Pakistan: सरकार-आर्मी ने मौत से बदतर कर रखी बलूचियों की जिंदगी, खुद पाकिस्तानी खोल रहे पोल, देखें रिपोर्ट
Pakistan: पाकिस्तानी एक्टविस्ट और बलूचियों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता जिब्रान नासिर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि 'बलूचिस्तान में आम नागरिक, पुलिसकर्मी, सिविल सर्वेंट और सैनिक मारे जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी को भी सवाल उठाने की इजाज़त नहीं है।' उन्होंने लिखा- 'बलूचिस्तान जल रहा है। हमारे नागरिक, पुलिसकर्मी, सिविल सेवक और सैनिक शहीद हो रहे हैं, फिर भी किसी को भी सवाल उठाने की परमीशन नहीं है।'
सरकार और आर्मी पर नासिर का तंज
नासिर ने उस नैरेटिव पर भी कटाक्ष किया जिसमें पाकिस्तान खुद को पूरी तरह निर्दोष बताता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार मानती है कि उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने आगे लिखा- 'हमने, जाहिरा तौर पर, किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ नहीं किया है। किसी के आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंची है, कोई निराश नहीं हुआ है, किसी का दिल नहीं दुखा है, और किसी के पास हमसे नफरत करने का कोई कारण नहीं है।'

सरकार का लालच और हत्याएं
नासिर ने आगे कहा कि सरकार हिंसा के लिए पूरी तरह दूसरों को जिम्मेदार ठहराती है। उनके मुताबिक, आधिकारिक कहानी यह है कि लोग केवल पैसों के लिए हिंसा कर रहे हैं। नासिर आगे लिखते हैं कि 'समस्या यह है कि वे सभी इतने ओछे, इतने नीच, इतने लालची और इतने अदूरदर्शी हैं कि कुछ डॉलरों के खातिर वे न केवल खुद को बल्कि अपने भविष्य और अपने साथी नागरिकों को भी आग में झोंक देंगे।'
जवाबदेही से बचने का आसान तरीका ढूंढ़ती है सरकार
नासिर का कहना है कि इस तरह की सोच से सरकार को जवाबदेही से बचने का मौका मिल जाता है। जब सारी गलती दूसरों पर डाल दी जाती है, तो न कोई जिम्मेदारी बचती है और न ही आत्ममंथन की जरूरत। उन्होंने लिखा कि इस कहानी में- 'कोई जिम्मेदारी नहीं है, कोई गलती नहीं है, कोई सवाल नहीं है और जवाबदेही की कोई जरूरत नहीं है।'
'बल और हिंसा से सिर्फ अस्थायी कंट्रोल मिलता है'
जिब्रान नासिर ने साफ कहा कि सरकार जिस 'शांति' की बात करती है, वह असल में शांति नहीं है। वह सिर्फ कुछ समय के लिए हालात को दबा देने जैसा है। उन्होंने लिखा- 'बल, ज़बरदस्ती और हिंसा केवल सीमित और अस्थायी नियंत्रण ही हासिल कर सकते हैं, जिसे हम आसानी से 'शांति' कहते हैं। यह शांति नहीं है; यह केवल एक ठहराव है।'
बलूचिस्तान चाहिए पर बलूची नहीं
नासिर के अनुसार, जब तक सरकार लोगों से बात नहीं करेगी, उन्हें हितधारक नहीं मानेगी और अपनी गलत नीतियों को स्वीकार नहीं करेगी, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। उन्होंने कहा- 'जब तक हम बात करने से, लोगों को हितधारकों के रूप में पहचानने से, उनकी गरिमा और मूल्य को स्वीकार करने से, और अपनी नीतियों तथा गलतियों को स्वीकार करने से इनकार करते रहेंगे, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।' इसका मतलब ये है कि सरकार को बलूचिस्तान चाहिए लेकिन बलूचियों के बिना।
किडनैपिंग और गायब किए जाने के मामले बढ़े
नासिर ने चेतावनी दी कि मीडिया पर रोक, दमन और आलोचकों को चुप कराना सच्चाई से भागने जैसा है। इससे सरकार सिर्फ खुद को धोखा दे रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है बलूचिस्तान में अपहरण, जबरन गायब किए जाने और टारगेट किडनैपिंग की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका असर आम नागरिकों के साथ-साथ राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और सरकारी कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है।
परिवार सड़कों पर, सालों से लापता हैं अपने लोग
पूरे बलूचिस्तान में परिवार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका दावा है कि उनके परिजन अज्ञात लोगों द्वारा अगवा किए गए और कई सालों से उनका कोई पता नहीं है। इन घटनाओं ने पूरे प्रांत में डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया है। हालात ऐसे हैं कि राजनीतिक भागीदारी लगभग रुक गई है और आम लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी भी ठहर सी गई है।
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