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Pakistan: बिक रही है पाक आर्मी की कंपनी, दूसरे देश ने लगाई बोली, जनता को चूना लगाने का मुनीर का मास्टर प्लान

Pakistan इस समय गंभीर कर्ज संकट से जूझ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि अब वह आर्मी द्वारा चलाई जाने वाले कई अरब डॉलर कंपनी फौजी फाउंडेशन में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को करीब 1 बिलियन डॉलर की हिस्सेदारी देने जा रहा है। इसके साथ ही अबू धाबी से मिलने वाले 2 बिलियन डॉलर के पुराने कर्ज का रोलओवर भी होने की उम्मीद है, जिससे पाकिस्तान को कुछ पल के लिए राहत मिल सकती है। लेकिन ये पाकिस्तानी आर्मी की कंपनी की बिकने की शुरुआत है।

कर्ज खत्म लेकिन कंपनी में हिस्सेदारी

27 दिसंबर को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने इस खबर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यूएई फौजी फाउंडेशन ग्रुप में "कुछ शेयर" खरीदेगा। इससे पाकिस्तान पर मौजूद करीब 1 बिलियन डॉलर की देनदारी, जिसकी समय सीमा 31 मार्च थी, अब इक्विटी में बदल जाएगी और कर्ज खत्म माना जाएगा।

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कर्ज को शेयर में बदलने की योजना

विदेश मंत्रालय में साल के अंत की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इशाक डार ने कहा,
"हम कुछ हफ्ते पहले यूएई के साथ 1 बिलियन डॉलर के रोलओवर पर बातचीत कर रहे थे। वे कुछ शेयर खरीदेंगे और हमारी देनदारी समाप्त हो जाएगी।" उन्होंने साफ किया कि यह सौदा फौजी फाउंडेशन ग्रुप से जुड़ा है और समिति की कई बैठकों के बाद इस पर सहमति बनी है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि यह पूरा लेनदेन 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा।

एक मिलियन का कर्ज उतारकर दो मिलियन लेने की तैयारी

डार के मुताबिक, कर्ज को इक्विटी में बदलने से पाकिस्तान के खातों से 1 बिलियन डॉलर की देनदारी हट जाएगी, जिससे तुरंत भुगतान का दबाव कम होगा। इसके अलावा यूएई से मिलने वाले 2 बिलियन डॉलर के अन्य कर्ज का रोलओवर भी किया जाएगा। हालांकि इससे देश के कुल कर्ज में बड़ी कटौती नहीं होगी, लेकिन फिलहाल सांस लेने की थोड़ी जगह जरूर मिलेगी।

पाकिस्तान पर कितना है कुल कर्ज?

जून 2025 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार,• पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज: 91.8 बिलियन डॉलर

• कुल सार्वजनिक कर्ज: लगभग 286.8 बिलियन डॉलर
• आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 410 बिलियन डॉलर है

ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि देश कितने गहरे वित्तीय तनाव में है।

IMF के दबाव में सरकार

पाकिस्तानी सरकार पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के चल रहे बेलआउट प्रोग्राम की शर्तों को पूरा करने का भारी दबाव है। सरकार को चालू खाता घाटा नियंत्रित करना और सख्त वित्तीय अनुशासन दिखाना जरूरी है। अपनी तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान ने पिछले दो सालों में द्विपक्षीय साझेदारों से करीब 12 बिलियन डॉलर जुटाए हैं।

'भीख का कटोरा' बयान फिर चर्चा में

इशाक डार ने इस मुद्दे पर कड़ा बयान देते हुए कहा,- "मैंने पहले ही कहा था कि अगर पाकिस्तान ने IMF प्रोग्राम पर सही तरीके से काम किया होता, तो उसे 12 बिलियन डॉलर के लिए भीख का कटोरा लेकर नहीं घूमना पड़ता।" उन्होंने यह भी माना कि देश अपने खाते संतुलित नहीं कर पाया और IMF भी पूरी तरह साथ नहीं आया। डार ने UAE की मदद के लिए उसका आभार भी जताया।

सऊदी अरब, चीन और UAE की मदद

डार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में,
• सऊदी अरब ने 5 बिलियन डॉलर
• चीन ने राज्य-से-राज्य जमा के जरिए 4 बिलियन डॉलर
• UAE ने 3 बिलियन डॉलर
की वित्तीय सहायता पाकिस्तान को दी है। इससे साफ है कि आर्थिक संकट के समय UAE पाकिस्तान के सबसे अहम सहयोगियों में से एक रहा है।

PIA के निजीकरण के बाद आया फैसला

फौजी फाउंडेशन के शेयर बेचने की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का निजीकरण पूरा किया गया। यह IMF की शर्तों के तहत लंबे समय से लंबित सुधार था।

PIA की बिक्री, लेकिन कर्ज जस का तस

PIA को 482 मिलियन डॉलर में बेचा गया, लेकिन सरकार ने 2.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा की पुरानी देनदारियों को एक अलग इकाई में ट्रांसफर कर दिया। इससे एयरलाइन का ऑपरेशनल बोझ तो कम हुआ, लेकिन कुल राष्ट्रीय कर्ज पर इसका असर बेहद सीमित रहा।

शहबाज शरीफ और UAE राष्ट्रपति की मुलाकात

UAE के कर्ज रोलओवर का फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की बैठक के बाद सामने आया। अमीराती राष्ट्रपति इसी साल दूसरी बार पाकिस्तान दौरे पर आए थे।

IMF पर पाकिस्तान की पुरानी निर्भरता

पाकिस्तान का IMF पर निर्भर रहने का इतिहास बहुत पुराना है।

• 1958 से अब तक पाकिस्तान 23 IMF कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुका है
• देश बार-बार आर्थिक संकट और बाहरी बेलआउट के चक्र में फंसता रहा है

मौजूदा IMF पैकेज क्या हैं?

फिलहाल पाकिस्तान को IMF की दो बड़ी सुविधाओं से समर्थन मिल रहा है:
• 7 बिलियन डॉलर की Extended Fund Facility (EFF)
• करीब 1.3 बिलियन डॉलर की Resilience and Sustainability Facility (RSF)

चीन की बड़ी भूमिका

IMF के अलावा, पाकिस्तान पिछले दो दशकों से चीन की वित्तीय मदद पर भी काफी निर्भर रहा है। AidData के मुताबिक,
• 1999 से 2023 के बीच चीन ने पाकिस्तान को 75.62 बिलियन डॉलर
• इसमें से करीब 26 बिलियन डॉलर सामान्य बजटीय समर्थन के रूप में दिए गए

लगातार झटकों से कमजोर हुई अर्थव्यवस्था

2022 से लेकर अब तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने कई झटके झेले हैं। इनमें
• तेज महंगाई
• गंभीर नकदी संकट
• प्राकृतिक आपदाएं
• कोविड-19 के लंबे आर्थिक असर
शामिल हैं। इन सभी वजहों से 2019 से 2022 के बीच देश एक लंबी आर्थिक मंदी में चला गया।

ग्रोथ बेहद कमजोर

IMF के आंकड़ों के अनुसार,
• 2023 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 0.2% सिकुड़ी
• 2025 वित्त वर्ष के लिए IMF ने सिर्फ 2.7% ग्रोथ का अनुमान लगाया है
यह दिखाता है कि बढ़ते कर्ज और बाहरी मदद पर निर्भरता के बीच पाकिस्तान की आर्थिक हालत अभी भी बेहद कमजोर बनी हुई है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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