चूल्हे में गई देश की चिंता, घर जलने पर रोए श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे, गिना दिए अपने दस दर्द
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमिसंघे ने अपने भावनात्कम संदेश में कहा कि, मेरे पास एकमात्र ही घर था जो पूरी तरह जल गया है। मेरी सबसे बड़ी संपत्ति मेरा खजाना मेरी लाइब्रेरी थी, जो आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई।
कोलंबो, 12 जुलाई : श्रीलंका में घोर आर्थिक संकट के बीच राजनीतिक संकट (political crisis in sri lanka) भी उत्पन्न हो गया है। देश की जनता महंगाई और सरकार की गलत नीतियों से तंग आकर राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने आपात स्थिति से निपटने के लिए बैठक बुलाई थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इन सबके बीच देश के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के निजी आवास को नाराज प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इस पर पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने देश को भावनात्मक बयान दे दिया। उन्होंने पीएम के आधिकारिक आवास पर आग लगाए जाने की घटना पर अफसोस जताया है। हालांकि, उनके अफसोस में जनता का कही भी जिक्र नहीं है।

देश को छोड़ अपनी ही चिंता सता रही है पीएम को
देश जल रहा है इसकी चिंता किसी को नहीं है, जनता भूखी सो रही है इसकी फिक्र न तो पीएम को है और न ही राष्ट्रपति को। उन्हें तो बस अपनी फिक्र हो रही है। पीएम रानिल विक्रमसिंघे के आवास को प्रदर्शनकारियों ने जला दिया, इसके बाद पीएम का भावनात्मक संदेश आया। लेकिन उनके संदेश में सिर्फ लाइब्रेरी, घर का ही जिक्र था, देश की जनता और देश के हालात पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।

पीएम का भावनात्मक संदेश
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमिसंघे ने अपने भावनात्कम संदेश में कहा कि, मेरे पास एकमात्र ही घर था जो पूरी तरह जल गया है। मेरी सबसे बड़ी संपत्ति मेरा खजाना मेरी लाइब्रेरी थी, जो आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई। उन्होंने कहा कि, उनकी पूंजी के तौर पर लाइब्रेरी में 25,00 किताबें थी, जो प्रदर्शनकारियों की नाराजगी की बली चढ़ गई। उन्होंने आगे कहा कि उनके पास करीब 200 साल पुरानी पेंटिंग थीं,वह भी जल गईं, उन्होंने जैसे तैसे मात्र एक बहुमूल्य पेंटिंग को नष्ट होने से बचा पाए।

एक ही घर था, उसे भी जला दिया
एक भावनात्मक बयान में, श्रीलंका के प्रधान मंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने नाराज श्रीलंकाई लोगों द्वारा अपने निजी आवास में तोड़फोड़ और आग लगाने पर अफसोस जताया। देश उफान पर है क्योंकि अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और ईंधन की तीव्र कमी से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हो गई है।

अपनी इस्तीफे की बात कर चुके हैं रानिल विक्रमसिंघे
श्रीलंका में ताजा राजनीतिक हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इस्तीफा देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि एक सर्वदलीय सरकार बनाने के लिए वे पार्टी नेताओं की सबसे अच्छी सिफारिश को स्वीकार करते हैं। रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और सरकार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दावा किया जा रहा है कि जल्द ही श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे भी इस्तीफा दे सकते हैं। फिलहाल वे राष्ट्रपति भवन पर हुए प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद फरार हैं। विक्रमसिंघे को भी सुरक्षा कारणों से अज्ञात स्थान पर लेकर जाया गया है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक भी की थी।

परिवारवाद ने देश को बर्बाद कर दिया
परिवारवाद ने एक ऐसे राष्ट्र को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। अब देखना यह है कि श्रीलंकाई जनता इतना सब देखने-भोगने के बाद भी 'परिवारवाद' की जकड़न से मुक्त होती है या 'राजपक्षे' के बाद 'सिरिसेना' परिवार को रहनुमा बनाकर हमेशा के लिए राजनीतिक गुलाम रहना चाहती है? श्रीलंका का भविष्य उसकी जनता के रुख पर निर्भर है।

अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा श्रीलंका
1948 में स्वतंत्रता के बाद श्रीलंका अपने इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है। नागरिक सड़कों पर अराजक हो चुके हैं, राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है और प्रधानमंत्री के निजी निवास को आग के हवाले किया जा चुका है। इन सबके बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने 13 जुलाई को त्यागपत्र देने की घोषणा की है। फिलहाल वो किसी गुप्त स्थान पर चले गये हैं। श्रीलंका में फिलहाल सर्वदलीय सरकार बनाने की चर्चा चल रही है ताकि आगामी चुनाव तक सरकार के खिलाफ जनता के इस विद्रोह को थामकर रखा जाए।

श्रीलंका की जनता सरकार की नीति से नाराज
बता दें कि, श्रीलंका में हालात और ज्यादा बिगड़ गए है। 9 जुलाई को, प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में राष्ट्रपति आवास को घेर लिया था, जिसके बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे आवास छोड़कर कहीं दूसरे जगह चले गए थे। वहीं, देश की ताजा हालात की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पार्टी नेताओं की आपात बैठक बुलाई थी। वहीं, गाले फेस में विरोध मार्च में शामिल होने की कोशिश करने पर पूर्व मंत्री रजिता सेनेरथ को प्रदर्शनकारियों ने पीटा था।












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