर्व कदम उठाया है, भले ही खुद अमेरिका इस युद्ध में शामिल नहीं है। पेंटागन के आकलन अक्सर यूक्रेनी सरकार द्वारा दिए गए आकलनों के नजदीक होता है।

‘युद्ध पर पश्चिमी देश बन रहे मूर्ख’
बिल रोगियो का मानना है कि, पश्चिमी देशों की तरफ से जो ‘सूचना युद्ध' और ‘प्रोपेगेंडा' चलाया जा रहा है, वो निंदनीय नहीं है और ये रणनीति संघर्ष के दौरान मैनेजमेंट की भूमिका भी निभाती है, लेकिन पश्चिमी देशों को खुद अपने ही फैलाए गये प्रोपेगेंडा में फंसकर भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए, कि वो युद्ध जीत रहे हैं। रूस ने यह दिखाने के प्रयास में अपना अनाड़ी प्रोपेगेंडा अभियान चलाया है, कि उसके लोग पुतिन के तथाकथित 'विशेष सैन्य अभियान' को लेकर एकजुट हैं। रूस के लोगों को अपने पीछे खड़ा दिखाने के प्रयास में शुक्रवार को रूस ने एक विशाल रैली का आयोजन किया। जबकि, युद्ध का विरोध करने के लिए हजारों रूसियों को गिरफ्तार किया गया है। पुतिन ने अपने देश में असंतुष्टों के लिए सख्ततम चेतावनी भी जारी की है, उनकी तुलना gnats से की है और नए दमन का संकेत दिया है, जबकि विरोध को अवैध बनाने वाले कानून पारित किया गया है और प्रदर्शनकारियों को जुर्माना और यहां तक कि जेल की सजा भी देने की बात कही गई है।

नाटो से जेलेंस्की का टूटा दिल
बिल रोगियो ने कहा है कि, हर पक्ष अपनी सफलता की कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, लेकिन जेलेंस्की का हालिया बयान खुद इस बात के संकेत देते हैं, कि यूक्रेन युद्ध कहां पहुंचा है और नाटो की क्या भूमिका है। उन्होंने कहा कि, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंमस्की के हालिया बयान पुतिन की तरफ झुकने के हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि, 'यह स्पष्ट है कि यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है। हम इसे समझते हैं। वर्षों से हमने स्पष्ट रूप से नाटो के खुले दरवाजे के बारे में सुना है, लेकिन यह भी सुना है कि हम वहां प्रवेश नहीं कर सकते हैं और ये सत्य हैं और इन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।' यानि, जेलेंस्की का अब नाटो से मोह भंग हो चुका है, लेकिन अभी भी यह देखा जाना बाकी है, कि क्या वो रूस की ‘गुलामी' को चुनते हैं या नहीं?

अब यूक्रेन के पास ज्यादा दिन नहीं...
उन्होंने कहा कि, जमीनी हकीकत ये है कि, यूक्रेन के लोग अपने शहरों की रक्षा करने के लिए रूसियों का प्रतिरोध कर रहे हैं, लेकिन रूस को ये पता था, कि कीव पर कब्जा करने में और जेलेंस्की को गद्दी से उतारने में हमेशा से ही समय लगने वाला था और अब के समय में किसी भी देश पर कब्जा करने में त्वरित जीत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि, हमें याद रखना चाहिए कि 2003 में बगदाद को जीतने में अमेरिकी सेना को तीन सप्ताह और इराक पर विजय प्राप्त करने में 42 दिन लगे थे। जबकि, रूसी सेना अपने अमेरिकी समकक्ष की तुलना में बहुत कम कुशल है, और यूक्रेनियन बेहतरीन रक्षक हैं और सद्दाम हुसैन की सेना से काफी बेहत हैं और यूक्रेन को लगातार मदद मिल रही है।

यूक्रेन युद्ध में रूस के चार लक्ष्य
बिल रोगियो ने कहा कि, रूसी आक्रमण को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि, ये आक्रमण असल में कई मोर्चों पर किया गया है और इसके चार प्रमुख लक्ष्य हैं। पहला लक्ष्य राजधानी कीव पर कब्जा करना, दूसरा लक्ष्य यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव पर कब्जा करना, तीसरा बड़ा लक्ष्य पूर्वी यूक्रेन में डोनबास क्षेत्र पर कब्जा करना है और चौथा लक्ष्य आज़ोव समुद्र, जो मारियुपोल शहर में है, उसे यूक्रेन से अलग करना है। और कीव पर कब्जा करने के अलावा रूस अपने बाकी तीन लक्ष्यों को हासिल कर चुका है, जिसकी पुष्टि खुद यूक्रेनियन रक्षा मंत्रालय कर चुका है। यूक्रेन रक्षा मंत्रालय ने आज सुबह ही अपने एक ट्वीट में कहा है कि, आजोव सागर वाले बंदरगाह वाले शहर मारियुपोल अब रूसी नियंत्रण स्थापित हो गया है। लिहाजा, अब रूस के निशाने पर सिर्फ राजधानी कीव बची है और अगर पश्चिमी देश के रक्षा विशेषज्ञ इस बात को नजरअंदाज करते हैं, तो यह खुद से ‘मुर्ख' बनने वाली बात होगी।












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