Pakistan HIV Outbreak: इलाज कराने गए, HIV लेकर लौटे! पाकिस्तान में 78 बच्चों की जिंदगी से बड़ा खिलवाड़
Pakistan HIV Outbreak: पाकिस्तान के कराची शहर से एक बेहद दर्दनाक, शर्मनाक और डराने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आए कई मासूम बच्चे एचआईवी (HIV) से संक्रमित पाए गए हैं। सिंध प्रांत के मंत्री सईद गनी ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि SITE इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कुलसुम बाई वलीका अस्पताल में अब तक कम से कम 78 बच्चों में HIV संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस खुलासे के बाद पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले की गंभीर जांच शुरू कर दी गई है।
कौन सा अस्पताल है विवाद के केंद्र में?
यह मामला कुलसुम बाई वलीका अस्पताल का है, जिसे सिंध कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा संस्थान (SESSI) के तहत श्रम विभाग चलाता है। इतने बड़े स्तर पर बच्चों के संक्रमित होने की खबर सामने आने के बाद सिंध हाई कोर्ट ने प्रांत की सरकार से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

कब सामने आया मामला और क्या हुई कार्रवाई?
सिंध के श्रम मंत्री सईद गनी ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2025 में विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके लगभग एक महीने बाद यानी अक्टूबर 2025 के आखिर में अस्पताल में बच्चों के HIV संक्रमित होने का मामला सामने आया। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 29 अक्टूबर 2025 को पहली जांच समिति बनाई। इस समिति की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के कई डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद 7 नवंबर 2025 को प्रांतीय लोकपाल के आदेश पर दूसरी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति भी गठित की गई ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
सरकार ने क्या कहा?
सईद गनी ने कहा कि केवल कर्मचारियों को निलंबित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच में डॉक्टरों, नर्सों या अन्य मेडिकल स्टाफ की लापरवाही साबित होती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा और किसी भी दोषी को उसके प्रभाव या पद के कारण बचाया नहीं जाएगा।
संक्रमित बच्चों की संख्या को लेकर विवाद
इस मामले में संक्रमित बच्चों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। सिंध हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले वकील तारिक मंसूर का दावा है कि अस्पताल की लापरवाही से करीब 200 बच्चे HIV की चपेट में आ चुके हैं। उन्होंने अदालत में इस संबंध में कई दस्तावेज और सबूत भी पेश किए हैं। वहीं सरकार का कहना है कि फिलहाल केवल 78 बच्चों की पुष्टि हुई है। मंत्री के मुताबिक, कई परिवार सामाजिक बदनामी के डर से जांच में सामने नहीं आ रहे हैं। इसी वजह से संक्रमित बच्चों की वास्तविक संख्या का पता लगाने में मुश्किल हो रही है।
अदालत में क्या मांग की गई?
याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग बनाया जाए। साथ ही सभी प्रभावित बच्चों को जीवनभर मुफ्त और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा उनके परिवारों को उचित आर्थिक सहायता और सम्मानजनक मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
संक्रमण कैसे फैला? जांच जारी
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया जा रहा है कि अस्पताल में एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल किया गया, जिससे संक्रमण फैला। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग इस दावे को स्वीकार नहीं कर रहा है। सईद गनी का कहना है कि अस्पताल में ऑटो-डिसेबल सिरिंज इस्तेमाल होती हैं, जिन्हें दोबारा उपयोग करना संभव नहीं होता। इसलिए सरकार अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सिरिंज दोबारा इस्तेमाल नहीं हुईं, तो संक्रमित खून चढ़ाने, सर्जिकल उपकरणों की सफाई में लापरवाही या अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण प्रणाली जैसी दूसरी संभावनाओं की भी गंभीर जांच की जानी चाहिए।
पीड़ित बच्चों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान
इस घटना के बाद प्रभावित परिवार मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियों से गुजर रहे हैं। सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वह सिर्फ जांच तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के भविष्य की भी जिम्मेदारी उठाए।
सईद गनी ने कहा कि सरकार केवल मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानेगी। सभी प्रभावित बच्चों को पूरी तरह मुफ्त और लगातार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही परिवारों को जरूरी आर्थिक सहायता देने और बच्चों को सामाजिक भेदभाव से बचाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएंगे। अब सभी की नजर सिंध हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि इस गंभीर स्वास्थ्य संकट के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी।
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