ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान से भर गया सऊदी अरब का मन, किन वजहों से आई रिश्तों में दरार?
इमरान खान को बीते साल संसद में अविश्वास मत के जरिए सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल है। इमरान बार-बार सत्ता को चुनौती दे रहे हैं और सरकार उनसे लड़ने में कमजोर साबित हुई है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सऊदी अरब की आगामी यात्रा कथित तौर पर रद्द हो गई है। न्यूज-18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में मौजूदा राजनीतिक संकट के कारण सऊदी अरब ने शरीफ की यात्रा को "रद्द" कर दिया है।
आपको बता दें कि शहबाज शरीफ अगले सप्ताह रियाद का दौरा करने वाले थे। लेकिन आखिरी कदम पर ये दौरा रद्द कर दिया गया। इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि सऊदी के क्राउन प्रिंस, पीएम शहबाज शरीफ को मुलाकात के लिए समय नहीं दे रहे थे।
आपको बता दें कि चीन और सऊदी अरब वो देश हैं जिनकी वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यस्था चलती है। ऐसे में सऊदी अरब की ये बेरूखी पाकिस्तान को भारी पड़ सकती है। हाल के कई ऐसे घटनाक्रम इशारा करते हैं कि सऊदी ने अब पाकिस्तान को भाव देना बंद कर दिया है।
एक दौर ऐसा भी था जब कहा जाता था कि पाकिस्तान तो सबंध सऊदी अरब के साथ ऐसे जुड़ा हुआ है जैसे कि वो उसकी कमर से बंधा हुआ हो, लेकिन अब ये कहावत बीते दौर की बात हो गई है। आईए जानते हैं कि ऐसी क्या वजह है जिसकी वजह से दोनों देशों का करीबी रिश्ता अब टूट चुका है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को पता है कि शहबाज शरीफ का ये दौरा खैरात मांगने के अलावा कुछ और नहीं है। सऊदी अरब ने हाल के सालों में अपनी कर्ज नीति में बदलाव किया है। वह ऐसे देशों को पैसे नहीं दे रहा, जो अपने आर्थिक बुनियादी ढांचे में सुधार करने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान पीएम का ये दौरा सिर्फ और सिर्फ प्रिंस सलमान की टेंशन बढ़ाता।
पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति
शहबाज शरीफ भले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हुए हैं मगर सऊदी को भी पता है कि उनकी देश में स्थिति ठीक नहीं है। शरीफ सरकार की सरकार बेहद अलोकप्रिय है और यदि चुनाव होते हैं तो वे इमरान खान के हाथों सत्ता गंवा देंगे। ऐसे में मौजूदा सरकार संग बेहतर रिश्ते बनाना कहीं से समझदारी नहीं है।
मध्यपूर्व की बदलती राजनीति
मध्यपूर्व में दो ध्रुवीय राजनीति का दौर फिलहाल खत्म हो चुका है। सऊदी और ईरान दोनों ने ही हाल के समय में संबंध ठीक किए हैं। अब पाकिस्तान के पास ये बार्गेनिंग पावर नहीं है कि वह सऊदी को चिढ़ाकर ईरान के खेमे में जाने का दावा करे। तुर्की की भी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह पाकिस्तान की मदद कर उसे अपना भरोसा दिखा सके।
भारत संग नजदीकियां
पिछले कई सालों में सऊदी अरब के साथ भारत की नजदीकियां बढ़ी हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच आर्थिक संबंधों के अलावा अब सुरक्षा नीति को लेकर भी संबंध गहरा रहे हैं। साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भारत में आई है तभी से सऊदी अरब के साथ रिश्तों को फिर से नया स्वरूप देने की शुरुआत की गई है।
इमरान खान
इमरान खान जल्द से जल्द राष्ट्रीय चुनाव की मांग कर रहे हैं, जो इस साल के अंत में होने वाले हैं। यदि पाकिस्तान में साफ-सुधरा चुनाव होता है तो इसकी संभावना बहुत अधिक है कि फिर से इमरान खान सत्ता में आएंगे। इमरान खान की कुछ हरकतों के कारण उनसे सऊदी प्रिंस नाराज बताए जाते हैं। सऊदी अरब ही नहीं बल्कि लगभग सभी पश्चिमी देश इमरान खान संग कोई भी संपर्क रखना नहीं चाहते हैं।












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