Pilot Rescue Operation Iran: लादेन को निपटाने वाली SEAL Team-6 ने कैसे बचाया पायलट को? 2 दिन कहां छुपा रहा?

Pilot Rescue Operation Iran: ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट F-15E को उस वक्त मार गिराया जिस वक्त वह ईरानी सीमा के भीतर एक ऑपरेशन को अंजाम देने पहुंचा था। इस घटना में एक पायलट सुरक्षित बच गया लेकिन दूसरा पायलट ईरान में ही फंस गया था, जिसे बाद में अमेरिकी फोर्सेस द्वारा बचाए जाने का दावा किया गया। हैरानी की बात ये है कि इस फंसे हुए पायलट को बचाने के लिए अमेरिकी ने उसी फोर्स सील टीम-6 को जिम्मेदारी दी जिसने कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान एक एबटाबाद में मार गिराया था। दरअसल, सील टीम-6 यूनिट का गठन करीब 50 साल पहले एक फेल मिशन के बाद हुआ था। उसके बाद से ही ये टीम एक के बाद एक सफल ऑपरेशन को अंजाम देती रही है। जिसकी फेहरिस्त काफी लंबी है। खास बात यह है कि इस यूनिट की जड़ें भी ईरान से ही जुड़ी हुई हैं। सील टीम 6 का गठन 1980 में हुए एक फेल मिशन के बाद हुआ था, जिसे ऑपरेशन ईगल क्लॉ कहा जाता है। उस समय अमेरिका ने तेहरान में बंधक बनाए गए अमेरिकी राजदूतों को छुड़ाने की कोशिश की थी, लेकिन मिशन के दौरान एक हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान की टक्कर हो गई, जिसमें 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। यह घटना अमेरिका के लिए बड़ा झटका थी और इसी के बाद एक ऐसी स्पेशल यूनिट बनाने का फैसला हुआ, जो भविष्य में ऐसे हाई-रिस्क मिशनों को किसी भी परिस्थिति में अंजाम दे सके।

कैसे बनी सबसे खास यूनिट सील टीम-6?

समय के साथ, सील टीम 6 अमेरिकी सेना की सबसे सीक्रेट और एडवांस यूनिट बन गई। अब इसका आधिकारिक नाम नेवल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप है। यह यूनिट खास तौर पर बंधक बचाव मिशन, एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन और दुश्मन के इलाके में गुप्त कार्रवाई करने में माहिर है। सील टीम 6 ने कई हाई-प्रोफाइल ऑपरेशनों में अहम भूमिका निभाई है, जैसे- 2011 में पाकिस्तान में Osama bin Laden को मार गिराने वाला मिशन और 2009 में सोमालिया में समुद्री डाकुओं से एक अमेरिकी कप्तान को छुड़ाने का ऑपरेशन। यह यूनिट जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) के तहत काम करती है और जमीन, हवा और समुद्र- तीनों ही जगह ऑपरेशन करने में सक्षम है।

Pilot Rescue Operation Iran

2 दिन तक कहा छिपा रहा एयरमैन?

हालिया मिशन की शुरुआत तब हुई जब एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया गया। इस हादसे के बाद स्पेशल फोर्सेस को ईरान के अंदर भेजा गया। हालांकि, एक पायलट को पहले ही बचा लिया गया था, लेकिन दूसरा क्रू मेंबर पहाड़ी इलाके में लापता हो गया था, जिसे ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी लोकेशन ट्रैक की, जिसके बाद ईरानी पहाड़ियों में उसके मिलने का पता चला। इसी बीच ईरानी फौज भी उसी रास्ते पर थी। जो बार-बार अमेरिकी रेस्क्यू टीम पर हमले कर रही थी। इन सब के बीच SEAL Team-6 ने पायलट तक पहुंच बनाई और उसे रेस्कयू कर लिया। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने अपनी जानकारी में बताया कि एक घायल वेपन सिस्टम ऑफिसर को ईरान के पहाड़ी इलाके से सुरक्षित निकाला गया, जहां वह करीब दो दिनों तक छिपा हुआ था। मिशन के दौरान अमेरिकी विमानों ने एयर कवर दिया। उन्होंने ईरानी काफिलों को रेस्क्यू एरिया से दूर रखने के लिए उन्हें निशाना बनाया, जिससे ऑपरेशन बिना रुकावट पूरा हो सका। यह पूरा मिशन बेहद सटीक प्लानिंग और टाइमिंग के साथ अंजाम दिया गया।

दोनों तरफ से आए दावे

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह मिशन उस जगह पर वापसी जैसा है, जहां से इस यूनिट की कहानी शुरू हुई थी। हालांकि, ऑपरेशन की पूरी डिटेल अभी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। जहां अमेरिका सैनिक को सुरक्षित बचाने का दावा कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह मिशन असफल रहा और उन्होंने कई अमेरिकी विमानों को नष्ट कर दिया। हालांकि, इन दोनों दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, जिससे स्थिति और भी रहस्यमयी बनी हुई है। जिसमें दोनों तरफ से सबूतों का इंतजार हो रहा है।

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