अमेरिका से लौटते समय मिस्र की इस खास मस्जिद में जाएंगे PM Modi, भारत के इस मुसलमान समुदाय का है खास कनेक्शन
प्रधानमंत्री की मिस्र मस्जिद यात्रा भारत के दाऊदी बोहरा मुसलमानों को एक संदेश देती है
अमेरिका की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा से लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंचेगे। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के निमंत्रण पर पीएम मोदी उनके देश पहुंच रहे हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी की मिस्र की पहली यात्रा है।
अल-सीसी जब भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट बनकर आए थे तब उन्होंने पीएम मोदी को काहिरा आमंत्रित किया था।

याद रहे पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत और मिस्र के बीच रक्षा और सामरिक संबंध काफी मजबूत हुए हैं। भारत और मिस्र की सेनाओं ने इस साल जनवरी में पहला ज्वाइंट प्रैक्टिस की थी।
वहीं मिस्र की यात्रा के दौरान पीएम मोदी मिस्र की राजधानी काहिरा में स्थित लगभग 1,000 साल पुरानी इमारत इमाम अल-हकीम बी अम्र अल्लाह मस्जिद जाएंगे। जिसका पुनरूद्धार दाऊदी बोहरा समुदाय ने फंडिंग से किया गया है। मस्जिद को नवीनीकरण के बाद फिर से खोला गया, इस मज्जिद को पूरा होने में छह साल लग गए।
आपको बता दें पीएम मोदी की इस यात्रा का भारत के मुसलमानों के एक समुदाय के साथ एक विशेष संबंध है। इस समुदाय के प्रधानमंत्री के साथ कई वर्षों से पुराने और मधुर संबंध रहे हैं और मोदी उनके बड़े प्रशंसक भी हैं।
ये वो समुदाय दाऊदी बोहरा समुदाय है जिसकी तारीफ पीएम मोदी ने अक्सर की है। पीएम मोदी ने अक्सर गुजरात राज्य को अच्छी तरह से शासन करने में मदद करने और सच्चे देश भक्त के तौर पर शांतिप्रिय होने के लिए वोहरा मुसलमानों को धन्यवाद दिया है। पीएम मोदी जहां जा रहे हैं वो मस्जिद काहिरा में दाऊदी बोहरा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पौराणिक स्थल है।
दाऊदी बोहरा कौन हैं?
दाऊदी बोहरा फातिमी इस्माइली तैयबी विचारधारा के अनुयायी होते हैं। उनकी उत्पत्ति मिस्र में हुई उसके बाद में 11वीं शताब्दी में भारत में स्थापित करने से पहले यमन में स्थानांतरित हो गए। 1539 के बाद उस समय तक भारतीय समुदाय काफी बड़ा हो गया था, बोहरा संप्रदाय की सीट यमन से भारत के सिद्धपुर (गुजरात का पाटन जिला) में स्थानांतरित कर दी गई थी। अब भी बोहरा समुदाय से संबंधित सिद्धपुर में प्रतिष्ठित पैतृक हवेलियां हैं।
बोहरा समुदाय का पहनावा
इस समुदाय के पुरुष विशिष्ट सफेद कपड़े और सुनहरी टोपी पहनते हैं, जबकि महिलाएं रंगीन बुर्का पहनने के लिए जानी जाती हैं, न कि काले बुर्के को मुस्लिम महिलाओं के कुछ अन्य वर्गों द्वारा पहना जाता है।
भारत में लगभग 5 लाख बोहरा हैं
बोहराओं के दो प्रमुख समूह हैं जिसमें एक व्यापारी वर्ग शिया बहुल्य है और दूसरा बोहरा अल्पसंख्यक, जो मुख्य रूप से खेती किसानी करते हैं। अकेले भारत में लगभग 5 लाख बोहरा हैं, और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी लगभग इतनी ही संख्या में बोहरा हैं।
बोहरा का जानिए क्या अर्थ
बोहराओं का नाम गुजराती शब्द 'वाहौरौ' से लिया गया है, जिसका अर्थ है व्यापार करना होता है वोहरा समुदाय गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश, कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में है, वोहरा मुसलमानों का सूरत को आधार माना जाता है।
बोहरा मुसलमानों से है पीएम मोदी का गहरा नाता
देश का प्रधानमंत्री बनने से पहले से ही पीएम मोदी के दाऊदी बोहराओं के साथ गहरा संबध रहा है। साल 2011 में, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्हें दाऊदी बोहरा समुदाय के तत्कालीन धार्मिक प्रमुख सैयदना बुरहानुद्दीन का 100 वां जन्मदिन मनाने के लिए समुदाय को आमंत्रित किया था। इसके बाद 2014 में उनके निधन के बाद पीएम मोदी उनके बेटे और उत्तराधिकारी सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को सान्तवना देने मुंबई भी गए थे।
पीएम मोदी ने बोला था बोहरा मुस्लिम उनके परिवार का हिस्सा हैं
साल 2015 में पीएम मोदी ने बोहरा समुदाय के वर्तमान धार्मिक प्रमुख सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन से दोबारा मुलाकात की। इसके बाद मुंबई के मरोल में अलजामिया-तुस-सैफियाह (सैफ़ी अकादमी) के कैंपस का उद्घाटन करते हुए, पीएम ने समुदाय से कहा था कि वह उनके परिवार का हिस्सा हैं। वहीं 2016 में सैयदना ने पीएम से मुलाकात की और उन्होंने दाऊदी बोहरा धार्मिक प्रमुखों की चार पीढ़ियों के साथ अपने संबंधों को याद किया।
पीएम मोदी है बोहरा मुस्लिम के प्रशंसक
पीएम मोदी ने हमेशा बोहरा समुदाय के व्यावसायिक कौशल और सामाजिक सुधार के प्रयासों की प्रसंशा की। कुपोषण से लड़ने से लेकर पानी की कमी को दूर करने के संदर्भ में उनकी सामाजिक सेवा की तारीफ कर चुके हैं।












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