Explainer: क्या पाकिस्तान से छीन लिया जाएगा GSP+ का दर्जा? यूरोपीय यूनियन की धमकी का इकोनॉमी पर कितना असर?
Pakistan's convictions for civilians: पाकिस्तान में एक सैन्य अदालत की तरफ से 25 आम नागरिकों को सजा सुनाई गई है, जिसकी अमेरिका ने तीखी आलोचना करते हुए, कार्यवाही में "न्यायिक स्वतंत्रता, पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया की गारंटी" की कमी का आरोप लगाया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने सोमवार को एक्स पर कहा, कि "अमेरिका एक सैन्य न्यायाधिकरण से पाकिस्तानी नागरिकों को सजा सुनाए जाने को लेकर चिंतित है और पाकिस्तानी अधिकारियों से निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया के अधिकार का सम्मान करने का आह्वान करता है।"

अमेरिका का यह बयान यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय संघ (EU) की तरफ से जताई गई इन्हीं तरह की चिंताओं के बाद आया है, जिन्होंने आम नागरिकों पर मुकदमा चलाने के लिए सैन्य अदालतों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। EU, 21 दिसंबर के सैन्य अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देने वाला पहला संगठन था, जिसने एक बयान जारी कर सजा पर "चिंता" जताई।
इसके अलावा, EU ने सामान्यीकृत वरीयता योजना प्लस (GSP+) के तहत पाकिस्तान की लाभार्थी स्थिति पर भी प्रकाश डाला, जो पाकिस्तानी निर्यात को यूरोपीय बाजारों में शुल्क मुक्त प्रवेश करने की इजाजत देता है। माना जा रहा है, कि इसका जिक्र कर EU ने पाकिस्तान को एक चेतावनी दी है, कि अगर मानवाधिकार को लेकर पाकिस्तान नाकाम रहता है, तो उसे GSP+ में उसका रहना मुश्किल हो सकता है। जाहिर तौर पर, अगर पाकिस्तान को GSP+ से बाहर निकाला जाता है, तो उसकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि पाकिस्तान ने सैन्य अदालतों के माध्यम से आम नागरिकों को सजा क्यों सुनाई गई है और इस्लामाबाद ने अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की आलोचना का किस प्रकार जवाब दिया है? वहीं, सजा के इस ऐलान के बाद पाकिस्तान के पश्चिमी देशों के साथ संबंध किस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं?
सैन्य अदालत ने आम नागरिकों को क्यों सुनाई सजा? (Pakistan's convictions for civilians)
पाकिस्तान में सैकड़ों लोगों के खिलाफ सैन्य अदालतों में ट्रायल्स चल रहे हैं, जिनके खिलाफ पिछले साल 9 मई को इस्लामाबाद में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किए गये थे। इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के समर्थकों ने सरकारी इमारतों, स्मारकों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था, जिसमें रावलपिंडी में सेना मुख्यालय और लाहौर में एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी का आवास शामिल था, जिसे आग के हवाले कर दिया गया था।
इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 48 घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया, लेकिन हिंसा के लिए हजारों पीटीआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 105 को सैन्य अदालतों में ट्रायल्स के लिए भेजा गया। इस साल अप्रैल में, तीन साल से कम की सजा वाले 20 लोगों को रिहा कर दिया गया, जबकि 85 अभी भी हिरासत में हैं। 21 दिसंबर को, सेना ने घोषणा की, कि 25 लोगों को दोषी ठहराया गया है, जिनमें से कम से कम 14 को 10 साल की जेल की सजा मिली है।
सेना ने कार्यवाही का बचाव करते हुए कहा है, कि उन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन किया और अभियुक्तों के कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित किया। पिछले महीने, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने पाकिस्तानी सरकार से सैन्य अदालतों से संबंधित कानून की समीक्षा करने और नागरिकों को सैन्य अदालतों की जगह नागरिक अदालत के जरिए मुकदमा चलाने का आग्रह किया था।

