Taxila excavation: पाकिस्तान की धरती ने उगला भारत का गौरव, तक्षशिला में मिला सम्राट कनिष्क के दौर का खजाना
Pakistan Taxila excavation news 2026: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय नगरी तक्षशिला में पुरातत्व विभाग की खुदाई के दौरान भारत के कुषाण कालीन इतिहास के अवशेष मिले हैं। करीब 2000 साल पुराने इस खजाने ने यह साबित कर दिया है कि सम्राट कनिष्क के शासनकाल में तक्षशिला ज्ञान और वैभव का सबसे बड़ा केंद्र था।
खुदाई में तांबे के सिक्के, प्राचीन बौद्ध मूर्तियां और उस दौर के बेशकीमती बर्तन मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज न केवल दक्षिण एशिया के इतिहास को नया मोड़ देगी, बल्कि प्राचीन भारत के भौगोलिक विस्तार और सांस्कृतिक प्रभाव की भी पुष्टि करती है।

तक्षशिला: प्राचीन भारत का 'नॉलेज हब'
तक्षशिला कभी प्राचीन भारत का सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा और व्यापारिक केंद्र था। हालिया खुदाई में कुषाण काल (1ली से 3वीं शताब्दी) के जो अवशेष मिले हैं, वे उस समय की बेमिसाल वास्तुकला को दर्शाते हैं। खुदाई के दौरान पत्थरों की ऐसी दीवारें और कमरे मिले हैं, जो संभवतः बौद्ध भिक्षुओं के निवास स्थान या प्राचीन पुस्तकालय का हिस्सा रहे होंगे। यह खोज दिखाती है कि कैसे 2000 साल पहले भारत का प्रभाव मध्य एशिया तक फैला हुआ था।
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कुषाण काल के बेशकीमती सिक्के और कलाकृतियां
पुरातत्वविदों को खुदाई स्थल से बड़ी संख्या में कुषाण काल के तांबे के सिक्के मिले हैं। इन सिक्कों पर तत्कालीन राजाओं और धार्मिक प्रतीकों के चित्र अंकित हैं। इसके अलावा, गांधार कला शैली में बनी बुद्ध की खंडित मूर्तियां भी मिली हैं। इन कलाकृतियों का मिलना यह दर्शाता है कि कुषाण वंश के दौरान तक्षशिला में कला और धर्म का अद्भुत संगम था।
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Taxila excavation: पाकिस्तान में दबे भारतीय इतिहास के सबूत
हालांकि तक्षशिला अब पाकिस्तान के भौगोलिक क्षेत्र में आता है, लेकिन इसका हर पत्थर भारत के प्राचीन स्वर्णिम युग की गवाही देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थल मौर्य काल से लेकर कुषाण काल तक भारत के सांस्कृतिक मानचित्र का हृदय स्थल था। खुदाई में मिली सामग्रियों की कार्बन डेटिंग से यह साफ हो गया है कि ये 2000 साल से भी अधिक पुराने हैं और कुषाण साम्राज्य की समृद्धि की ओर इशारा करते हैं।
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World News Hindi: दुनिया भर के इतिहासकारों में उत्साह
तक्षशिला की इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय इतिहासकारों को भी उत्साहित कर दिया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस स्थल पर मिली नई जानकारियां प्राचीन रेशम मार्ग (Silk Route) के व्यापारिक संबंधों को समझने में मदद करेंगी। यह खोज बताती है कि कैसे भारत का ज्ञान और व्यापारिक संबंध उस समय की वैश्विक शक्तियों के साथ जुड़े हुए थे।












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