दुश्मन तो छोड़िए, दोस्त देशों की भी खतरनाक जासूसी करता है अमेरिका, लीक हुए टॉप सीक्रेट दस्तावेजों से खुलासा
चीन, मिडिल ईस्ट और यूक्रेन युद्ध के लिए अमेरिका क्या प्लान बना रहा है और उसके प्लान में क्या क्या है, इन तमाम चीजों को लेकर पेंटागन का सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स लीक हो गया है।

US Secret Pentagon Documents Leak: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के लीक हुए दस्तावेजों से कई बड़े खुलासे हुए हैं, जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा रखा है। अमेरिका ने लीक डॉक्यूमेंट्स को लेकर जांच के आदेश दे दिए हैं और पहली नजर में उसने रूस के जासूसों पर पेंटागन के सीक्रेट दस्तावेजों को लीक करने का आरोप लगाया है।
लेकिन, लीक दस्तावेजों में अमेरिका के जासूसों के जाल को लेकर बहुत बड़ा खुलासा हुआ है।
लीक हुए दस्तावेजों से पता चला है, कि अमेरिका का जासूसी तंत्र कैसे दुश्मन तो दुश्मन, बल्कि दोस्त देशों की भी गहराई में जासूसी करते हैं।
लीक हुए दस्तावेज, जो रूस की घटती सैन्य शक्ति के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं, उसमें कहा गया है, कि किस हद तक अमेरिकी जासूसी रणनीति ने व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन में प्रभावी रूप से प्रवेश किया है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) ने पेंटागन के सीक्रेट दस्तावेजों को पहली बार छापा है, जिसमें पिछले साल फरवरी से, जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, उसके बाद से इस साल मार्च तक की टॉप सीक्रेट जानकारियां शामिल थीं।
लीक दस्तावेजों से पता चला है, कि अमेरिका ने अपने सहयोगी देश दक्षिण कोरिया, ईरान और यूके सहित विभिन्न देशों में गहराई से जासूसी की है।
डब्ल्यूएसजे ने बताया, कि दक्षिण कोरिया, इज़राइल, यूक्रेन और यूनाइटेड किंगडम उन सहयोगियों में शामिल हैं जिन पर अमेरिका की गहरी नजर होती है।
दस्तावेजों से पता चला है, कि अमेरिकी सैन्य अधिकारी अपने यूक्रेनी समकक्षों को सटीक स्थानों पर आसन्न हमलों के बारे में रीयल टाइम जानकारी देने में सक्षम हो चुके हैं, जो उस क्षेत्र में व्यापक खुफिया जानकारी एकत्र करने का संकेत देता है।

दोस्त देशों की भी जासूसी करता है अमेरिका
दस्तावेजों से पता चलता है, कि रूस के राष्ट्रपति भवन में और मॉस्को में कितनी ऊपर तक अमेरिकी जासूसी की पहुंच है। लेकिन, अब आशंका जताई गई है, कि लीक हुए दस्तावेजों के बाद अब रूस को उन खुफिया स्रोतों को काटने में काफी मदद मिलेगी, इससे रूस में अमेरिका का खुफिया तंत्र कमजोर होगा। इसके अलावा अब रूस को ये भी पता चल गया है, कि जानकारियां जुटाने के लिए अमेरिका क्या करता है और क्या नहीं करता है।
हालांकि, इस लीक दस्तावेजों को लेकर अमेरिका की तरफ से ये दावा किया गया है, कि ऑरिजनल दस्तावेज के साथ रूस ने छेड़छाड़ की है। लेकिन, ये दस्तावेज 'फाइव आई' देश में शामिल अमेरिका के अलावा चार अन्य देश, जैसे ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कनाडा के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं।
इस दस्तावेज में बताया गया है, कि अमेरिकी सैन्य जासूसों को ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम और उत्तर कोरिया की मिसाइल प्रणालियों के बारे में जानकारी है। इसके अलावा अमेरिका, यूक्रेन के सैन्य और रणनीतिक नेताओं की भी जासूसी करता है।
डब्ल्यूएसजे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स के लीक होने के बाद अमेरिका ने अपने बाकी सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स की सिक्योरिटी काफी सख्त कर दी है।
माना जा रहा है, कि इस लीक के बाद अमेरिका के जासूसी तंत्र को बहुत बड़ा झटका लगा है और इससे आने वाले दिनों अमेरिका के जासूसी नेटवर्क को बहुत बड़ा नुकसान होगा।
वहीं, एक यूरोपीय देश के वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा है, कि टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स के लीक होने से अमेरिका को लेकर भरोसा टूटा है और भविष्य में अमेरिका के साथ खुफिया जानकारियां साझा करने पर रोक लग सकता है।
उन्होंने कहा, कि गोपनीय सूचनाओं का आदान प्रदान में विश्वास सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
सीक्रेट दस्तावेज में कहा गया है, कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध में अब तक 16 हजार से 17 हजार 500 की संख्या में रूसी सैनिक मारे गये हैं, जबकि 71 हजार 500 यूक्रेनी सैनिकों की मौत हुई है।
वहीं, पेंटागन का मानना है, कि युद्ध में अभी तक 2 लाख रूसी मारे गये हैं या घायल हुए हैं, जबकि यूक्रेन के लिए ये आंकड़ा दोगुना है।
लीक हुए दस्तावेज़ों में मध्य पूर्व में चीन की स्थिति और दुनिया भर में आतंकवादी खतरों के अमेरिकी विश्लेषण का भी उल्लेख किया गया है।












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