'सरफरोशी की तमन्ना' के नारों से गूंजा PoK, भारत से मांगी मदद, आर्मी के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग- Video

PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में इस समय सीन बहुत ज्यादा गंभीर हो चुका है। वहां की लोकल जनता का गुस्सा अब सीधे पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ा क्राइसिस बन गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पब्लिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ चल रहा यह प्रोटेस्ट अब अपने फाइनल राउंड में है। रावलाकोट की सड़कों पर जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का आइकॉनिक नारा 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' गाया, तो इसलामाबाद तक घबराहट महसूस की गई।

इस पूरे आंदोलन को जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लीड कर रही है। पिछले 28 दिनों से बिना रुके धरने पर बैठी जनता ने शहबाज शरीफ की सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है: अगर 8 जुलाई 2026 तक उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो 9 जुलाई से पूरे इलााके में ऐसी बगावत शुरू होगी जिसे संभालना मुश्किल होगा।

PoK Protest

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर चलाईं गोलियां

इस पूरे बवाल की सबसे बड़ी वजह है पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स का टॉक्सिक और हिंसक बर्ताव। डडयाल इलाके में जब निहत्थे और मासूम लोग बुनियादी मानवाधिकारों और आटे-बिजली जैसी बेसिक चीजों पर राहत माग रहे थे, तब पाकिस्तानी रेंजर्स ने अचानक उन पर अंधाधुंध गोलिया चला दीं। सरकार के इशारे पर हुई इस बर्बरता में 1 निर्दोष नागरिक की जान चली गई, जबकि 14 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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पाकिस्तानी डिफेंस फोर्सेज ने सोचा था कि इस खूनी दमन से लोग डर जाएंगे, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। जनता का गुस्सा दोगुना हो गया और कोटली, बाग और रावलाकोट जैसे संवेदनशील इलाकों में हड़ताल और मैसिव रैलियां शुरू हो गईं। इस बार का सबसे बड़ा 'प्लॉट ट्विस्ट' यह है कि रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर हजारों महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर फ्रंटलाइन पर जंग लड़ रही हैं।

मुनीर की फौज ने बंद करवाए फोन के सिग्नल

ग्लोबल स्टेज पर अपनी थू-थू होने के डर से और प्रदर्शनकारियों का कम्यूनिकेशन नेटवर्क तोड़ने के लिए, पीएम शहबाज शरीफ की सरकार ने PoJK में सख्त डिजिटल सेंसरशिप लगा दी है। पूरे इलाके में 5 जून 2026 से ही इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप है। लेकिन इंटरनेट बंद होने के बाद भी अवाम का हौसला कम नहीं हुआ। सरकार और सेना के कड़े पहरे को धता बताते हुए हजारों लोग 9 जून से रावलाकोट के सबसे बड़े ईदगाह मैदान में डेरा डाले हुए हैं।

JAAC के सीनियर लीडर सरदार इम्तियाज आलम ने साफ चेतावनी दी है कि 9 जुलाई से शुरू होने वाला अगला दौर जनरल मुनीर की खुफिया एजेंसी ISI और शहबाज सरकार की कट्रोलिंग कैपेसिटी से बिल्कुल बाहर होने वाला है। बात सिर्फ इंटरनेट तक नहीं रुकी बल्कि पाकिस्तानी सेना अब अमानवीय नाकेबंदी पर उतर आई है। पूरे प्रभावित क्षेत्र में राशन, गेहूं का आटा और जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई जबरन रोक दी गई है। JAAC के एक्टिविस्ट सरदार अमन ने एक वीडियो मैसेज के जरिए पाकिस्तानी फौज द्वारा पैदा किए गए इस खतरनाक आर्थिक और मानवीय संकट को दुनिया के सामने एक्सपोज कर दिया है।

भारत से मांगी मदद

राशन और दवाओं की कृत्रिम किल्लत के कारण जब लोग भूखे मरने की कगार पर पहुंच गए, तो उनका सब्र पूरी तरह टूट गया। इस बेहद नाजुक मोड़ पर आंदोलनकारी नेताओं ने भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर के आम नागरिकों से तुरंत मानवीय सहायता भेजने की एक बेहद इमोशनल अपील की है। उन्होंने भारत से इस संकट में तुरंत रक्षात्मक और नैतिक दखल देने को कहा है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने इसलामाबाद को खुली चुनौती दी है कि अगर उनके जीने के लिए जरूरी चीजों पर लगी पाबंदी तुरंत नहीं हटाई गई, तो वे चुपचाप बैठकर मौत का इंतजार नहीं करेंगे। कोई और रास्ता न बचने पर वहां की पूरी जनता LoC को तोड़कर भारत की सीमा में दाखिल होने के लिए मजबूर हो जाएगी।

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PoJK की वादियों में भारतीय इंकलाबी तराने गूंजना इस बात का सबूत है कि वहां के लोग अब पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा को पूरी तरह रिजेक्ट कर चुके हैं। आटे और बिजली के बिल से शुरू हुआ यह प्रोटेस्ट अब अस्मिता और पूरी आजादी (Liberation) का आन्दोलन बन चुका है। मुनीर और शहबाज के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं-या तो जनता के सामने सरेंडर करें या फिर एक बहुत बड़ी इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक हार झेलने के लिए तैयार रहें।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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