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Missile: पाकिस्तान बना रहा अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल? Agni-V की तुलना में पाकिस्तानी शाहीन में कितना दम?

India Vs Pakistan Missile: भारत से विभाजित होने के बाद से ही पाकिस्तान, अमेरिकी डॉलर्स पर पला है। अमेरिका ने भारत को काउंटर करने के लिए पाकिस्तान में बेहिसाब मात्रा में डॉलर्स की बारिश की, लेकिन अब जाकर अमेरिका को लग रहा होगा, कि सांप को दूध पिलाने का अंजाम क्या होता है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडॉमेन्ट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के उप-सलाहकार ने कहा है, कि 'पाकिस्तान ने लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम और ऐसे दूसरे हथियार विकसित कर लिए हैं, जो उसे बड़ी रॉकेट मोटर्स से टेस्ट करने की क्षमता देते हैं।"

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उन्होंने कार्यक्रम में आगे आशंका जताई, कि 'पाकिस्तान जिस हिसाब से अपनी क्षमता का विकास कर रहा है, उस रफ्तार से वो बहुत जल्द दक्षिण एशिया से बाहर के लक्ष्यों को भी निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर लेगा और इसमें अमेरिका भी शामिल होगा।'

उनके इस बयान ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान ने यदि आज ये क्षमता हासिल की है, तो उसके पीछे भी अमेरिका ही है, जिसने बोरियों में भरकर डॉलर्स आतंकवादियों के पनाहगार माने जाने वाले इस देश में भेजा।

अमेरिका ने ही पाकिस्तान को पाला

भारत के खिलाफ 1971 के युद्ध के दौरान इस्लामाबाद का समर्थन करने के लिए अपनी सेना भेजने से लेकर वाशिंगटन को धमकी देने वाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने की कोशिश कर रहे एक पाकिस्तानी सरकारी उद्यम पर प्रतिबंध लगाने तक, अमेरिका-पाकिस्तान संबंध अपने आप में एक स्टडी का विषय है।

पेंटागन के आकलन के मुताबिक, पाकिस्तान उन शत्रुओं की छोटी लिस्ट में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसमें रूस, उत्तर कोरिया और चीन शामिल हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में हमला कर सकते हैं। इस्लामाबाद का सोफिस्टिकेटेड मिसाइल विकास कार्यक्रम अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है।

इसके अलावा, अमेरिका ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली पाकिस्तान के राष्ट्रीय विकास परिसर (NDC) सहित चार पाकिस्तानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

अमेरिका का कहना है, कि NDC ने पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए सामनों को हासिल करने के लिए काम किया है - जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों और मिसाइल परीक्षण उपकरणों के लिए लॉन्च सपोर्ट उपकरण के रूप में उपयोग किए जाने वाले विशेष वाहन चेसिस शामिल हैं। अमेरिकी आकलन के मुताबिक, एनडीसी, पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास के लिए जिम्मेदार है, जिसमें शाहीन-सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं।

क्या सिर्फ भारतीय मिसाइलों की बराबरी करना चाहता है पाकिस्तान?

साल 2024 में दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि चीन और पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए भारत अपनी मिसाइलों की शक्ति को आजमाएगा। भारत की अधिकांश सैन्य प्रगति चीन को ध्यान में रखकर की गई है। हालांकि, आर्थिक संकटों से जूझने के बावजूद, पाकिस्तान भारत की हथियार अधिग्रहण की गति से मेल खाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

भारत, पश्चिम में अपने पड़ोसी दुश्मन पाकिस्तान के पूरे इलाके पर हमला करने में सक्षम है। अग्नि-5 और पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों जैसी लंबी दूरी की प्रणालियों की तलाश में नई दिल्ली का ध्यान चीन पर है, जो अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहा है और उसने एक बड़ी मिसाइल शक्ति विकसित की है।

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पाकिस्तान-चीन के खिलाफ भारत की तैयारी क्या है?

