Pakistan News: 'देश भीख का कटोरा लेकर घूमेगा', पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने क्यों कहा ऐसा?
Pakistan PM Shehbaz Sharif News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने देश की वित्तीय समस्याओं को स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लिया है, जो उनके देश की आर्थिक हकीकत को साफ-तौर पर उजागर करता है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब करीबी सहयोगी भी यह उम्मीद नहीं करते कि इस्लामाबाद दुनिया भर में भीख का कटोरा लेकर घूमेगा। भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच शरीफ ने कहा कि वह और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल असीम मुनीर अब आर्थिक निर्भरता का बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं हैं।
अशांत बलूचिस्तान की प्रांतीय राजधानी क्वेटा में 31 मई को पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों को संबोधित करते हुए शरीफ ने यह बातें कहीं। शरीफ ने कहा कि अब हमारे दोस्त देश हमसे कारोबार, निवेश और तकनीकी सहयोग की उम्मीद करते हैं, न कि भीख मांगने की।

उन्होंने चीन को 'समय की कसौटी पर खरा' दोस्त बताया, और सऊदी अरब, तुर्की, कतर तथा यूएई को 'भरोसेमंद सहयोगी' कहा। लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि पाकिस्तान को अब आत्मनिर्भर बनना होगा, और वह तथा सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अब इस आर्थिक बोझ को और नहीं उठाना चाहते।
पाकिस्तान को फिर मिला IMF से बेलआउट
जैसे ही पाकिस्तान के पास नकदी खत्म होने की नौबत आई, उसे IMF से 1 बिलियन डॉलर का नया बेलआउट मिला। ये उस 7 बिलियन डॉलर के पैकेज का हिस्सा है जो सितंबर 2024 में मंज़ूर हुआ था। भारत ने IMF के इस कदम का विरोध किया, तर्क देते हुए कि पाकिस्तान अब भी आतंकवाद का समर्थन करता है। बावजूद इसके, IMF ने मदद देने का निर्णय पूर्व समझौते के आधार पर बताया।
भारत-पाक तनाव और ऑपरेशन सिंदूर
शहबाज शरीफ का ये बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई, जिसके जवाब में भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया।
भारत ने POK और पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। जवाब में पाकिस्तान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले करने की कोशिश की, लेकिन भारत की S-400 वायु रक्षा प्रणाली ने उन्हें नाकाम कर दिया। इसके बाद भारत ने 11 पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।
अब क्या आगे होगा?
पाकिस्तान की सरकार मान रही है कि अब सिर्फ हथियारों और रणनीतिक रिश्तों से बात नहीं चलेगी। आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय भरोसे के बिना पाकिस्तान को भविष्य में अकेले ही लड़ना पड़ेगा। और शायद यही वजह है कि अब खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यह मानने को मजबूर हैं कि 'भीख' का दौर खत्म करना होगा।












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