87% आबादी मुस्लिम, फिर भी गरुड़ है राष्ट्रीय प्रतीक, जिस Indonesia जा रहे PM Modi जानें वहां के रोचक फैक्ट्स
Facts About Indonesia: अगर आप से पूछा जाए कि दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश तो शायद आप किसी अरब देश नाम लेंगे। लेकिन कम ही लोग होंगे जिन्हें ये पता होगा कि इंडोनेशिया इस दुनिया में सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। अब इसी देश की यात्रा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जा रहे हैं। ऐसे में जानते हैं कि इंडोनेशिया का कल्चर क्या है और वहां हिन्दुओं के साथ हिन्दुत्व का कितना असर है।
इंडोनेशिया में लगभग 87 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म को मानते हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज भी इस देश की संस्कृति, परंपराओं, भाषा, ऐतिहासिक इमारतों और राष्ट्रीय प्रतीकों में हिन्दू कल्चर की काफी बड़ी झलक दिखाई देती है। भले ही यहां की धार्मिक पहचान बदल गई हो लेकिन सदियों पुरानी सभ्यता और मंदिर आज भी जीवित हैं।

इंडोनेशिया में कैसे पहुंचे हिन्दू और हिन्दू धर्म?
इंडोनेशिया के इतिहास की किताबों के पन्नों को पलटे तो पता चलता है कि पहली शताब्दी में भारत के व्यापारी, दार्शनिक, जहाजी और बौद्धिक लोग इंडोनेशिया जाने लगे थे। जाहिर से बात है कि उनके साथ संस्कृत भाषा, कल्चर और हिन्दू धर्म भी पहुंचा। फिर वक्त के साथ धीरे-धीरे कुताई, तारुमनगरा, मातरम, केदिरी, सिंगसारी और माजपहित जैसे साम्राज्यों में ये धर्म फैलता चला गया। बाद में, बाली और सुमात्रा जैसे एम्पायरों ने कल और साहित्य को जब बढ़ावा दिया तो हिन्दू धर्म को और बल मिला।
मजापहित- हिन्दुओं के विकास का दौर
साल 1293 से 1527 तक इंडोनेशिया में मजापहित एम्पायर था। इस दौरान हुए राजाओं ने इंडोनेशिया के बड़े इलाकों को एकजुट किया था। बाद में इसी दौर में हिन्दू-बौद्ध कल्चर, साहित्य, मंदिरों का निर्माण और शासन चलाने की व्यवस्था बनाए गई। अगर आज भी इंडोनेशिया की हिन्दू संस्कृति को करीब से देखना है तो बाली जाना चाहिए। यहां कि 87 प्रतिशत आबादी आज भी हिन्दू धर्म को मानती है, जिसे वे बालीनेस हिन्दूइज्म (Balinese Hinduism) कहते हैं। इसमें वे पारंपरिक पूजा के अलावा पूर्वजों की भी पूजा-पाठ करते हैं।
यहां भी पढ़ाई जाती है रामायण और महाभारत
मुस्लिम बाहुल्य देश होने के बावजूद यहां रामायण और महाभारत की कहांनिया लोगों के बीच सुनाई जाती है। यहां कठपुतली जैसा नाटक वायंग कुलित इन्हीं महाकाव्यों से लिया गया है। जिसे यूनेस्को ने Intangible Cultural Heritage के खिताब से नवाजा है। रामायण से राम, सीता, हनुमान और महाभारत से अर्जुन, भीम और कृष्ण जैसे पात्र हर कोई जानता है। इसके साथ ही प्रम्बानन मंदिर के नजदीक होने वाला रामायण बैले देश के सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक है।
एयरलाइन का नाम भी हिन्दू धर्म से जुड़ा
इंडोनेशिया की कई धरोहरों और प्रतीकों में हिन्दू धर्म की झलक दिखाई पड़ती है। यहां की नेशनल एयरलाइन का नाम भी गरुड़ एयरलाइन है जो भगवान विष्णु के वाहन के नाम पर रखा गया है। साथ ही यहां के राष्ट्रीय चिन्ह का नाम गरुड़ पंचशील है जबकि यहां ध्येय वाक्य 'भिन्नेका तुंग्गल ईका' (विविधता में एकता) 14वीं सदी के काकाविन सुतसोमा नाम के ग्रंथ से लिया गया है, जिसे हिन्दू काल में लिखा गया था।
प्रम्बानन मंदिर- हिन्दुओं का सबसे बड़ा तीर्थ
सेंटर जावा में बना प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है। भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु के इस मंदिर को 9वीं सदी में बनवाया गया था। इस मंदिर की वास्तुकला और नक्काशी पूरी दुनिया में फेमस है। इसीलिए इसे UNESCO World Heritage Site का दर्जा भी दिया गया है।
भाषा में घुली है संस्कृत
इंडोनेशिया की भाषा में आज भी संस्कृत का असर काफी दिखता है। बहासा (Bahasa), नेगारा (Negara), राजा (Raja), पुत्र (Putra), पुत्री (Putri), आगामा (Agama) और पुस्तका (Pustaka) जैसे कई सामान्य शब्द संस्कृत भाषा से लिए गए हैं। यहां तक कि जो लोग मुस्लिम या क्रिश्चियन हैं उनके नामों में भी संस्कृत की झलक आसानी से दिख जाएगी।
यहां के कल्चर में बसा हुआ है हिन्दू धर्म
इंडोनेशिया इस बात का सबसे नायाब उदाहण है कि कल्चर और सिविलाइजेशन किसी एक धर्म या समाज तक सीमित नहीं है। इस्लाम प्रधान होते हुए भी हिन्दुत्व कैसे इंडोनेशिया की आत्मा है ये आपको तभी पता चलेगा जब आप इंडोनेशिया की जमीन पर कदम रखेंगे। मुस्लिम देश होते हुए भी वहां कट्टरपंथ की जगह खुले विचार समाज में अच्छी पकड़ बनाए हुए हैं।
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