इस साल 11 मार्च को, भारत ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक के साथ लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल, अग्नि-5 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। MIRVs कई वारहेड्स को रोकने की कोशिश कर रहे दुश्मनों की रक्षा प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस को भेद सकते हैं।

MIRV वाली मिसाइल कई वारहेड्स से लैस होगी, जिससे एक ही मिसाइल, एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेद सकती है या कई वारहेड्स वाले एक ही लक्ष्य को भेद सकती है। ऐसी तकनीक MIRV को एंटी-मिसाइल तकनीक से रोकना भी मुश्किल बना देगी।

50 टन वजनी अग्नि-V की ऑपरेशनल तैनाती ने चीन के खिलाफ भारत की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा दिया है, जिसके पास डोंग फेंग-41 जैसी मिसाइलें हैं। 12,000-15,000 किलोमीटर की रेंज के साथ, DF-41 किसी भी भारतीय शहर को निशाना बना सकता है। लेकिन, अग्नि-V ने चीन के सबसे उत्तरी हिस्से को भी भारत की मारक क्षमता के दायरे में ला दिया और इसके कैनिस्टर लॉन्च ने तेज लॉन्च के रास्ते को खोल दिया है।

ताजा स्थिति ये है, कि अब भारत और चीन के पास ऐसी मिसाइले हैं, जो एक दूसरे के किसी भी हिस्से पर हमला कर सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है, कि अब भारत के पास ऐसी टेक्नोलॉजी है, कि भारत पाकिस्तान को युद्ध शुरू होने से पहले ही निहत्था कर सकता है।

नवंबर में, भारत ने अपनी पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया है। इस हाइपरसोनिक मिसाइल को 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सशस्त्र बलों के लिए विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मिसाइल कथित तौर पर मैक 6 (ध्वनि की गति से छह गुना) की गति से यात्रा करने और हमला करने में सक्षम है, जिससे मौजूदा मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा, नवंबर के अंत में, भारत ने अपनी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करके परमाणु प्रतिरोध के अपने समुद्री चरण को चालू कर दिया, जिससे चीन की मुख्य भूमि का अधिकांश क्षेत्र इसकी मारक क्षमता के दायरे में आ गया है।

भारत अपनी सामरिक बल कमान (SFC) को एक-एक मिसाइल के साथ दुरुस्त कर रहा है, जिसे सामरिक परमाणु कमान के रूप में भी जाना जाता है। अप्रैल में, इसने अपनी नई पीढ़ी की अग्नि-प्राइम बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसकी मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर है और यह पाकिस्तान से आने वाले खतरों का मुकाबला करेगी।

जैसे-जैसे भारतीय वैज्ञानिकों ने मिसाइलों की रेंज बढ़ाई, तकनीक भी विकसित होती गई। आज की तारीख में भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी अमेरिका, चीन या रूस से कम नहीं है।

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पाकिस्तान की मिसाइलों में कितनी ताकत है?

पाकिस्तान ने जनवरी 2017 में अबाबील मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग करके अपना पहला MIRV परीक्षण किया था। इस मिसाइल को कई वारहेड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी रेंज लगभग 2,200 किलोमीटर है।

पाकिस्तान की शाहीन सीरिज की बैलिस्टिक मिसाइलें, जिनमें शाहीन-I, शाहीन-II और शाहीन-III शामिल हैं, वो लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं। करीब 2750 किलोमीटर की रेंज वाली शाहीन-III भारत और उससे आगे के लक्ष्यों तक पहुंच सकती है। इस मिसाइल को भारत के सभी हिस्सों को कवर करने के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी शामिल हैं, जिन्हें "रणनीतिक ठिकानों के रूप में विकसित किया जा रहा है।"

2017 की सैन्य परेड में, पाकिस्तान ने 550 किलोमीटर की रेंज वाली ALCM Ra'ad-II प्रदर्शित की थी। रेंज में वृद्धि से मिसाइल ज्यादा दूरी पर लक्ष्यों को हिट करने में सक्षम होगी। 600 किलोमीटर की विस्तारित रेंज वाली इस मिसाइल का परीक्षण 2020 में किया गया था।

पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान को अब एक लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल विकसित करने की जरूरत है, जिसमें इलाके को कवर करने की क्षमता हो और दुश्मनों का पता लगाने और दुश्मनों के हमले से बचने की क्षमता हो। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का इशारा भारत के पास मौजूदी रूसी एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम से है, जिसमें पाकिस्तान की अभी तक की बनाई गई सभी मिसाइलों को ट्रैक करने और मार गिराने की क्षमता है।

इनके अलावा, यह अनुमान लगाया जा रहा है, कि पाकिस्तान फिलहाल 7,000 किलोमीटर की रेंज वाली एक ICBM-Taimur मिसाइल का निर्माण कर रहा है, जिसकी ताकत के बारे में अभी जानकारी नहीं है।

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