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Pahalgam Investigation: हमले के 2 महीने पहले पाकिस्तान ने खरीदे थे पहलगाम के सैटेलाइट इमेज, रिपोर्ट में खुलासा

Pahalgam Investigation: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के ठीक 2 महीने पहले फरवरी में अमेरिकी फर्म मैक्सर को पहलगाम और आसपास के इलाके के बहुत सारे ऑर्डर आने लगे। इसके बारे में द प्रिंट ने एक इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट पब्लिश की है। दरअसल अमेरिका की मैक्सर कंपनी दुनियाभर में हाई रिसोल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस बेचती है। स्पेस ये तस्वीरें इतनी साफ होती हैं कि नीचे खड़े व्यक्ति का चेहरा भी आप साफ देख सकें। इसमें एक तस्वीर की कीमत तीन लाख रुपए तक हो सकती है, साथ ही साथ ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कितनी हाई क्वालिटी में इमेज चाहते हैं, जितनी हाई क्वालिटी इमेज होगी दाम उतना ज्यादा होगा।

मार्च में भी मिले सैटेलाइट इमेज के ऑर्डर

फरवरी 2025, पहलगाम अटैक से दो महीने पहले अचानक से मैक्सर टेक्नोलॉजी को अचानक से एक के बाद एक कई ऑर्डर मिलने लगे और ये सिर्फ पहलगाम इलाके के लिए थे। ये सभी ऑर्डर अलग-अलग तारीखों में 12, 15, 18, 21 और 22 फरवरी को दिए गए जिनमें कुल 12 फोटो ऑर्डर किए गए। इसके बाद मार्च 2025 तक कोई ऑर्डर नहीं आया। इसके बाद सीधा 10 अप्रैल को एक और ऑर्डर मैक्सर को मिला। इसके अलावा पहलगाम हमले के बाद भी 24 और 29 अप्रैल को भी दो ऑर्डर आए। ये तब आए थे जब हमले के बाद टेररिस्ट की तलाश तेज थी। कुछ लोग ये भी कह सकते हैं कि पहले भी ऑर्डर आते रहे हैं, तो बता दें कि इससे पहले सिर्फ डेढ़ ऑर्डर ही हर महीने इस रीजन के लिए आते थे। लिहाजा कुछ तो गड़बड़ चल रही थी।

Pahalgam

कैसे पकड़ी गई गड़बड़?

मैक्सर ने एक नई कंपनी को अपना पार्टनर बनाकर ऑनबोर्ड किया, इस कंपनी का नाम था BSI (Business System International). BSI एक प्राइवेट कंपनी है जिसका हैडक्वार्टर कराची में है। इसके फाउंडर औबेदुल्लाह सैयद है। जो एक सजायाफ्ता मुजरिम भी रह चुका है। दरअसल सैयद क्योंकि वो चोरी से हाइपर्फॉर्मिंग सॉफ्टवेयर्स अमेरिका से एज्यूकेशन के नाम पर पाकिस्तान एटमिक एनर्जी कमीशन को भेज रहा था। पाकिस्तान की ये एजेंसी एक्सप्लोसिव और न्यूक्लियर पार्ट को टेस्ट करती थी और इसकी निगरानी में भी अहम किरदार निभाती है। लेकिन इस चोरी में उसकी एक गलती ने उसकी पोल खोल दी और उस पर मुकदमा हुआ। इस वजह से सैयद औबेदुल्लाह को 1 साल की सजा यूएस फेडेरल कोर्ट ने सुनाई थी।

मैक्सर पर उठे सवाल

क्या मैक्सर टेक्नोलॉजी ने BSI और सैयद औबेदुल्लाह को ऑन बोर्ड करते हुए उसकी जांच-पड़ताल तक करना जरूरी नहीं समझा। जबकि वह न्यूक्लियर जैसे सेंसटिव मामले में इन्फोर्मेशन चोरी करने के मामले में जेल गया था। वहीं जब द प्रिंट ने ये रिपोर्ट छापी तो मैक्सर ने कुछ ही देर में BSI को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। लेकिन तब तक द प्रिंट इसके स्क्रीन शॉट सबूत के तौर पर ले चुका था। यदि इसकी डिटेल इन्वेस्टिगेशन हो तो कई और ऐसे सबूत मिल सकते हैं।

भारतीय रक्षा मंत्रालय के साथ काम करती है मैक्सर

मैक्सर टेक्नोलॉजीस भारत में रक्षा मंत्रालय और इसरो जैसी कई सरकारी संस्थाओं के साथ काम करती है। कम से कम ग्यारह भारतीय अंतरिक्ष तकनीक स्टार्टअप और कंपनियां भी मैक्सर टेक्नोलॉजीज़ से जुड़ी हुई हैं। ISRO के एक वैज्ञानिक ने बताया कि सैटेलाइट सर्विलांस आज इंटेलिजेंस की रीढ़ बन चुका है। अगर ये इमेज गलत हाथों में गईं, तो नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल है। लेफ्टिनेंट जनरल A.K. भट्ट जो कि रिटायर्ड होने के बाद इंडियन स्पेस एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल हैं, उन्होंने भी चेतावनी दी कि इन इमेजेस का कमर्शियली अवेलेबल होना अब एक बड़ा खतरा है। कुल मिलाकर ये एक नए तरीके का आतंकी हमला था, जिसमें टेक्नोलॉजी के दम पर पुख्ता इनपुट जुटाए गए, जिसमें पाकिस्तानी सरकार और आर्मी दोनों शामिल थे इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को भी ऐसी कंपनियों पर सख्त निगरानी रखने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे खतरों को टाला जा सके।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।

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