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VIDEO: पाकिस्तान की आजादी वाले दिन PoK में क्यों फूटा गुस्सा? आसिम मुनीर को बताया ट्रंप का 'कुत्ता'

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) के रावलकोट में पाक आर्मी (Pak Army) के खिलाफ गुस्सा एक बार फिर उबाल पर है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) की पूर्व संध्या पर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) को खुलेआम अमेरिका का 'पेट डॉग' और 'ट्रंप की कठपुतली' बताते हुए विरोध किया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारी जोर-जोर से नारे लगा रहे हैं- अमेरिका ने कुत्ते पाले, वर्दी वाले-वर्दी वाले'। लोगों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों के मानवाधिकारों को कुचल रही है और पूरी तरह अमेरिकी इशारों पर नाच रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है।

protests against pakistan army

PoK में लंबे समय से पनप रहा गुस्सा
रावलकोट में यह विरोध केवल मौजूदा हालात का नतीजा नहीं, बल्कि PoK में लंबे समय से पनप रहे गुस्से का प्रतीक है। बीते वर्षों में मुजफ्फराबाद, कोटली और कई शहरों में भी लोगों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जमकर विरोध जताया, यहां तक कि कई बार सुरक्षाबलों को खदेड़ने और पीटने तक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।


PAK आर्मी के जनरल हेडक्वार्टर में विरोध-प्रदर्शन की धमकी
दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी बलूचिस्तान के अमीर मौलाना हिदायतुर रहमान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने छह महीने के भीतर उनकी 8 सूत्रीय मांगों पर अमल नहीं किया, तो वे पाकिस्तान आर्मी के जनरल हेडक्वार्टर (JHQ) रावलपिंडी तक विरोध मार्च करेंगे। मीडिया के मुताबिक उन्होंने यह ऐलान इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया।

बलूचिस्तान में लगाकार हो रहा अन्याय
हिदायतुर रहमान जो क्वेटा से इस्लामाबाद तक के विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा कि यह लंबा मार्च 25 जुलाई को शुरू हुआ था और इसका मकसद बलूचिस्तान में हो रहे अन्यायों के खिलाफ आवाज उठाना है। इसमें जबरन गायब किए गए लोगों की वापसी, कानून-व्यवस्था की खराब हालत, सुरक्षा चौकियों पर बदसलूकी, फ्रंटियर कॉर्प्स की असीमित मौजूदगी, सीमा बंदी और 'ट्रॉलर माफिया' के शिकंजे को खत्म करने जैसी मांगें शामिल हैं।

ग्वादर का डीप सी पोर्ट चालू नहीं करने देने की धमकी
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्वादर के लोगों को बिजली, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी गईं, तो ग्वादर का डीप सी पोर्ट पूरी तरह चालू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अगर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सरकार को हमारे शवों के ऊपर से गुजरना पड़ेगा।'

मार्च में राजनीतिक कैदियों की रिहाई, वीरान जगहों पर शव फेंकने की घटनाएं बंद करने और बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों व तटीय संपत्तियों पर वहां के लोगों का पूर्ण अधिकार देने की मांग भी शामिल है। रहमान ने कहा कि बलूचिस्तान असेंबली में पारित प्रस्तावों का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं है और सरकार लगातार जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रही है।

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