पाकिस्तान ने आलोचना का क्या जवाब दिया है?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने कहा है, कि सरकार बयान की समीक्षा कर रही है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया, कि पाकिस्तान का संविधान और न्यायिक प्रणाली को कोई विदेशी संस्था नहीं, बल्कि उसके घरेलू राजनीतिक और कानूनी निर्णयों को निर्धारित करेगी।
मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया, कि पाकिस्तान की कानूनी प्रणाली "मानव अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता के संवर्धन और संरक्षण की गारंटी देती है", और ICCPR के प्रावधानों सहित "अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून" के मुताबिक है। बयान में कहा गया, "हम बिना किसी भेदभाव और दोहरे मानदंडों के अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून को बनाए रखने के लिए यूरोपीय संघ सहित अपने अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ जुड़ना जारी रखेंगे।"
GSP+ का दर्जा क्या है और इसका सैन्य अदालतों से क्या संबंध है?
जीएसपी+ यूरोपीय संघ की तरफ से चलाया जाने वाला एक कार्यक्रम है, जिसका मकसद भागीदार देशों को शासन मानकों में सुधार करने और उन्हें रियायती व्यापार पहुंच प्रदान करके उनके विकास को प्रोत्साहित करना है। लेकिन, यूरोपीय संघ के GSP+ के तहत लाभ हासिल करने के लिए देशों को ICCPR सहित 27 अंतर्राष्ट्रीय कोर सम्मेलनों का पालन करना और उन्हें "प्रभावी रूप से लागू करना" आवश्यक होता है।
ICCPR के तहत मानवाधिकार, श्रम अधिकार, पर्यावरण और सुशासन जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाता है।
पाकिस्तान जीएसपी+ लाभ प्राप्त करने वाले आठ देशों में से एक है, जिनमें से मुख्य यूरोपीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच है। बोलीविया, केप वर्डे, किर्गिस्तान, मंगोलिया, फिलीपींस, श्रीलंका और उज्बेकिस्तान अन्य देश हैं, जिनके साथ यूरोपीय संघ जीएसपी+ पहल के तहत भागीदार है।
पाकिस्तान की सजा पर अपने बयान में यूरोपीय संघ ने कहा है, कि ICCPR के तहत लोगों को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधिकरण के समक्ष निष्पक्ष और सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार है, जिसमें पर्याप्त कानूनी प्रतिनिधित्व हो।
पूर्व राज्य मंत्री हारून शरीफ ने चेतावनी दी है, कि गैर-आर्थिक प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने में नाकामी पाकिस्तान के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
अल जज़ीरा के एक रिपोर्ट में उन्होंने कहा, कि "ऐसे समझौते राजनीतिक सौदेबाजी के उपकरण हैं। जब किसी देश की राजनीति खंडित होती है, तो यह आर्थिक परिणामों को प्रभावित करती है और गंभीर चुनौतियां पैदा करती है।"

क्या पाकिस्तान के निर्यात पर असर पड़ेगा?
इमरान खान की पार्टी PTI, सैन्य अदालतों में चलने वाले ट्राय्स को इमरान खान के खिलाफ चल रहे सेना के अभियान का हिस्सा मानती है। इमरान खान को अगस्त 2023 में फिर से गिरफ्तार किया गया था और वह 9 मई के दंगों से जुड़े देशद्रोह और आतंकवाद सहित दर्जनों अन्य मामलों में जेल में बंद है। सेना ने PTI को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है।
पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाकन अब्बासी ने भी सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमा चलाने के फैसले पर सवाल उठाया है, उनका तर्क है, कि इन मुकदमों ने अंतरराष्ट्रीय निकायों को आलोचना का आधार प्रदान किया। उन्होंने अल जजीरा से कहा, "सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए आतंकवाद विरोधी या अन्य नागरिक अदालतों का इस्तेमाल कर सकती थी। सैन्य ट्रैयल्स, संवैधानिक होते हुए भी, मौलिक अधिकारों के साथ संघर्ष करते हैं।"
लेकिन, अगर इस फैसले के लिए पाकिस्तान को GSP+ से बाहर किया जाता है, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने अल जजीरा से कहा, "जीएसपी+ दर्जा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यूरोपीय बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच की अनुमति देता है। इस दर्जे को खोने से पाकिस्तान के निर्यात में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आ सकती है।"
2023 के यूरोपीय संघ के आंकड़ों से पता चलता है,. कि पाकिस्तान सबसे बड़ा जीएसपी+ लाभार्थी था, जिसने यूरोप को 78 प्रतिशत से ज्यादा सामानों का निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 4 बिलियन यूरो (4.2 बिलियन डॉलर) थी। इन निर्यातों में कपड़ा और परिधान का हिस्सा 73 प्रतिशत था।
शरीफ, जो पाकिस्तान के निवेश बोर्ड (बीओआई) के अध्यक्ष भी थे, उनका कहना है कि देश के आर्थिक प्रबंधकों को इस तथ्य से अवगत होना चाहिए, कि यूरोपीय संघ के देशों के साथ-साथ ब्रिटेन और अमेरिका का भी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के फैसलों पर बड़ा प्रभाव है, जो पाकिस्तान को जीवन रेखा, 7 बिलियन डॉलर का ऋण प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान वैश्विक समुदाय और उनकी संस्थाओं के साथ न जुड़कर खुद को अलग-थलग कर रहा है, और हमारे चल रहे घरेलू राजनीतिक विवाद के कारण इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।" शरीफ ने कहा, "देश को इस अस्थिर राजनीतिक माहौल की तीव्रता को कम करना चाहिए और पेशेवर नजरिए के साथ अपने लिए जगह बनानी चाहिए, और वैश्विक संस्थाओं से जुड़ने का तरीका खोजना चाहिए। अन्यथा, इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।"
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