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पाकिस्तान का तबाह होना तय, 2026 तक चुकाने होंगे 77 अरब डॉलर कर्ज, चीन-सऊदी से लिया सबसे ज्यादा पैसा

पाकिस्तान एक तरफ आर्थिक संकट में फंसा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के नेता आपसी लड़ाई में बुरी तरह से उलझे हुए हैं। लिहाजा, देश के गृहयुद्ध में फंसने की स्थिति बन रही है।

Pakistan $77 Billion Debt

Pakistan $77 Billion Debt: भीषण आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डर ने एक दिन पहले कहा है, कि पाकिस्तान कोई भीख मांगने वाला देश नहीं है, बल्कि वो IMF का सदस्य देश है।

इशाक डार कहते हैं, कि आईएमएफ करा सदस्य होने के नाते पाकिस्तान उससे बेलऑउट पैकेज मांग रहा है, कोई भीख नहीं मांग रहा है।

इशाक डार सही कहते हैं, लेकिन इशाक डर भूल गये, कि कर्ज चुकाया भी जाता है और ताजा रिपोर्ट में पता चला है, कि पाकिस्तान को साल 2026 तक, यानि अगले 3 सालों में 77.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है।

यानि, जो पाकिस्तान 1.1 अरब डॉलर के कर्ज की किश्त के लिए आईएमएफ के सामने महीनों से गिड़गिड़ा रहा है और जिस पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले कई महीनों से 3 अरब डॉलर के आसपास ही पैसे बचे हों, उस पाकिस्तान के वित्तमंत्री इशाक डर, अपनी अकड़ दिखा रहे हैं।

कहां से कर्ज चुकाएगा पाकिस्तान?

इशाक डर भले ही फिजूल की बात बोलते रहें, लेकिन पाकिस्तान को अप्रैल 2023 से जून 2026 तक 77.5 अरब अमेरीकी डालर के बाहरी ऋण का पुनर्भुगतान करना है। अमेरिकी थिंक टैंक ने चेतावनी दी है, कि ये कर्ज चुकाना पाकिस्तान के लिए असंभव है, लिहाजा पाकिस्तान के लिए दिवालिया होना तय है।

जियो न्यूज ने शुक्रवार को बताया, कि यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस (यूएसआईपी) द्वारा गुरुवार को प्रकाशित विश्लेषण में चेतावनी दी गई है, कि आसमान छूती महंगाई, राजनीतिक संघर्ष और बढ़ते आतंकवाद के बीच, पाकिस्तान अपने बड़े पैमाने पर बाहरी ऋण दायित्वों के कारण डिफ़ॉल्ट के जोखिम का सामना कर रहा है।

पाकिस्तान, वर्तमान में एक बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और पाकिस्तान में विदेशी सामानों के आयात पर करीब एक साल पहले ही प्रतिबंध लग गया था, इसीलिए पिछले 6 महीने से पाकिस्तान के पास 3 अरब डॉलर बचा हुआ है।

USIP की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 तक पाकिस्तान को 77.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की जरूरत है, और जिस पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था ही 350 अरब डॉलर की है, उसके लिए ये कर्ज चुकाना नामुमकिन की तरह है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान को अंतत: डिफॉल्ट होना ही होगा और पाकिस्तान को इसके लिए 'विघटनकारी प्रभावों' को झेलना होगा।

अगले तीन सालों में कर्ज में डूबे पाकिस्तान को, चीनी वित्तीय संस्थानों, निजी लेनदारों और सऊदी अरब का बड़ा भुगतान करना है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसी साल जून महीने तक पाकिस्तान के सामने 4.5 अरब डॉलर का एक लोन चुकाना है और पाकिस्तान इतने पैसों की व्यवस्था कहां से करता है, ये देखने वाली बात होगी। इनमें से 1.4 अरब डॉलर चीन का सेफ डिपोजिट है, जो पाकिस्तान के स्टेट बैंक में रखा गया था और 1 अरब डॉलर का चीनी कॉमर्शियल लोन का कर्ज है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने लिया था।

पाकिस्तान क्या सोच रहा है?

पाकिस्तान के अधिकारी और पाकिस्तान की सरकार इस उम्मीद में है, कि वो चीन को जून में पैसों का भुगतान नहीं करने की बात को लेकर मना लेगा। चीन पहले भी कई बार ऐसा कर चुका है, लिहाजा बहुत संभव है, कि चीन जून में पैसे नहीं लेने के लिए तैयार हो जाए। लेकिन, थिंक टैंक ने कहा है, कि ऐसा करना पाकिस्तान के लिए अपने संकट को हल करना नहीं, बल्कि उसे कुछ महीनों के लिए आगे करना होगा।

थिंक टैंक ने कहा है, कि अगर पाकिस्तान अपने सभी दोस्त देशों को इस साल कर्ज का भुगतान नहीं करने के लिए मना भी ले, फिर भी पाकिस्तान के लिए मुसीबत कम नहीं होने वाली होगी। क्योंकि, ऐसी स्थिति में अगले वित्त वर्ष तक पाकिस्तान को 25 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना होगा। और थिंक टैंक का कहना है, कि एक साल में पाकिस्तान इतनी रकम कहां से जमा करेगा?

पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.1 बिलियन अमरीकी डालर की धनराशि का इंतजार कर रहा है, लेकिन, आईएमएफ पाकिस्तान को एक ढेला तक देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच साल 2019 में 6.5 अरब डॉलर का बेलऑउट पैकेज कार्यक्रम पर बात फाइनल हुई थी और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान को संकट से थोड़ी राहत तभी मिलेगी, जब उसे आईएमएफ से कर्ज मिल जाता है।

पाकिस्तान इसी 6.5 अरब डॉलर में से 1.1 अरब डॉलर की किश्त आईएमएफ से मांग रहा है। लेकिन, पाकिस्तान सरकार ने इतनी बार आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन किया है, कि उसे पाकिस्तान के ऊपर से भरोसा ही उठ गया है।

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच 2019 में जो समझौता हुआ था, वो कार्यक्रम 30 जून 2023 को खत्म होगा और इस सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। लिहाजा, अब यह तय है, कि पाकिस्तान के पास दिवालिया होने के अलावा अब कोई और विकल्प नहीं बचा है।

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